# I am Maradona #

“I am Maradona, who shoot goals, who make mistakes. I can take it all, I have shoulders big enough to fight with everybody.”

Maradona in now in God’s hand. Yes, Deigo Armando Maradona, who became one of the greatest players with his intelligent plays and extravagant control. Maradona died on 25th Nov, 2020 at the age of 60.

Brazilian soccer legend Pele tweeted… “I lost a Great friend and the world lost a legend ….One day, I hope we can play ball together in the sky…”

Maradona is one of the reason for me to really follow football. I watched the world cup 1986 on television even at late night hours, just to watch him.play in the 1986 world cup.

Maradona, who played for Barcelona, was also the captain of the national team when Argentina won the 1986 world cup, scoring the famous “Hand of God” goal against England in the quarter-finals. To score the goal, Maradona used his hand to deflect the ball past England goal keeper Peter Shilton, but the referee did not see it. It remains one of the most controversial World cup moments.

source : Google.com
Personal information
Full nameDiego Armando Maradona
Date of birth30 October 1960
Place of birthLanúsBuenos Aires Province, Argentina
Date of death25 November 2020 (aged 60)
Place of deathTigre, Buenos Aires, Argentina
Height1.65 m (5 ft 5 in)
Playing position(s)Attacking midfielder
Second striker[3][4][5][6]
Senior career*
YearsTeamApps(Gls)
1976–1981Argentinos Juniors167(116)
1981–1982Boca Juniors40(28)
1982–1984Barcelona36(22)
1984–1991Napoli188(81)
1992–1993Sevilla26(5)
1993–1994Newell’s Old Boys5(0)
1995–1997Boca Juniors30(7)
Total491(259)
National team
1977–1979Argentina U2015(8)
1977–1994Argentina91(34)
Teams managed
1994Deportivo Mandiyú
1995Racing Club
2008–2010Argentina
2011–2012Al-Wasl
2013–2017Deportivo Riestra (assistant)
2017–2018Fujairah
2018–2019Dorados de Sinaloa
2019–2020Gimnasia de La Plata

As he settles down in heaven, the one wish of every football fan would be that gatekeeper of the afterlife welcome Deigo with a football. That is the only way he will be at peace with himself, for that is the only thing he enjoyed in his 60 years in this world.

With deepest sympathy..

Rest in Peace

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# भावभीनी श्रद्धांजली #

महेश मौर्या

आज का ब्लॉग लिखते हुए बहुत दुःख  का अनुभव हो रहा है | एक घटना जो मेरे मन को अन्दर तक झकझोर कर रख दिया है | मेरी यह आदत है कि रोज सुबह अपने मिलने वालों को उनके जन्मदिन की बधाई फेसबुक के माध्यम से देता हूँ |

ऐसे ही कल हमारे बैंक के मित्र श्री महेश मौर्या जी को उनके जन्मदिन की बधाई दिया | कुछ ही देर में हमारे दुसरे मित्र श्री आर पी  बंसल साहब  का मेसेज आया |  उन्होंने लिखा … बड़े दुःख के साथ आप सबों को सूचित करना चाहता हूँ कि हमारे मित्र श्री मौर्या साहब अब इस दुनिया में नहीं रहे |  वे  covid से संक्रमित हो गए थे और दो दिन पूर्व ही  उनका  निधन हो गया |

मैं तो पढ़  कर स्तब्ध रह गया |

मैं अपना पिछला पोस्ट चेक करने लगा तो देखा कि  एक माह पूर्व की पोस्ट पर तो उन्होंने लाइक भी किया था | देखते ही देखते बिलकुल भला चंगा और स्वस्थ इंसान हम सबों के बीच से अचानक covid के कारण चल बसे |

पता नहीं यह कैसी बीमारी है | सचमुच ऐसे मेसेज दिल को झकझोर कर रख देते है |

ज़िन्दगी इतनी unpreditable  क्यों हो गयी है,  समझ में नहीं आता है |

बार बार यही लगता है कि यह सिलसिला कब रुकेगा,  कुछ कहा नहीं जा सकता है | यह बीमारी और कितनों की बलि लेगी और कहाँ जाकर रुकेगी |

लगता है प्रकृति हम सबों का इन्म्तेहान ले रही है | जो लोग अपने को अजर -अमर मानते हुए प्रकृति का दोहन कर रहे थे और  श्रृष्टि को धत्ता बता रहे थे | दुनिया की सारी सुख सुविधाएँ केवल अपने और अपने परिवार वालों के लिए इकठ्ठा कर रहे थे |

उनके लिए और हम सबों के लिए भी सन्देश साफ़ है कि चाहे कितने  भी बड़े हो जाये और विज्ञानं कितना भी तरक्की कर ले,  हमलोग उसके सामने बेबस और तुक्ष ही  रहेंगे |

रोज किसी ना किसी बैंक परिवार के  सदस्य की  मौत की खबर सुनने को मिल रही है |

मेरे परम मित्र श्री महेश मौर्या के निधन का समाचार सुन कर गहरा दुःख हो रहा है | यह हम सभी लोग के लिए एक अपूरणीय क्षति है |

भगवान् दिवंगत आत्मा को शांति दें, और उनके  परिजनों को दुःख  की घडी में साहस प्रदान  करे….

भावभीनी श्रधांजलि

ॐ शांति ॐ ..

Frenzied Passion

Me and my painting

Graphite pencil sketching has always been my favorite medium for art. It was my first love when I started learning basic drawing technique. Since I am self-taught,

it was the easiest tool to control and manage. It is also the most portable and clean tool so far as my drawing and sketches are concerned.

