वक़्त वक़्त की बात

वक़्त की सबसे अच्छी बात यह है कि अच्छा चल रहा हो या बुरा चल रहा हो, वक़्त हमेशा अपनी ही रफ़्तार से चलता  रहता है |

हाँ, जब आदमी दुःख में होता है तो उसे लगता है कि समय धीरे चल रहा है और जब ख़ुशी के पल होते है तो लगता है जैसे समय पंख लगाकर उड़ा  जा रहा है |

वो फिल्म “वक़्त” का गाना याद आता है ..

कल जहाँ बसती थी खुशियाँ… आज मातम है वहाँ

वक़्त लाया था बहारें, ….वक़्त लाया है खिज़ां

वक़्त से दिन और रात…. वक़्त से कल और आज

वक़्त का हर शय गुलाम…. वक़्त का हर शय पे राज़…

यह कहानी है एक राजा की, जो अपने  युद्ध कौशल से आस पास के छोटे राज्यों को हरा कर अपने राज्य में मिला लेता था | इस तरह वह अपने राज्य का विस्तार करता जा रहा था |

ऐसा नहीं था कि सिर्फ दुसरो राज्यों से लड़ाई करता था बल्कि अपने राज्य का विकाश का भी काम करता था |

इससे राज्य की जनता भी राजा  से खुश थी और उसे पराकर्मी राजा का ख़िताब  दिया था |

इससे राजा को थोडा अहंकार होने लगा | उसे लगता था कि  उसके ताक़त और बुद्धि के आगे कोई अन्य राज्य का राजा टिक ही नहीं सकता |

एक दिन राजा  अपने सैनिकों के साथ शिकार पर जा रहे थे तभी रास्ते  में एक बाबा जी का आश्रम दिखाई पड़ा | बाबा जी वहाँ पूजा अर्चना कर रहे थे |

राजा ने बाबा का आश्रम देख कर अपने घोड़े से उतर कर बाबा जी के पास आये और उनके पैर छू कर प्रणाम किया |

बाबा ने उन्हें आशीर्वाद  दिया और कहा …आपने प्रजा के लिए जो अच्छे कार्य किये है, उससे हम खुश है और आपको कुछ देना चाहते है |

राजा  ने कहा …जी बहुत अच्छा, लेकिन आप मुझे क्या देना चाहते है ?

बाबाजी ने उसके ज़बाब में राजा को एक ताजीब दिया और कहा ….तुम इसे गले में पहन लेना | इस ताजीब में एक मंत्र लिखा है | इस ताजीब को तब खोलना जब तुम सबसे ज्यादा मुश्किल में होगे |

तुम्हे लगे कि अब तुम्हारी जान पर आफत आन पड़ी है और तुम्हारी ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है |

राजा ने बाबा की ओर देखते हुए कहा…आप की जो आज्ञा | हालाँकि राजा  मन ही मन सोच रहा था कि बाबा जी मेरी मुसीबत से बचने के लिए मुझे ताबीज क्यों दे रहे है |

मैं तो ऐसा राजा बन गया हूँ कि मुझे कोई भी हरा ही नहीं सकता है | मुझे तो हमेशा जीत ही जीत हासिल हो रही है |

दूसरी तरफ आस पडोस के जितने भी राजा थे सभी सोच रहे थे कि इस घमंडी राजा को कैसे मात दी जाए…, उसे कैसे हराया जाए |

ऐसा सोच कर सभी दुश्मन देश के राजा आपस में मिल गए और सभी राजाओं ने प्लानिंग किया कि  सभी मिलकर एक साथ उस राजा पर आक्रमण  करेंगे |

जब सारे राजाओं की सेना एक साथ उस राजा से युद्ध के लिए इकट्ठा हुए तो उनकी शक्ति उस राजा से काफी बढ़ गयी  और उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से उन पर आक्रमण कर दिया |

राजा उनकी विशाल सेना को देख कर घबरा गया और लड़ते हुए हारने की कगार पर आ गया | उसे अब लगने लगा कि मैं मारा जाऊंगा |

