Kishori Raman

Kishori Raman

Kishori Raman
Banker (Canara Bank)

” कहते हैं की जब लेखन केवल अपने लिए हो या फिर केवल लिखने के लिए हो तो वह सार्थक नहीं होता | सार्थक तब होता है जब यह पढ़ने वाले को अपने से जोड़ सके , उन्हें मज़ा दे सके |

विजय जब लिखता है तो उसका उद्देश्य होता है अपने भोगे हुए यथार्थ को , जीवन की कड़वी सच्चाइयों को सरल एवं सपाट भाषा में पन्नों पर उतारना |यह अच्छे भी लगते हैं और गुदगुदाते भी हैं | नाटकियता इसकी जान होती हैं , जो आगे की घटनाओं को जानने की जिज्ञासा को अंत तक बरक़रार रखती हे | हर पढ़ने वाले को ये उसकी अपनी कहानी लगती है, और यही इसकी विशेषता भी है |

हालाँकि, संस्लेमरण लेखन में लेखक के पास लीक से ज्यादा हटने की गुंजाईश नहीं होती है क्योंकि तब निरसता उत्पन्न होने का खतरा रहता है | विजय की रचनायें इनसे बच कर निकलती हैं और तेज़ रफ़्तार से चलती हैं |
विजय की रचनायें इन कसौटियों पर खरी उतरती हैं | मेरी शुभ कामनाएँ |आप इसी तरह लिखते रहे और सबको गुदगुदाते रहे |”