मेरे संस्मरण

# मैं कलाकार कैसे बना?

आज का ब्लॉग लिखने में कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा है। वैसे तो हर ब्लॉग लिखते समय मुझे खुशी मिलती है, लेकिन आज कुछ अलग ही अनुभव हो रहा है। शायद इसलिए कि आज मैं अपनी किसी बड़ी उपलब्धि… Read More ›

#बचपन की यादें#

मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया, हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया, बरबादियों का शोक मनाना फ़जूल था बरबादियों का जश्न मनाता चला गया | सच,  ज़िन्दगी को खुल कर जीना चाहिए |  दुख – दर्द, उतार-चढ़ाव तो ज़िंदगी… Read More ›

# बुड्ढा मिल गया # 

नवीन  आज कल बहुत खुश था | उसका तरकीब काम कर गया, जिसके कारण हमारा बैडमिंटन ( badminton) खेलने का कार्यक्रम लगभग बंद ही  हो गया था |  इसके दो कारण थे …. पहला यह कि अब मुझे खाना बनाने… Read More ›

# मेरी कुछ यादें # 

माना मैं तुम्हारे नए शहर की पुरानी इमारत ही सही, लोग आज भी मुझमे अपना बीता हुआ कल ढूंढते है | रांची को हमने खूब जिया है |  तब हम खगौल (पटना) से नए नए रांची आये थे | स्कूल की… Read More ›

# Threads of My Superstition#

A Tale from Two Decades Ago This story unfolds two decades back when the winds of computerization were sweeping through our bank/ branch. During that technological transformation, I found myself caught in a web of superstitions that added a unique… Read More ›