इसलिए वह युद्ध भूमि से अचानक गायब हो गया और भागते हुए जंगल की ओर चला गया | जंगल में भागते हुए वह रास्ता भटक गया |

उसे घने जंगल में रास्ते का कोई ज्ञान नहीं हो रहा था , तभी देखा  कि कुछ दुश्मन के सैनिक लोग उसको खोजते हुए उसी तरफ आ रहे है |

राजा उस जंगल में और अन्दर तक चला गया … तभी उसे एक पहाड़ से घिरा हुआ गुफा दिखाई दिया | वह जान बचाने के लिए उस गुफा में जा कर छिप गया और इंतज़ार करने लगा  कि कुछ अच्छा हो जाए |

लेकिन राजा को घबराहट हो रही थी और उसका  दिल जोर जोर से धड़क  रहा था |

उसे एहसास हो गया कि अब उसका अंतिम समय आने वाला है |

ऐसा सोच ही रहा था कि अचानक घोड़ों की टापों  की आवाज़ सुनाई देने लगी | उसे लगा कि  दुश्मन देश के सैनिक उसे ढूंढते  हुए ही इधर आ रहे है | उन्हें शायद मेरे छिपने का पता चल चूका है |

अचानक से उसे लगा अब तो जैसे सब कुछ ख़त्म हो गया है , उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, |

उसे महसूस होने लगा कि वो सैनिक अब उसे पकड़ लेगा और  सभी मिल कर  उसे फांसी दे देंगे |.

राजा को पूरा एहसास हो चला  था कि  अब तो मेरा मरना  बिलकुल तय है |

वह बिलकुल निराश होता जा रहा था तभी उसे अचानक याद आया कि बाबा जी ने उसे एक ताबीज दिया था और कहा था कि मुसीबत के अंतिम घडी में ही इसे खोलना |

वो ताबीज जो उसने गले में पहन रखा था उसे फटाफट निकाला और खोल कर देखा | ताबीज में  एक कागज़ की चिट्ठी थी | उसमे जो मंत्र  लिखा था, उसे वह पढने की कोशिश करने लगा | उसमे लिखा था …”ये भी कट जायेगा” |

राजा उसे पढ़ कर समझ गया कि यह  बुरा समय भी कट जायेगा और उसने एक सुकून की सांस ली |

एक बार फिर से ऊपर वाले को याद किया और कहा …धन्यवाद भगवान् , आपने मुझे अब तक जिंदा तो  रखा है |

उसने महसूस करना शुरू किया कि उसके अन्दर सकारात्मक विचार आने लगे है | उसका मन का डर अब गायब हो चूका था |  वो घोड़ो के टापों की  आवाज़ भी आना बंद हो चूका था  | शायद  सैनिक लोग वहाँ से जा चुके थे |

राजा हिम्मत कर धीरे से गुफा से बाहर निकला और वहाँ के स्थिति का मुआयना कर  आश्वस्त हो गया कि अब कोई खतरे वाली बात नहीं है |

उसने जंगल में छुप कर कुछ दिन बिताए  और  फिर से अपनी सेना को एकत्र करना शुरू किया | 

एक दिन अनुकूल समय पाकर उसने उस राज्य पर आक्रमण  कर दिया जो राज्य उसका खुद का था और जिसे विरोधी राजा ने हथिया लिया था |

आखिर में जीत उसकी हुई |, उसने अपना राज्य फिर से प्राप्त किया और अपना झंडा फिर से अपने राज्य में फहराया |

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए क्योंकि अच्छा चल रहा हो या बुरा… ये वक़्त भी कट जायेगा | बड़े से बड़े संकट टल  जायेंगे |

बस अपना धैर्य और साहस को बनाये रखना होगा | हर परिस्थिति में अपनी सोच को बुलंद रखना होगा  और अनुकूल परिस्थिति का इंतज़ार ………..क्यों मैंने सही कहा ना..??