I find it very convenient for its portability. I have acquired different types of graphite pencil for my work.

 I started learning about blending pencil technique and received help from one of my friend who also happens to be drawing teacher. I use to visit his place to learn the blending technique but due to corona pandemics this opportunity has not lasted long and again I am in a position to self learn the art confined at home due to pandemic.

Now I am using colour pencil and pastels colour in my drawing too and started publishing my art work through my blog.. retiredkalam.com under the category.. Me and my art.

This has brought tremendous change in my life  and also impacted  my personality in a big way.

During my drawing practice I have learnt that I cannot create quality artwork with inadequate drawing material.  It  requires the right kind of tools to create the beautiful look.

I ordered online the required drawing materials. Now I am practicing different types of techniques and my work is going on.

Now, I have decided to make one drawing daily and publish them through my Blog

I hope you will agree with my feeling and I will be happy if you convey your feelings through comments or suggestions..

I love you…

I love you because you actually put efforts into me.

I love you because nobody has ever given me the love that you have given me and you are the only one that could ever love me this way…

I love you because you always make me feel that I am worth something..

I love you because you have a nurturing nature and you take care of me..

I love you because you made me smile when I almost forgotten how to.

I love you because you have huge and honest heart.

I love you and everything little detail about you.

I love you because you are simply you..

Promise to yourself

Tomorrow is not promised, not a single second or minutes, so live for today. Keep the promises you make. Take action on the things you desire and need.

Remind those that matters to you that they are loved and you are grateful for them.

Never leave someone you care about on negative terms.

Give more that you take.

Make the call you have been telling yourself you will do tomorrow,.

Let the small shit go. Never go to bed angry. We will all die one day, so learn to live each day with promise to yourself that it will be better than yesterday..

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हर ब्लॉग कुछ कहता है ..10

सच्ची दोस्ती

एक प्राइवेट स्कूल,  जिसमे छोटे छोटे बच्चे एडमिशन लेते है | सभी एक दुसरे से अनजान | लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद एक ही क्लास के छह बच्चो की आपस में गाढ़ी दोस्ती हो जाती है | वे सब स्कूल में टिफ़िन करते तो साथ साथ, खेलते तो साथ साथ |

समय बीतते गए और देखते ही देखते सारे बच्चे उसी स्कूल में मेट्रिक क्लास  तक पहुँच चुके थे, लेकिन आपस की दोस्ती और भी  पक्की हो गई |

इनमे कमाल  का आपस में स्नेह और प्यार था | ये छह दोस्तों की आपस में दोस्ती ऐसी कि हर कोई दोस्ती की जब मिशाल देता तो इन लोगों की देता |

अब इन सारे विद्यार्थियों के लिए यह स्कूल का अंतिम साल था ..साथ ही वे उस स्कूल के सबसे पुराने और सीनियर विद्यार्थी  बन गए. |

यहाँ से निकलने के बाद सभी को एक कॉलेज के नए माहौल में जाना था |

इनमे से भी तीन दोस्त ऐसे थे तो  खासम – खास थे  और  एक दुसरे का बहुत ख्याल रखते थे  | उनके  नाम थे …नेहा , कुमार  और तुषार |

हालाँकि नेहा की  बहुत दिनों से कोशिश थी कि कुमार को अपने प्रेम के माया जाल में फंसा  ले | क्योकि कुमार बहुत ही सीधा  साधा और  अपने दोस्तों में सबसे स्मार्ट और तेज़ विद्यार्थी  था |

वही दूसरी ओर नेहा तीन बहनों में से एक थी  और घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी ,लेकिन उसके शौक -मौज किसी राजकुमारी से कम नहीं थे |

कुमार ने जब नेहा के प्यार का कोई खास अहमियत नहीं दे रहा था तो नेहा ने उसे जीवन साथी बनाने की मन ही मन ठान लिया |

नेहा अपने मन की बात उसे कह नहीं पा रही थी कि कहीं आपस  की दोस्ती ना ख़तम हो जाये |

तब नेहा ने अपनी प्यार वाली बात तुषार को बतला दी और कहा …मैं उससे प्यार करने लगी हूँ | तुषार को  इस  बात का जब पता चला तो  उसने अपने दोस्त होने का फ़र्ज़ अदा किया | उसने आगे आकर पहल किया और दोनों को आमने सामने लाकर आपस से बात करवा दी | उस दिन से दोनों की   फ्रेंडशिप अब रिलेशनशिप में बदल गयी |

अब दोनों खुल कर अपने प्यार का इज़हार करने लगे  और लव स्टोरी शुरू हो चुकी थी |

दोनों आपस में बहुत तरह के फेस्टिवल celeberate करते रहे कभी चोकलेट day तो कभी , फ्रेंडशिप day, और हर बार नेहा की ख्वाहिस होती कि कुमार उसे मंहगी – मंहगी गिफ्ट देता रहे | कुछ दिनों तक तो  कुमार उसकी इच्छा पूरी करता रहा और यह ध्यान रखता कि उसके  लव स्टोरी में कही ब्रेक नहीं आये |

लेकिन कुछ दिन बीते थे कि कुमार  को यह एहसास हुआ कि नेहा बहुत ही demanding होते जा रही है | उसे हर समय,  हर occassion  पर कोई ना कोई गिफ्ट चाहिए जबकि कुमार  एक साधारण परिवार से ताल्लुख रखता था और उसके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि उसकी कीमती डिमांड पूरी कर सके |

