Recent Posts - page 536

  • # किस्मत की लकीरें #– 10

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    मंगलू के इतिहास और काले कारनामो की ?लिस्ट लम्बी थी | कालिंदी बड़े ध्यान से उसके फाइल का अध्ययन कर रही थी तभी उस के ?मोबाइल की घंटी बजी | कालिंदी ने जैसे ही फ़ोन उठाया…

  • # Satyagraha Of Gandhi ji #

    Friends, Today is  2nd October  and  Gandhi Jayanti is celebrated on  this day  every year to mark the birth anniversary of Mahatma Gandhi. Father of the Nation, as we call him, led India’s freedom movement along with many other national… Read More ›

  • # दोहरी ज़िन्दगी #

    बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ और होते हैं। ये लोग आपके सामने अपना असली स्वभाव पेश नहीं करते, जिसकी वजह से हम उनका असली चेहरा नहीं देख पाते है | वो दोहरी… Read More ›

  • # किस्मत की लकीरें #–9

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    source: Google.com मुझे इतनी फुर्सत कहाँ कि अपनी तकदीर का लिखा देख सकूँ.. बस माँ की मुस्कराहट देख कर समझ जाता हूँ कि मेरी तकदीर बुलंद है … आज सुबह कालिंदी देर तक सो रही थी,…

  • # धुंध की दीवार #-2

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    वक़्त सीखा देता है इंसान को ..फलसफा ज़िन्दगी का , फिर तो, नसीब क्या, लकीर क्या और तकदीर क्या … ऐसा भयावह दृश्य देख कर इस ठण्ड के मौसम में भी आनंद के चेहरे पर पसीने…

  • # खराब चाय #

    कुछ दिनों पूर्व मैं कोलकाता से पटना अपने घर जा रहा था | मुझे साल में दो बार पटना जाना होता है | मैं सामान्यतः ट्रेन से ही सफ़र करना पसंद करता हूँ | इसका मुख्य कारण है कि इसका… Read More ›

  • # धुंध की दीवार # -1

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    हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास औरमेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते है…और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आतातो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देती है ……. आनंद, जिसका  आज जन्मदिन है,  लेकिन वह…

  • # किस्मत की लकीरें # – 8

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    source: Google.com एक अलग ही पहचान बनाने की आदत है मेरी तकलीफों में भी मुस्कराने की आदत है मेरी कालिंदी अपने बड़े साहब से शाबाशी पाकर बहुत खुश थी | लेकिन यह भी सच है कि…

  • # ऐ  बीते हुए लम्हे #

    यह सच है कि जो लम्हे बीत गए है, अब वह वापस कभी नहीं आएँगे। चाहे उन्हें कितनी भी शिद्द्त से पाना चाहते हो | इसलिए जो भी करना चाहते हो, इसी पल में करो और इस वर्तमान पल को… Read More ›

  • # घर में नज़रबंद #

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    दोस्तों, वैसे तो यह ब्लॉग तब लिखी गई थी जब कोरोना की शुरुआत हुई थी , लेकिन इस में एक घटना का जिक्र है जिसे पढ़ कर हमारे आपसी रिश्ते और सामाजिक अवधारणा के ऊपर हम…