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अधूरे एहसास

सेठ धनराज, एक सच्चा इंसान , पता नहीं पिछले जन्मो का कितना अच्छा कर्म  किया था कि इस जन्म में उन्हें वो सब कुछ मिला जिसकी इच्छा एक इंसान की होती है |

व्यवसाय में अब्बल तो है ही, तभी तो पांच – पांच  फैक्ट्री के  मलिक है  और अपने इलाके के अकेले करोड़पति भी | 

वे इतने  भाग्यशाली कि उनकी धर्मपत्नी भी साक्षात् देवी है  वो सेठ जी की तरह ही दयालु ह्रदय और पूजा पाठ में उनका भरपूर साथ निभाती है |

कमी थी तो बस एक औलाद की | सेठ जी ने अपने घर के छत पर एक  भगवान् का खुबसूरत मंदिर बनवाया और रोज़ सुबह पूजा अर्चना के बाद भगवान् से विनती करते …. प्रभु,  आपने मुझे वह सभी कुछ दे रखा है जिसकी इंसान इच्छा कर सकता है, बस मुझे एक औलाद की कमी है |

इतने बड़े मकान में मुझे सूनापन खलता है | भगवान् के सामने वो ऐसी विनती  रोज किया करते थे |

एक दिन उनका  वह सपना भी पूरा हो गया और उनके घर में एक बहुत सुन्दर बेटे का जन्म हुआ .., घर किलकारियों से गूंजने लगा और सेठ जी अपने जीवन से संतुस्ट भगवान् को रोज़ धन्यवाद कहते |

वक़्त अपने सामान्य गति से बीत रहा | उनका इकलौता बेटा संजय बड़ा होकर कॉलेज में दाखिला  लिया | लेकिन कॉलेज में गलत दोस्तों के संगत में पड़ गया और दुसरे दोस्तों के ठाठ – बाट देख कर खुद भी फालतू के शौक में पैसे उड़ाने लगा |

उसके पिता के पास तो पैसो की कोई कमी थी नहीं, वह जितना चाहे अपनी माँ से पैसे ले लेता और दोस्तों के बीच  अपने बड़प्पन का एहसास कराता |

धीरे धीरे कॉलेज के फाइनल परीक्षा की घडी आ गयी | संजय अपने गर्ल फ्रेंड से कहा.. देखना मेरे ग्रेजुएट बनने पर मेरे पिता जी फेरारी कार गिफ्ट में देंगे |

एक दिन रात के खाने पर सभी लोग बैठे थे तभी संजय ने अपने पिता जी से पूछा … डैड. आप मुझे ग्रेजुएट बनने पर क्या गिफ्ट देंगे |

पिता ने खुश होते हुए कहा…. मैं तुन्हें गिफ्ट में भागवत गीता देना चाहूँगा | इसके ज्ञान की बातें तुम्हे ज़िन्दगी के हर  मुसीबत से बाहर निकलने  में मदद करेंगे |

ओह डैड,  आप भी कैसी बातें करते है | क्या अभी मैं बुढा हो गया हूँ जो भगवान् के उपदेशों को पढ़ा करूँ |

आप को सोचना चाहिए कि मैं ग्रेजुएट बनने जा रहा हूँ तो इसका उत्सव (celebration) शानदार ढंग से होना चाहिए | मैं तो ऐसे मौके पर आप से एक फेरारी कार लेना चाहूँगा |

पापा ने कहा.. ठीक है मैं विचार करूँगा |

और वह दिन भी आ गया | कॉलेज का रिजल्ट निकला और वह ग्रेजुएट बन गया | इस खुश खबरी को लेकर वह ख़ुशी ख़ुशी अपने घर आया और सीधे पापा के पास पहुँचा |

उसने अपने पिता के पैर छुए और पूछा … डैड , मेरा ग्रेजुएट बनने का गिफ्ट कहाँ है ?