नेहा को यह समझ नहीं होता कि गिफ्ट तो एक सरप्राइज होता है  जो ख़ास मौको पर ही दिया जाता है और वह समय यादगार पल बन जाते है |  कुमार ने नेहा को यह बात समझाने की कोशिश भी की लेकिन सफल नहीं हो सका |

तभी प्रेमी- प्रेमिका का एक महान पर्व ..14 फरवरी , यानी वैलेंटाइन day आने वाला था |

नेहा हमेशा की तरह कुमार  से बोली … कितना exiting  day आने वाला है | इसे हम शानदार ढंग से मनाएंगे, पार्टी करेंगे, डिनर डेट पर चलेंगे  और तुम मुझे एक अच्छा सा उपहार देना जो यादगार बन जाये |

 जब वो बोल रही थी तो उसके चेहरे पर बहुत  उत्साह थी और कुमार  से बहुत सारी उम्मीदें लगा रखी  थी |

इन सब के लिए तो बहुत पैसो की ज़रुरत होगी और कुमार के पास इतने तो पैसे थे नहीं  |  इसलिए उसने  बहाना बनाया कि उस समय मैं यहाँ नहीं रहूँगा,  मुझे अपने  एक रिश्तेदार के यहाँ समारोह में जाना है |

लेकिन उसके बात करने के तरीके से नेहा समझ गई कि कुमार  झूठ बोल रहा है |

नेहा नाराज़ होते हुए बोली…मैं जानती हूँ कि तुम झूठ बोल रहे हो |, तुम्हे मेरे साथ कोई भी पार्टी करने की इच्छा नहीं होती है | वह काफी नाराज़ हो गयी और वहाँ से उठ कर चली गई |

ऐसा लगा कि वैलेंटाइन day आने से पहले ही इन दोनों का break up हो गया हो  |

कुमार  को समझ में नहीं आया कि इस मामला को कैसे सुलझाये इसलिए इस समस्या को लेकर वह अपने मित्र तुषार के पास आया  |

कुमार ने   सारी बात उसे बताई और कहा ….नेहा तो नाराज़ हो गई है | उसे तो बहुत  सारे गिफ्ट चाहिए और पार्टी होना चाहिए जो मैं afford नहीं कर सकता हूँ | मैं घर से इन सब बातों के लिए पैसे नहीं मांग सकता |

तुषार उसकी बातों को सुनकर कहा.. दोस्त, तुम फिक्र मत करो, सब कुछ ठीक हो जायेगा |

14 फरबरी का दिन भी  आया और शाम के समय कुमार के पास तुषार का फ़ोन आता है  |.. तुषार ने कहा …भाई, तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है, तुम्हे हिन्द होटल में आना है |

कुमार  उस होटल  में जाता है और देखता है कि एक शानदार सी पार्टी का आयोजन की गई है |

वहाँ स्पेशल arrangement नेहा और कुमार  के लिए किये गए थे |

कुमार  यह सब देख कर चौक जाता है | बहुत सारे गिफ्ट एक तरफ रखे हुए थे | नेहा वहाँ पहले से ही पहुँच गई थी .और .जैसे ही वह  कुमार  को  देखी  तो दौड़ कर उसके गले लग गई और कहा ….मुझे मालून था कि तुम मुझे valantine day पर सरप्राइज दोगे |

तुमने आज मुझे best surprise दिया है सचमुच तुम मेरे best फ्रेंड हो, best love  हो |

कुमार  तो जबाब में कुछ नहीं बोला लेकिन उसे समझ में आ गया कि तुषार ने इस पार्टी का arrangement अपने पैसो से किया है. मेरे लिए और  नेहा को बताया कि यह मेरे तरफ से है |

पार्टी जब अपने चरम सीमा पर थी और सभी लोग इसका भरपूर आनंद उठा रहे थे | उसी समय वहाँ बने छोटे से स्टेज से तुषार annouce करता है कि आज की पार्टी कुमार ने नेहा के लिए ……

उसकी बात पूरी होने से पहले ही कुमार दौड़ कर तुषार के पास पहुँच जाता है और उससे माइक लेकर अपने दोस्तों से कहा … …दोस्तों, सच तो यह है कि यह पार्टी का सारा arrangement मेरे और नेहा के लिए तुषार ने अपने पैसो से किया है और वह इसलिए कि नेहा और मेरे बीच के रिलेशनशिप को बचाया जा सके |

कुमार के मुँह से सच्चाई सुन कर सभी  दोस्तों को आश्चर्य होता है और तुषार के सम्मान में सभी लोग तालियाँ बजा कर स्वागत करते है , परन्तु पास खड़े नेहा को अपनी गलती का एहसास हो रहा था |

कुमार ने नेहा की तरफ देखते हुए कहा …. तुम्हारे और हमारे विचार अलग अलग है,  शौक  भी अलग अलग अलग  है ..| तुम जो कुछ भी चाहती हो, मैं उसे पूरा नहीं कर सकता हूँ | इसलिए यह अच्छा होगा हमलोग  अपने अपने रास्ते अलग कर लें. | और उसी वक़्त कुमार ने ने नेहा से अपना break up कर लिया |

