# ज़िंदगी का आईना #

यह कविता ज़िंदगी को एक आईने की तरह देखती है—हमारे विचार, भावनाएँ और व्यवहार ही उसमें प्रतिबिंबित होते हैं। जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, यदि हम मुस्कुराना, संतोष रखना और उम्मीद बनाए रखना सीख लें, तो ज़िंदगी भी हमें मुस्कुराकर जवाब देती है।

ज़िंदगी का आईना

ज़िंदगी एक आईने की तरह है,
हम जैसा चेहरा दिखाएँगे,
वही बनकर लौट आएगी—
हम मुस्कुराएँगे,
तो वह भी मुस्कुराएगी।

हर सुबह
कुछ नया लेकर आती है,
कभी धूप,
कभी बादलों की चादर ओढ़कर आती है।
हम मौसम तो नहीं बदल सकते,
पर अपना नज़रिया बदल सकते हैं,
थोड़ा हँस सकते हैं,
थोड़ा संभल सकते हैं।

ग़म आएँ तो आने दो,
आँखों को कभी भीगने दो,
हर आँसू को कमजोरी मत समझो—
कुछ आँसू
दिल का बोझ हल्का करते हैं।

जो मिला, उसका शुक्र करो,
जो नहीं मिला, उसे जाने दो।
हर रिश्ते को पकड़कर रखना ज़रूरी नहीं,
कुछ लोगों को
यादों में मुस्कुराने दो।

ज़िंदगी बहुत छोटी है—
शिकायतों में इसे मत खोना,
बीते कल को बार-बार मत ढोना,
और आने वाले कल की चिंता में
आज को मत रोना।

आईने के सामने खड़े होकर
एक दिन खुद से कहना—
“मैं जैसा भी हूँ,
अपने सफ़र के लिए काफ़ी हूँ।”

फिर देखना,
चेहरे पर वही पुरानी चमक लौटेगी,
दिल में कोई बुझी हुई लौ
फिर से जल उठेगी।

क्योंकि ज़िंदगी
किस्मत का आईना भर नहीं है—
यह हमारे व्यवहार,
हमारी सोच
और हमारी मुस्कान का भी प्रतिबिंब है।

इसलिए जब भी
ज़िंदगी रूठी हुई लगे,
उसे मनाने मत जाना…

बस आईने के सामने
एक बार दिल से मुस्कुरा देना।

क्योंकि ज़िंदगी भी
तभी मुस्कुराएगी,
जब हम
मुस्कुराना सीखेंगे।

(विजय वर्मा)
 www.retiredkalam.com



Categories: Uncategorized

3 replies

  1. sir like fr, LIKE AND SUBCRIBE FOR MORE CONTENT

    Like

  2. Dear Verma ji, your poem “Zindagi Ka Aaina” is truly beautiful and deeply moving. It captures life’s greatest truth in such simple words—life reflects what we give to it. The message of gratitude, acceptance, hope, and smiling through every season touched my heart. It feels like a gentle reminder to the soul. Thank you for writing something so thoughtful and inspiring. Keep sharing your wonderful thoughts. 🙏✨

    Like

  3. सुंदर और प्रेरणादायक 🙏🏻

    Like

Leave a comment