संजय ने सोचा था कि फेरारी कार आकर मेरे घर के सामने खड़ी होगी, जिसे वह दोस्तों को दिखा कर  अपने अमीर होने का एहसास कराएगा |

पापा ने बेटे को देख कर ग्रेजुएट बनने पर बधाई दी और कहा … यह रहा तुम्हारा गिफ्ट  और कहते हुए उन्होंने वह भागवत गीता उसके हाथ में दे दी |

भागवत गीता को देख कर अचानक उसे गुस्सा आ गया | उसने मन ही मन सोचा,  पिताजी  इतने पुराने ख्यालों के है कि हम जैसे आधुनिक समय के बेटे की भावनाओं की उन्हें  क़द्र ही नहीं है |

मुझे पूरा विश्वास था कि हमारे ग्रेजुएट बनने पर पापा इस क्षण को शानदार ढंग से मनाएंगे और मुझे फरारी कार गिफ्ट में ज़रूर देंगे  | उनके पास इतना धन है कि एक क्या वह अनेकों  फेरारी खरीद सकते है |

उसे इस बात पर इतना गुस्सा आया कि उसने भागवत गीता को दूर फेकते हुए कहा.. .मैं अब इस घर में नहीं रह सकता और आज से हमारा आपका रिश्ता समाप्त |

इतना बोल कर तेज़ क़दमों से घर से बाहर निकल गया | और पता नहीं कहाँ  चला गया |

संजय के इस व्यवहार से पिता को बहुत आश्चर्य हुआ | उन्होंने उसे  बहुत ढूँढने की कोशिस की लेकिन उसका कोई  अता – पता नहीं चल सका |

पिता उसके घर से चले जाने के ग़म में बहुत उदास रहने लगे | वे इस बात को बर्दास्त नहीं कर पा रहे थे कि उनका वह इकलौता बेटा जिसे इतना प्यार करते थे   उनसे नाता तोड़ कर इस तरह चला जायेगा |

एक साल का समय बीत गया | संजय किसी तरह छोटे मोटे काम करके गुज़ारा कर रहा था | उसका गुस्सा अब शांत हो चूका था और तभी  उसे घर का ध्यान आया |

उसने  मन ही मन सोचा…..मेरे जाने के बाद पिता की क्या स्थिति हुई होगी | वह  मुझे कितना प्यार करते थे,  मुझे उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था |

उसने बिना देर किये  तुरंत ट्रेन पकड़ लिया और घर की ओर रवाना हो गया |

घड़ी में देखा तो दोपहर के तीन बज रहे थे और जोरो की भूख लग रही थी | उसने सोचा आज बहुत दिनों के बाद घर में माँ के हाथों का खाना खाऊंगा |

वह  दरवाजे पर दस्तक देकर दरवाजा खुलने का इंतज़ार करने लगा |

दरवाजा माँ ने खोला,  जो सफ़ेद साड़ी में उदास आँखों से अपने बेटे को सामने खड़े आश्चर्य से देख रही थी |

संजय ने माँ को ऐसी हालत में देखा तो घबरा कर जल्दी से पूछा … तुम्हे क्या हुआ माँ और पिता जी कहाँ है ?

मेरे बच्चे,  तुमने आने में देर कर दी | तुम्हारा इंतज़ार करते करते , अंततः आज सुबह उन्होंने इस दुनिया को छोड़ दिया |

तुम्हे तो पता ही है कि वे तुझसे कितना प्यार करते थे, तुम्हारी जुदाई वे बर्दास्त नहीं कर पाए |  

वे तुम्हारे वियोग में रोज़ तिल तिल मरते रहे, और आज उन्होंने आखरी साँसें ली |

माँ के मुँह से ऐसी बाते सुनकर वह स्तब्ध रह गया और उसके आँखों से झर झर आँसू बहने लगे |

वह चुप चाप अपने पिता के कमरे में दाखिल हुआ | बिस्तर सुनी पड़ी थी … पिता जी नहीं थे |

वहाँ पास में ही टेबल पर वही भागवत गीता पड़ा था | उसने उस किताब को उठा लिया और सुनी आँखों से उसके पन्ने पलटने लगा,  तभी उसमे से एक लिफाफा निकल कर ज़मीन पर गिर पड़ा |

उसने झुक कर उस लिफाफे को उठाया और उसे खोल कर पढने लगा …

मेरे स्नेही संजय, तुम मेरे जिगर का टुकड़ा हो | मैंने आज तक तेरी कोई भी ऐसी फरमाईस  नहीं थी जिसे पूरी नहीं की  थी |