फिर पास खड़े तुषार को गले लगा लिया और कहा …भाई, तुम हो मेरे सच्चे दोस्त. .|

तुमने आज मुझे सिखाया कि लाइफ में रिलेशनशिप से बड़ी चीज़ होती है फ्रेंडशिप |

यह हमारी  दोस्ती ही है कि तुमने मेरे नाम पर इतना सारा पैसा खर्च कर दिया ताकि मेरे रिलेशनशिप को बचाया जा सके |

i love you मेरे भाई | इस पर तुषार ने कहा ..दोस्त चिंता मत करना  ,रिलेशनशिप ना सही फ्रेंडशिप तो रहेगी ही…

यह छोटी सी कहानी हमें सिखाती है कि अगर सच्चा दोस्त जब आप के साथ है तो सब कुछ आप के पास  है |

सच्चे दोस्त की मिशाल बनिए और सच्चे दोस्त की क़द्र कीजिये,…. हाँ या ना |

    हर ख़ुशी दिल के करीब नहीं होती

मोहब्बत ग़मों में शरीक नहीं होती

ए मेरे दोस्त मेरी दोस्ती को सलामत रखना

क्योकि हर किसी को दोस्ती  नसीब नहीं होती

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हर ब्लॉग कुछ कहता है…9

खुश रहने का मंत्र

आज कल जाड़े का आगमन हो गया है इसलिए आज मोर्निंग वाक के लिए पार्क में जाने में थोड़ी देर हो गई | हालाँकि मैं जब पार्क में पहुँचा  तो और दिनों की अपेक्षा आज कुछ ज्यादा ही सुन्दर नज़ारा दिख रहा था |

सुकून देने वाली धुप खिली हुई थी और एक तरफ बुजुर्ग लोगों का समूह हरी – हरी घास पर बैठ कर laughing exercise कर रहे थे तो दूसरी तरफ बहुत सारे बच्चे जो अपने माता पिता से साथ आये थे, खेलते हुए मस्ती कर रहे थे | पार्क में चारो तरफ जाड़े के मौसम के रंग बिरंगे फूल खिले हुए थे ..|

 दरअसल, मैं आज एक महीने के बाद इस पार्क में आया था | मुझे आज यहाँ टहलते हुए बहुत मज़ा आ रहा था |  

टहलते हुए मैं पार्क के दूसरी तरफ चला गया,  जहाँ एक बाबा प्रवचन दे रहे थे और कुछ लोग गोलाकार बनाकर बैठे उनकी बातें सुन रहे थे | मैं भी वहाँ रुक गया और उनके प्रवचन को ध्यान से  सुनने लगा | वे रोजमर्रा की ज़िन्दगी में आने वाले समस्याओं के समाधान बता रहे थे |

प्रवचन चल ही रहा था कि तभी एक व्यक्ति ने  उस बाबा से  पूछा  …..खुश रहने का secret क्या है ?

बाबा कुछ देर तो सोचने लगे फिर उन्होंने वहाँ उपस्थित सभी लोगों से पूछा … क्या आप सभी लोग भी इस प्रश्न का जबाब जानना चाहते है ?

तो वहाँ सभी लोगों ने एक स्वर में कहा …जी हाँ, हम सभी भी जीवन में  खुश रहने का मंत्र जानना चाहते है |

तब बाबा ने उस व्यक्ति  से कहा… आप पहले इस पुरे पार्क का एक चक्कर लगा कर आइये और देखिये वहाँ मन को आनंदित करने वाले क्या क्या चीज़ दिख रहे है |

ठीक है, कह कर वह  व्यक्ति  जब चलने को हुआ तभी बाबा ने  रोका और उससे  कहा ….तुम्हे मैं एक चम्मच दे रहा हूँ जिसमे दो बूंद  तेल है जो साथ में ले जाना है | लेकिन पुरे पार्क का चक्कर लगाते समय यह  ध्यान रहे कि तेल गिरने नहीं पाए |

उस व्यक्ति ने कहा….ठीक है,  यह कौन सी बड़ी बात है और वह चम्मच में रखा तेल को लेकर पार्क का चक्कर लगाने चल दिया |

पार्क के चारो ओर घूमते हुए वह महसूस किया कि रास्ते काफी  घुमावदार थे  | वह व्यक्ति सावधानी पूर्वक घूम कर  वापस उस बाबा के पास आया |

बाबा ने उस व्यक्ति को देखते ही पूछा..  बोलो बेटे,  आप ने पार्क में क्या क्या देखा और कौन सी  चीज़ चीज़ सबसे सुन्दर लगी |

वो पत्थर का बना  झरना देखा ?  कितना सुन्दर है  और  वो गुलाब की क्यारियां जिसमे हर रंग के गुलाब खिले है | और वो कुछ विदेशी पौधे जो बड़ी मिहनत करके  बहुत दूर दूर से लाकर यहाँ लगाए गए है …उसके फूल भी कितने  सुन्दर लग रहे है |

उस आदमी ने   बिलकुल  ईमानदारी  से ज़बाब दिया …. बाबा,  मैं तो वो सब कुछ नहीं देख सका क्योंकि मेरा सारा ध्यान इस चम्मच में पड़ी दो बूंद तेल पर था , कि कही गिर न जाए |

तब बाबा ने उस व्यक्ति  से कहा…ये क्या बात हुई | आपने तो कुछ देखा ही नहीं |  आप फिर से जाइए और वो सारा कुछ देख कर आइये और अपने अनुभव हमें बताइए |

वो आदमी  फिर से गया और पार्क की एक एक चीज़ बड़े ध्यान से देखने लगा | वो शानदार बाग़, वो गुलाब की क्यारी को भी बड़े ध्यान से देखा | सही में आज पार्क की सुन्दरता कुछ अलग तरह की लग रही थी उसे देख कर उसे बहुत आनंद का अनुभव हुआ |

वो आदमी आकर बाबा को पार्क की सुन्दरता का खूब बखान करने लगा |

फिर उसने पूछा ….आप अब उस सवाल का ज़बाब दीजिये जिसको जानने के लिए हमलोग उत्सुक है  | मुझे बताइए कि खुश रहने के मंत्र  क्या है ?

