Md. Kamran

Mohd Kamran

I liked your blog and read it to the last .I don’t find words to Express my joy and happiness,

but the way u have reinvented yourself is amazing. You are really an inspiration for every retired person. I too wonder why we the retirees think that our time is over.

Age is just a number. What others can do we too can. At last I am too request u to please guide me to reinvent me as u have done.             

With warm Regards

Mohd kamran

कृष्णा कुमार

कृष्णा कुमार

“वाह विजय ,क्या खुब लिखते हो | पढने में बड़ा मज़ा आता है |

सरल भाषा ,सुंदर विषय वस्तु और नाटकीय घटनाक्रम रचना

को पठनीय बनाते है | जब हम पढना शुरू करते है तो बिना अंत के

उसे छोड़ नहीं पाते है और एक उत्सुकता अंत तक बनी रहती है

आगे की घटना को जानने के लिए / रचनाएँ आम जीवन के काफी

करीब महसूस होती है | उत्सुकता और इंतज़ार यही तो मज़ा है ज़िन्दगी में ,

जो रचनाएँ सहज ही उपलब्ध कराती है ….

आगे भी इसी तरह प्रयास ज़ारी रहे |

शुभकामनाओ सहित “

कृष्णा कुमार

Sumit Sinha

Sumit sinha

“While many may find it difficult, you have embraced this for long.

It is a pleasure to go through the thoughts;

the myriad experience flows through…”

Kishori Raman

Kishori Raman

Kishori Raman
Banker (Canara Bank)

” कहते हैं की जब लेखन केवल अपने लिए हो या फिर केवल लिखने के लिए हो तो वह सार्थक नहीं होता | सार्थक तब होता है जब यह पढ़ने वाले को अपने से जोड़ सके , उन्हें मज़ा दे सके |

विजय जब लिखता है तो उसका उद्देश्य होता है अपने भोगे हुए यथार्थ को , जीवन की कड़वी सच्चाइयों को सरल एवं सपाट भाषा में पन्नों पर उतारना |यह अच्छे भी लगते हैं और गुदगुदाते भी हैं | नाटकियता इसकी जान होती हैं , जो आगे की घटनाओं को जानने की जिज्ञासा को अंत तक बरक़रार रखती हे | हर पढ़ने वाले को ये उसकी अपनी कहानी लगती है, और यही इसकी विशेषता भी है |

हालाँकि, संस्लेमरण लेखन में लेखक के पास लीक से ज्यादा हटने की गुंजाईश नहीं होती है क्योंकि तब निरसता उत्पन्न होने का खतरा रहता है | विजय की रचनायें इनसे बच कर निकलती हैं और तेज़ रफ़्तार से चलती हैं |
विजय की रचनायें इन कसौटियों पर खरी उतरती हैं | मेरी शुभ कामनाएँ |आप इसी तरह लिखते रहे और सबको गुदगुदाते रहे |”

B K Verma

B K VERMA

B K Verma

” ये तो हमारे और दोस्तों के लिए संजीवनी का काम कर रही है |
रोज इतना अच्छा ब्लॉग पढ़कर दिन की अच्छी शुरुआत होती है | जब भी मन उदास होया है, आपके ब्लॉग की भींगी भींगी खुशबू मेरे दिलों दिमाग को ताज़ा कर देती है और फिर से रिफ्रेश हो जाता हूँ | बहुत ही काम लोग खुशनसीब होते हैं, जिन्हें सच्चा निःस्वार्थ प्रेम की अनुभूति होती है | ये तो प्रेम ही है जिसपर सारा संसार टिका हुआ है |
अगर आपस में प्रेम न हो तो जीवन नीरस हो जाता है | इसी प्रेम की डोर से परिवार, समाज, देश जुड़ा हुआ है|
रियली अच्छा लग रहा है. धीरे धीरे चलते रहो….💐💐💐 “