तुम्हारे ग्रेजुएट बनने की ख़ुशी में तुम्हारा मनपसंद फरारी कार भी खरीद लिया था जिसका  भुगतान कर उसका रसीद इस भागवत गीता में रख कर तुम्हे गिफ्ट करना चाहता था |

लेकिन तुम मेरी भावनाओं को नहीं समझ सके और मुझसे रूठ कर चले गए |

जब तुम ही मेरे पास नहीं हो तो मुझे यह धन दौलत सब बेकार लगता है |    बस एक ही इच्छा है कि  तू किसी तरह घर आ जा और अपने नयी फरारी कार में बैठा कर मुझे शहर की सैर कराओ |

मेरा दिल कहता है कि और ज्यादा दिन तक तुम्हारा जुदाई बर्दास्त नहीं कर सकता हूँ …आगे भगवान् की मर्ज़ी …

पढ़ते पढ़ते संजय के हाथ से वह चिट्ठी ज़मीन पर गिर पड़ी  और वह  जल्दी से किताब के पन्ने पलटने लगा |

 तभी उसने उस कार की पेमेंट की रसीद को देखा, कार तो उन्होंने उसी समय खरीद कर मुझे दे दी थी |.

हे भगवान्, यह मैंने क्या कर दिया,  मैंने गुस्से में आकर अपने सबसे प्रिय पिता  का दिल ही नहीं दुखाया बल्कि उनके मृत्यु का कारण भी बन गया |

उन्होंने आज तक मेरी सारी इच्छाओं को पूरा किया पर …मैं अभागा उनकी अंतिम इच्छा को भी पूरा ना कर सका ………..

खुद के बारे में

न किसी पीर से पूछो

न किसी फ़क़ीर से पूछो

बस कुछ देर आँखे बंद कर

अपने ज़मीर से पूछो

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सकारात्मक विचार…9

गरीबों की सुनो

दोस्तों ,

मैं आशा करता हूँ कि आप सभी अपने अपने कामों में व्यस्त रहते हुए भी ज़िन्दगी का लुफ्त उठा रहे होंगे |

आज मैं आप सबों को शहर से दूर एक गाँव में ले चलता हूँ जहाँ रेलवे ट्रैक के किनारे बने हुए झुग्गी झोपड़ियों में रहने को विवश लोग किसी तरह अपना जीवन यापन करते है |

साधारणतया बहुत से घरों में फालतू के कपडे पड़े रहते है जिनका घर वालों के लिए कोई उपयोग नहीं होता है |

खास कर बच्चों के कपडे जो बहुत जल्द छोटे पड़ जाते है …और उपयोग से बाहर हो जाते है | …इन बचे हुए कपड़ों को घर वाले समझ नहीं पाते है कि इनका क्या करें |

 सच तो यह भी है कि इन सभी फालतू कपड़ो को घर में रखना भी संभव नहीं हो पाता है |

मैंने ने सोचा कि इसका सबसे अच्छा और उपयुक्त उपाय यह है कि इन्हें उन गरीबों में बाँट दिया जाए, जो कपड़ो के आभाव में अर्ध नग्न रहते है और ठण्ड में ठिठुरते रहते है |

चूँकि दिवाली  का समय था, और हमलोग अपने घरों की सफाई में व्यस्त थे | इसी दौरान यह विचार दिमाग में आया कि क्यों न हम सब भी अपने घरों से उपयोग में नहीं आने वाले कपडे एक जगह इकट्ठा करें और इन्हें ले जा कर रेलवे किनारे बसे झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को बाँट दें …

बस फिर क्या था,  हमलोग यह सोच कर फालतू के सारे कपड़े  और अन्य सामान इकट्ठा किया और इन्हें लेकर झुग्गी – झोपडी एरिया में पहुँच गए …

यह कल्याणी के पास का  इलाका जहाँ हमलोगों ने देखा कि  15- 20  झुग्गी झोपडी रेलवे  ट्रैक के किनारे बनाकर लोग रहते है और किसी तरह अपना गुज़ारा करते है |