ठीक है मैं आपको बताऊंगा,  लेकिन पहले आप बताइए कि वो चम्मच वाली तेल कहाँ  है ?

तभी, उस व्यक्ति को अचानक ख्याल आया कि वो तो सभी चीजों को देखने में इतना व्यस्त था कि  तेल पता नहीं कब और  कहाँ गिर गई थी |

उसने कहा…..मुझे माफ़ करें |  आपने कहा था पार्क को  अच्छी तरह देखना है, सो मेरा सारा  ध्यान उसे देखने में था और तेल का ध्यान ही नहीं रहा कि वह कहाँ  गिर गया |

तभी बाबा ने कहा…यही है खुश रहने का मंत्र |  Happiness यानी ख़ुशी हमारे चारो तरफ बिखरी पड़ी है ..बस हम उसे देख नहीं पाते है  क्योकि  हमारा ध्यान तो चम्मच में पड़े तेल की तरह .. ….बस,धन कमाने में अपने उन्नति और झूठी शान -शौकत के लिए लगा रहता है  और हम अपने जीवन के बहुमूल्य समय को बर्बाद कर देते है |

अपनी सारी खुशियाँ का अपने परिवार और बहुमूल्य समय दोस्त इत्यादि की कुर्बानी देकर जो हम हासिल करते है वह एक झूठ होता है , बस, ..दिखावा होता है | उसमे सच्ची ख़ुशी नहीं होती है |

सच पूछा जाए तो जो झूठे शान शौकत  और दिखावे के लिए हम अपनी सच्ची ख़ुशी को गवां देते है |

अगर हम अपने झूठे शान शौकत प्रतिष्ठा का परित्याग कर असली ज़िन्दगी में चारो तरफ देखें तो खुशियाँ ही खुशियाँ ही बिखरी पडी है ..सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं को प्राप्त करने से नहीं मिलता … वह तो अपने अन्दर ही विद्यमान है |

सकारात्मक नजरिए से देखा जाए तो संकट की घड़ी में भी सुख की अनुभूति हो सकती है।

बस अपना  नज़रिया बदल कर देखिये आप के चारो तरफ प्रकृति का सौंदर्य बिखरा पड़ा है  ..रिश्तो की गर्माहट और दोस्ती को महत्व दीजिये तो आप सदा खुश रहेंगे  और अंत में एक और बात कहना चाहता हूँ …

“जिंदगी में कितनी भी बड़ी मुसीबत आए कभी निराश मत होना क्योंकि अभी वक्त तुम्हारा कमजोर है लेकिन तुम नहीं…..क्या आप भी ऐसा ही सोचते है ….

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The Key to Happiness…

Today when I woke up in the morning , I heard my mobile beeping a lot.

I just checked and find so many morning  messages…

Saying good morning …wishing you a day filled with joy and happiness…

  Someone texted…….be positive, be cheerful and be happy at the present moments…

What would you reply if someone asks you about your current mood? You will say happy, sad or angry.

But do you really think that it’s enough to describe your mood ? How would describe an extremely amazing vacation? As a ‘happy one’?

But for how many times you can use the word happy. The word will lose its meaning. You can use the phrase ‘over the moon’ to express happiness or flying high… a situation when some one is happy because they are ignoring problem or fail to realize its existence.

In fact, happiness does have a pretty important role in our lives, and it can have a huge impact on the way we live our lives.

 Although researchers have yet to pin down the definition or an agreed-upon framework for happiness, there’s a lot we have learned in the last few decades

We can say …, happiness is the state of feeling or showing pleasure or contentment. From this definition, we can glean a few important points about happiness:

Happiness is a state, not a trait; in other words, it isn’t a long-lasting, permanent feature or personality trait, but a more fleeting, changeable state.
Happiness is equated with feeling pleasure or contentment, meaning that happiness is not to be confused with joy, ecstasy, bliss, or other more intense feelings.

Happiness can be either feeling or showing, meaning that happiness is not necessarily an internal or external experience, but can be both.

But, You cannot control how other people receive your energy . Anything you say or do get filtered through the lens of whatever personal stuff they are going through at the moment. Which is not about you? Just keep doing your things with much integrity and love as possible..

Surround yourself with people who know your worth. You don’t need too many people to be happy, just a few real ones who appreciate you for exactly who you are…

 I mean to say … Tomorrow is not promised, not a single second or minutes .. so live for today …keep the promises you make. Take action on the things you desire and need . remind those that matters to you that they are loved and you are grateful for them.

Never leave someone you care about on negative terms, give more than you take. Make the call you have been telling yourself you will do “tomorrow”. Let the small shift go.

Never go to bed angry. We will all die one day, so learn to live each day with promise to yourself that it will be better than yesterday…

If you want to be live a happy life , you must accept who you are ..That is the key to happiness…

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छठ महापर्व __बिहार का अनूठा पर्व..

कल छठ महापर्व की आस्था देश के विभिन्न हिस्सों में और बिहार के घाटों पर देखने को मिली |  घाटों पर हर तरफ श्रद्धालु दिखे और छठ महापर्व का हर्षोल्लास के साथ  समापन हो गया |

पटना में गंगा के घाटों पर श्रद्धालु सूप पर फल, ठेकुए, कसार सजाकर पहुँचे । इन्हें छठी मइया को अर्पित किया गया। शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया था और कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया |

बहुत लोगों ने तो अपने अपने  घरों में ही तालाब  बना कर छठ पर्व की उपासना की और छठ पर्व की गीतों ने तो माहौल को भक्तिमय कर दिया |

महापर्व छठ के अंतिम दिन सूर्य की पत्नी उषा को अर्घ्य दिया जाता है | ऐसी आस्था है कि  इससे जीवन में तेज बना रहता है और व्रत करने वाले जातकों की मनोकामना पूरी होती है | पूजा के बाद व्रत करने वाले लोग नींबू  का शरबत और प्रसाद खाकर व्रत का पारण करते हैं. |

सचमुच यह बिहार का अनूठा पर्व है आइये इसकी विशेषता जानते है …

..यह एक ऐसा पर्व है जिसे गरीब और आमिर,  सभी जाति  और धर्मं के लोग एक साथ मिल कर करते है |

…ऐसा लोगों का विश्वास है कि इस पर्व के करने से शरीर निरोगी होता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है |

..सारा वातावरण  ठेकुए की खुशबु और छठ के मधुर संगीत से सराबोर हो जाता है। छठ के गीत कितने कर्णप्रिय होते हैं, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि नई से नई पीढी भी, जो अत्याधुनिक गानो की शौकीन हो वो भी छठ का गीत सुनकर भाव विभोर हो जाने को विवश हो जाती है। 

…यह एक ऐसा पर्व है जिसे स्त्री और पुरुष दोनों ही करते है | इस पूजा में शरीर  और  मन दोनों को साधना पड़ता है | इसलिए इस पर्व को हठयोग भी कहा जाता है |

…छठ पूजा की एक सबसे बड़ी विशेषता यह  भी है कि छठ पूजा के लिये जो भी खरीदारी होती है वो समाज के निचले तबके के दुकानदारों से ही होती है। सारे सामान रोड पर बैठे गरीब क्रेताओं के पास ही उपलब्ध होते हैं, कोई भी खरीदारी आप मॉल से नही कर सकते हैं।

…मुख्यतः इसमें उपयोग होने वाने सामग्री स्थानीय लोगों खास कर गाँव में ही ,खेतो से  ही उपलब्ध होती है अर्थात सभी देशी चीजों का उपयोग होता है |

…ठेकुआ  इस पर्व का सबसे ख़ास प्रसाद होता है जो गाँव में उपलब्ध गेहूं , गुड़ की खांड , घी के द्वारा बनाई जाती है | यह इतनी स्वादिस्ट होता है कि इस प्रसाद को दूर दराज़ में स्थित अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक पहुंचाई जाती है और ठेकुआ बहुत दिनों तक सुरक्षित रहता है |

….इसके आलावा इसके बनाने के लिए चूल्हे भी मिटटी से बनाये जाते है , ये मिटटी के चूल्हे स्थानीय कुम्हार के अलावा मुस्लिम औरतें भी बना कर  बेचती है | इस तरह इसमें हर तबके का कुछ ना कुछ योगदान रहता है |

…यह एक ऐसा पूजा है जिसे व्रती तन मन को शुद्ध कर इस पूजा को स्वयं करते है | छठ पर्व   पंडित के बिना ही की जाती है |  

…इस में उपयोग होने वाले सभी सामग्री स्थानीय ही उपलब्ध होते है | एक तरह से कहा जाये तो गाँव में पैदा किये गए सामग्री का ही उपयोग होता है |

… covid -19 , के कारण इस बार की पूजा में बहुत तरह के प्रतिबन्ध लगाये हुए थे, इसके बाबजूद भी लोगों के उत्साह में कोई कमी नज़र नहीं आयी  और घाटों पर भीड़ उमड़ी ।

हमने पढ़ा कि लोग मास्क पहने नजर तो आए पर सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखीं। घाटों पर ही चाट और गोलगप्पे की दुकानें सजीं । सेल्फी का दौर भी लगातार चला। शहर के पार्कों में बने तालाबों में भी लोगों ने छठ का पर्व मनाया । ज्यादातर जगहों पर घरों और अपार्टमेंट्स की छत पर भी पर्व मनाया गया।

  • भगवान सूर्य की होती है पूजा

 छठ पूजा वास्तविक रूप में प्रकृति की पूजा है। इस अवसर पर सूर्य भगवान की पूजा होती है, जिन्हें एक मात्र ऐसा भगवान माना जाता है जो दिखते हैं । छठी व्रती द्वारा  भगवान सूर्य की पूजा कर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि जिस सूर्य ने दिन भर हमारी जिंदगी को रौशन किया उसके निस्तेज होने पर भी हम उनका नमन करते हैं।

छठ पूजा के मौके पर नदियां, तालाब, जलाशयों के किनारे पूजा की जाती है जो सफाई की प्रेरणा देती है। यह पर्व नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का प्रेरणा देता है। इस पर्व में केला, सेब, गन्ना सहित कई फलों की प्रसाद के रूप में पूजा होती है जिनसे वनस्पति की महत्ता रेखांकित होती है। 