ठण्ड के मौसम में भी  किसी के तन पर  ठीक से कपडे नहीं थे |  

शायद इनका शरीर  इस ठण्ड के मौसम को भी झेल लेता है | इनका इम्युनिटी सिस्टम इतना मजबूत होता है कि इन्हें न मास्क की ज़रुरत है और ना सेनितिजर की | बच्चे मस्त होकर अध  नंगे वहाँ खेल रहे थे |

उनके चेहरे पर ख़ुशी थी, आधी पेट खा कर भी आनंद से जीना जानते है शायद  |

हमलोगों ने जैसे ही अपनी गाड़ी उनलोगों के पास रोकी,  …तो बच्चे ..बूढ़े .. औरत … मर्द सभी दौड़ कर हमलोग की गाड़ी के पास आ गए | उन्हें एहसास हो गया था कि उनके लिए हमलोग कुछ लेकर आये है |

हमलोगों ने जब अपने बैग से बांटने हेतु कपडे निकाले तो वे लोग लेने के लिए टूट पड़े और आपस में धक्का मुक्की करने लगे |

वैसे तो ये गरीब लोग सब साथ रहते है लेकिन इस ठण्ड के मौसम में अपने बच्चो के कपडे के लिए आपस में लड़ने को उतारू हो गए |

सबों के हाथ में कुछ कपडे मिले जिसे पाकर उनके चेहरे पर ख़ुशी बिखर गई | उनके चेहरे पर ख़ुशी देख कर हम सबों को भी एक  अजीब सा ख़ुशी का अनुभव हो रहा था |

मेरे मन में विचार आया कि क्यों ना समय – समय पर आकर इनलोगों की मदद की जाए |

मैंने वहीँ फैसला किया कि प्रत्येक सप्ताह यहाँ आऊंगा और उनके लिए कपड़ों के अलावा भी कुछ अन्य आवश्यक वस्तुएं और उनके खाने पीने  की कुछ पैकेट इनलोगों में वितरण करूँगा |

और इसी बहाने इनलोगों के बीच  साफ़ सफाई के बारे में और बिमारियों से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने और बच्चो की पढाई लिखाई के बारे में भी समझाने का प्रयास करूँगा |

हालाँकि मैं समझता हूँ कि यहाँ NGO लोग भी इस तरह की ज़रूर मदद करते होंगे |

लेकिन हम लोग भी इस नेक  काम में अपनी भागीदारी निभा कर और उनके लिए कुछ कर  के ना सिर्फ पुण्य कमा सकते है बल्कि एक आन्तरिक ख़ुशी भी महसूस कर सकते है

तो नए साल में मैंने इस तरह के कामों को समय समय पर करते रहने का निश्चय किया है ,…मेरे इस फैसले के बारे में आप की क्या राय है ….हमें कमेंट कर ज़रूर बताएं ….

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खुशियों के आँसू ..

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राजेश अपने ऑफिस में बैठा  बचपन के दोस्त रतन के साथ चाय पी रहा था और गप्पे मार रहा था | आज करीब एक वर्ष के बाद दोनों का मिलना हो रहा था |

वैसे तो बचपन से दोनों साथ पढाई की थी और पूरा बचपन साथ ही बीता था |

राजेश के माता पिता तो बचपन में ही दुनिया छोड़ गए थे | लेकिन रतन के माता पिता राजेश को भी अपने बेटे की तरह समझते थे |

बड़ा होने पर दोनों के रास्ते अलग अलग हो गए | जहाँ राजेश एक बड़ा बिल्डर बन गया तो दूसरी तरफ रतन ने अपनी स्टील की  फैक्ट्री खोल ली थी |

दोनों अपने कामों में इतना मशगुल रहते है कि आज एक  वर्षो के बाद मिलना हो रहा था  | हालाँकि अब दोनों अलग अलग शहरों में रहते है |

रतन आज भी यहाँ आया तो था अपने काम के सिलसिले में ही | उसने बातों बातों में राजेश को बताया कि  तुम्हारे शहर में ही एक ऑफिस खोलने का विचार है |