  • भगवान सूर्य की बहन हैं छठ देवी

 सूर्योपासना का यह पर्व सूर्य षष्ठी को मनाया जाता है, लिहाजा इसे छठ कहा जाता है। यह पर्व परिवार में सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि छठ देवी भगवान सूर्य की बहन हैं, इसलिए लोग सूर्य की तरफ अर्घ्य दिखाते हैं और छठ मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की आराधना करते हैं। ज्योतिष में सूर्य को सभी ग्रहों का अधिपति माना गया है।

सभी ग्रहों को प्रसन्न करने के बजाय अगर केवल सूर्य की ही आराधना की जाए और नियमित रूप से अर्घ्य (जल चढ़ाना) दिया जाए तो कई लाभ मिल सकते हैं।

  • ऐसे की जाती है पूजा 

 छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान में पहले दिन नहाय-खाए दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य व चौथे दिन उगते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। नहाए-खाए के दिन नदियों में स्नान करते हैं।

इस दिन चावल, चने की दाल इत्यादि बनाए जाते हैं। कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना बोलते हैं। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती भोजन करते हैं।

षष्ठी के दिन सूर्य को अर्ध्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाते हैं और स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा करते हैं। सप्तमी को सूर्योदय के समय पूजा कर प्रसाद वितरित करते हैं।

  • इसका वैज्ञानिक महत्व

 अगर सूर्य को जल देने की बात करें तो इसके पीछे रंगों का विज्ञान छिपा है। मानव शरीर में रंगों का संतुलन बिगड़ने से भी कई रोगों के शिकार होने का खतरा होता है। सुबह के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय शरीर पर पड़ने वाले प्रकाश से ये रंग संतुलित हो जाते हैं।

(प्रिज्म के सिद्दांत से) जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है। सूर्य की रौशनी से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में पूरा होता है। त्वचा के रोग कम होते हैं।

कैरोना के इस युग में इमुनिटी को बनाये रखने के लिए विटामिन डी बहुत आवश्यक है जो सूर्य की रौशनी से शरीर अपने आप संतुलित मात्र में ग्रहण कर लेती है |

खुशियों का त्योहार आया है

सूर्य देव से सब जगमगाया है

खेत खलिहान धन और धान

यूँ ही बनी रहे हम सबकी शान…

भगवान् श्री सूर्यदेव आपकी हर मनोकामना पूरी करें |

आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो …

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Chhath Puja _Kharna

Dear friends..

As I mentioned earlier, Chhath Puja is the most important festival for me

Doesn’t matter where I am in the world but I always come home during this time to attend Chhath Puja and enjoy this festival with all my family members. But this year I was deprived of that opportunity.

The greatest festival of folk faith, traditions and emotions is the festival of Chhath Puja. It is a symbol of social harmony. We worship Suryadev (Sun God), the creator of nature.

Enjoy the song of Chhath puja in Bengali Language

Today, I would be mentioning about Kharna, which is performed on  the 2nd day of the festival.. i.e. on 19th November, 2020,

Kharna is performed on the second day of Chhath Puja.

Kharna means the fast of the whole day. On this day, the devotees celebrate “KHARNA” by observing NIRJALA VRAT ,  ( Fasting without drinking even a drop of water) from sunrise to sun set, they break their fast only after offering prayer to the Sun God .

In the evening, women prepare KHEER as Prasada, they usually eat gur ki kheer (jaggery kheer), fruits and chapati full of ghee.

First of all, the Kheer is offered to the mother Shashthi after placing the banana leaves in a soil cover. It is believed that mother Shashthi takes enjoyment only the kheer is kept in solitary. 

Kharna has its own unique identity of the greatest festival of the drowning Suryadev and the completion of Arunodaya with Ardhya.

The sunrise of the second day of the festival is accompanied by the fragrance of the “Thekua” in every house in Bihar.

The whole Bihar is drenched with the fragrance of the Thekua and the melodious music of Chhath song .

Thekua :

The main ingredients of Thekua are  wheat flour, Jaggery and  ghee 

Dough is prepared using these four main ingredients and cardamom is to be added to enhance the taste. Dough is deep fried in Ghee till it becomes reddish brown. It is soft when hot but hardens after it cools. It needs no preservatives and it can be preserved for several day

The songs of chhath are so popular, that even a new generation, who is fond of cutting-edge songs, is also forced to become impatient by listening to the Lok Geet of Chhath.

One of the biggest features of this Chhath Puja is that whatever shopping is done for Chhath Puja, it is done from the shopkeepers of the lower strata (Small shopkeeper)of the society.

All goods are available with poor sellers sitting on the road side, you cannot shop from the mall.

Hearty greetings and congratulations to all of you on the eve of Chhath festival,

Long live the tradition of Hindu culture. As the generations have passed by . Hindu culture is getting stronger and stronger..

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Chhath Puja _ Nahay Khay

Dear friends

The festival of Lok Astha , Chhath Parv started yesterday on Wednesdayy  i.e. on 18th November 2020 with Nahay-Khay.

In the wake of four day ritual, the everyone everywhere including my native place is drenched in devotion.

Cleanliness and preparedness of Ghats and Ponds are being finalized on war footing .

I remember the moments when all my friends used to come together to clean our streets and lanes to facilitate the smooth movement of devotee and the people towards Ghats prepared at ponds and the banks of river Ganga..

But this year I am deprived of thoss exiting moments.  I could not go there because of Covid-19 pandemic.

I feel very sad for not attending my favorite festival Chhath Puja .