कल ही पेपर में छपे एक इश्तेहार में  कैरोटा नामक जगह में एक मकान के नीलामी का समाचार छपा था | किसी ने बताया था कि वह जगह बहुत अच्छी है और ऑफिस खोलने के लिए उपयुक्त भी |

इतना बोलते हुए उसने पपेर में छपी  विज्ञापन को राजेश को दिखलाते हुए कहा …तुम तो  खुद भी एक बिल्डर हो इसलिए तुमसे अच्छी राय और कौन दे सकता है |

राजेश की नज़र जैसे ही उस पेपर पर पड़ी तो वह चौक गया | उस पेपर में छपे फोटो को देख कर  पहचान गया | यह तो वही बाबूजी है |

अचानक उसके दिमाग में बचपन की यादें ताज़ा हो गयी / पांच साल का राजू मंदिर के सीढियों पर बैठा भीख मांग रहा था |

चेहरे से मासूमियत झलक रही थी और ठण्ड के कारण ठिठुर भी रहा था | लेकिन पेट की आग को शांत करने के लिए तो भीख माँगना ही पड़ेगा |

उसी समय  सेठ  ताराचंद जी अपनी पत्नी को साथ लिए मंदिर की सीढियों पर चढ़ रहे थे ताकि बनारस के विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ के दर्शन कर सके |

अचानक उनकी पत्नी की नज़र भोले भाले राजू पर पड़ी |  ठण्ड से ठिठुरता मासूम  को देख कर उनको दया आ गयी | उनका भी बेटा इसी के उम्र का है, और इसी के जैसा मासूम भी |

राजू के पास आकर सेठानी ठिठक गई और प्यार से पूछा …तुम्हारा क्या नाम है और तुम यहाँ भीख क्यों मांग रहे हो ? तुम तो किसी अच्छे घर के लगते हो |

प्रश्नों की  बौछार को सुनकर वह नन्हा सा बालक थोड़ी देर के लिए तो घबरा ही गया |

फिर थोडा रूक कर कहा…मेरे माता पिता अब इस दुनिया में नहीं है | वे छः माह पहले गंगास्नान के दिन गंगा नदी में डूब कर मर गए |

घर पर मेरे चाचा मुझे बहुत पिटते थे इसलिए घर से भाग कर यही मंदिर में रहता हूँ | मुझे बहुत भूख लगी है कुछ पैसे दे दो  ना |

उसकी बातों को सुनकर सेठानी को दया आ गई और उसने अपने पर्स से कुछ पैसे निकाल कर देने लगी, तभी सेठ जी ने मना  करते हुए कहा ….हो सकता है यह बच्चा झूठ बोल रहा हो |

ऐसे बच्चे लोग चोरी – चमारी करते है और पैसा मिलने पर ड्रग्स और नशा का सेवन करते है | इन सब बच्चो के पीछे पूरा गैंग होता है |

लेकिन सेठानी को राजू के मासूमियत पर दया आ रही थी | उन्होंने अपने गले से लॉकेट उतार कर राजू को पहनाते हुए कहा …तुम इसे हमेशा अपने साथ रखना | यह तुम्हे हर मुसीबतों से बचाएगा |

सेठ जी को भी बच्चे पर दया आ गयी और सेठानी के कहने पर उन्होंने बच्चे को किसी अनाथालय  में भर्ती  कराने का फैसला किया |

वे भगवान् भोलेनाथ के पूजा अर्चना के बाद बच्चे को लेकर वहाँ से कुछ दूर स्थित एक अनाथालय में पहुँचे | इस अनाथालय से उनका पुराना रिश्ता था |

वे जब भी  बनारस आते तो यहाँ आकर कुछ ना कुछ डोनेशन देकर जाते थे |

जैसे ही वहाँ के संचालक की नज़र सेठ जी पर पड़ी, वे उनके स्वागत में उनके पास आये और आदर के साथ उन्हें अपने ऑफिस में ले गए |

सेठ जी ने कहा …मैं आप को एक जिम्मेवारी सौपना चाहता हूँ | मैं तो यहाँ कभी कभी ही आता हूँ क्योकि हमारा ठिकाना  यहाँ से बहुत दूर जो है |