However, I have been receiving all the messages of each rituals from my friends and relatives over calls from time to time and enjoying the same . I do not have any other options.

Earlier, on Wednesday  on eve of Nahaya khaya, after the Vratis had purified the house with the Ganga’s water. Pumpkin (gourd) vegetable, Arva rice, gram dal and August flower dumplings were made. 

On the day of Nahay Khay, first Vrati takes Prasad (Pumpkin-Bhat). After this, other members of the house and the people around them receive the offerings.

At that time we usually take rice, Kaddu Dal, Vegetables  and specially prepare the bachka of August flower. What a tasty Prasad we usually enjoy in the afternoon, I can only feel those moments right now..

Yesterday, after completion of Nahay Khay I bowed to devotee (my sister) over phone and took their blessings.

The Glory of festival Chhath Puja generally celebrated in Bihar and eastern part of U.P. and has created a special place among the devotees and people. There is a surge of faith in Suryopasana.

But now a days we can see this festival of Chhath Puja is being celebrated everywhere in India wherever Biharis are there.

In spite of many restrictions amid pandemic of Covid-19, the enthusiasm of the festival is going up and all are busy in cleaning their house, nearby Ponds and making kachcha road to ghats at river Ganga .

In view of Chhath, there was a lot of movement in the market on Wednesday. The devotee purchasing soups, dauras and puja items along with fruits and sugarcane for prasad..

Due to sudden rise in demand, a price of all the items shot up.

Soups were being sold at prices ranging  from Rs. 80 to 100 and Daura from Rs. 150 to 250 and fruits and vegetables were also high.

Friends, I have just shared my feelings about day one of Chhath Puja .. it is the story on day one ..i.e. Nahay Khay …

I will present the story of 2nd day and share my feelings about “what is kharna” the 2nd day of festival Chhath Puja.

May the positivity of chhath Puja spread in your life and fill it with success and glory…

Happy chhath puja to you..

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Chhath Puja -…Araghya to Sun God

Dear friends…

Today I am going to tell you something about our most favorite festival, “Chhath Puja” which is being celebrated from 18th Nov to 20th Nov 2020 .

Chhath Puja is the most important festival for me . Doesn’t matter where I am in the world but I always come home during this time to attend Chhath Puja  and all my  family members come together to enjoy this Puja every year for four days.

Chhath Puja, also known as Sun Shashthi is celebrated on Kartik Shukla Shashthi. This festival is celebrated after 6 days of Diwali and mainly celebrated in the states of Uttar Pradesh, Bihar and Jharkhand with great fanfare.

On Chhath Puja, worshiping Sun God and Chhathi maiya helps you gain health, wealth and happiness. In the last few years, Chhath Pooja has got a special significance as a folk festival. This is the reason why the festival is celebrated with great pomp and show.

But due to covid pandemic this year, I am not going to attend this festival at my native place .  This year I will be deprived of that enthusiasm as I am away from my native place.

Chhath Puja  starts on the chaturthi of shukla paksha and celebrated till satpami tithi.

It is a four days celebration starts with “NAHAY KHAYA “ and ends with “USHA ARAGHYA “ which is the last day of chhath puja on 20th Nov 2020. On this day Vratis eat satvik food.

Day 1:  Nahay Khay Date: 18th Nov 2020.

This is the first day of Chhath Puja. Nahay Khay means that women/man(Vratis) take a dip in the river Ganga or any other holy river / water body. After bathing, the house is cleaned and simple vegetarian food is eaten to protect the mind from the vengeful tendency.

Day 2 : Kharna ..Date : 19th Nov 2020.

Kharna is the second day of Chhath Puja. On Kharna, the vratis fast for the whole day. On this day, the devotees celebrate “KHARNA” by observing NIRJALA VRAT ,  ( Fasting without drinking even a drop of water) from sunrise to sun set, they break their fast only after offering prayer to the Sun God .

In the evening, women prepare KHEER as Prasada, they usually eat gur ki kheer (jaggery kheer), fruits and chapati full of ghee..

Day 3 : Chhath Puja  : 20th Nov 2020.

On the third day of Chhath puja, an arghya is offered to the sun god during the Kartik Shukla Shashthi. In the evening, a bamboo basket is decorated with fruits, thekua and rice laddus, after which devotees offer an arghya to the sun with their families.

At the time of Arghya, water and milk is offered to Sun God and the Chhathi Maiya is worshiped from a soop filled with prasad.

After the worship of Sun God, Shashthi Devi songs are sung in the night and the vrat katha is heard.

This is very important day for us, In the morning we usually prepare THEKUA and RICE LADDU  with  the help of all family members ,

Day 4 :Usha Arghya : 21st Nov.

On the last day of Chhath puja in the morning, an arghya is offered to the Sun God. On this day, before sunrise, the devotees have to go to the riverbank to offer an arghya to the rising sun.

After this, the vratis ask Chhathi maiya for the safety and prosperity of all the family members and the happiness of the entire family. After worship, devotees drink sharbat and raw milk, and eat a little prasada in order to break one’s fast which is called  Parana.

After that we all receive Prasada from the devotee and enjoy the tasty Thekua, and Rice laddu.. these prasada has to be distribute to all friends an relatives . Really it is all memorable events but today I deprived of that enthusiasm as I am away from my native place.

Long live the tradition of Hindu culture. As the generations have passed by, Hindu culture is getting stronger and stronger .

Let’s keep it up …Best wishes for CHHATH PUJA…

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