आप इसकी पूरी परवरिश अपने बच्चे जैसा  करें और इसे पढने  लिखने की पूरा व्यवस्था करें |

मैं बीच बीच में कुछ पैसे भेज दिया करूंगा | इस मासूम बच्चे की ज़िन्दगी सवंर जाए  तो समझूंगा कि मेरी चारो धाम की  तीर्थ यात्रा पूरी हुई |

राजू के गले में लॉकेट पड़ते  ही सचमुच कमाल हो गया था | धीरे धीरे कर के उसकी सारी परेशानियां ख़त्म हो रही थी |

तभी रतन की आवाज़ कानों में पड़ी तो उसकी तन्द्रा भंग हुई और उसने रतन की ओर देखा |

रतन बोला.. अरे, कहाँ खो गए मेरे यार | मैं कितनी देर से उस मकान के बारे में तुम्हारे सलाह की प्रतीक्षा कर रहा हूँ |

अचानक राजेश की आँखों में आँसू आ गए  | उसने अपनी आँखों पर रुमाल रखते हुए रतन से कहा …अब तुम यह मकान नहीं ले सकते मेरे भाई |

यह मकान उसी सेठ की है जिनके बारे में अक्सर तुमसे जिक्र किया करता था | मैं तो उनकी कितनी तलाश करता रहा , लेकिन आज तुम्हारे कारण मेरी खोज पूरी हुई |

क्या कह रहे हो तुम ?  यही वो सेठ है जिन्होंने तुम्हारी पढाई लिखाई और रहने का पूरा खर्चा उठाया था ?

हाँ भाई हाँ …, ये लोग मेरे माता पिता तुल्य है ….रतन  की ओर देखते हुए राजेश ने  कहा |

लेकिन ऐसी क्या बात हो गयी कि उनका यह मकान नीलाम हो रहा है, मुझे पता लगाना होगा |

खैर जो भी हो, कल ही नीलामी का दिन तय है | हमलोग को वहाँ  समय पर पहुँच जाना होगा …राजेश ने कहा |

सच्चाई तो यही  है कि यह संसार प्रकृति के नियमों के अधीन है और परिवर्तन एक अटल सत्य है |

एक समय था कि सेठ जी लोगों को खुले दिल से सहायता किया करते थे क्योंकि उनके पास सामर्थ था |

लेकिन वक़्त ने करवट क्या बदली कि आज उनका मकान  ही नीलम नहीं हो रहा है बल्कि जीवन भर की कमाई  इज्जत और प्रतिष्ठा सब कुछ नीलामी हो रहा है |

एक दिन माँ जी अपने बेटे के साथ मंदिर जा रही थी  तभी उनके कार का एक्सीडेंट हो गया |

बाबूजी उन दोनों के इलाज़ में अपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दिए, परन्तु उन दोनों को बचा नहीं पाए | इलाज के खर्चे के लिए मकान भी गिरवी रखना पड़ा |

और अब हालात ऐसे हो गए कि कल ही मकान की नीलामी होने वाली है | मकान छुड़ाना तो दूर की बात हो गयी, खाने के भी लाले पड़ गए है |

सुबह सुबह राजेश तैयार हुआ और सबसे पहले अपने घर में बने मंदिर में जाकर माथा टेका |

हाथ जोड़ कर भगवान् से बोला….हे भगवन, आज मैं इस काबिल हो गया हूँ कि अपने पिता तुल्य सेठ जी का मुसीबत के समय उनका सहारा बन सकूँ | मुझे इतनी शक्ति देना प्रभु

और उसके बाद वह अपने दोस्त रतन के साथ घर से रवाना हो गया | करोंटा यहाँ से कुछ ही दूर था ..इसलिए शीघ्र ही वे दोनों वहाँ पहुँच गए |

नीलामी के स्थल पर पहुँचा तो देखा ….सारी  तैयारियां हो चुकी है | कुर्सी टेबल सजी हुई है और सभी सम्बंधित लोग पहुँचे हुए है |

तभी एक किनारे बैठे सेठ जी की ओर राजेश की नज़र गयी | पहले तो उन्हें वह पहचान ही नहीं पाया ..बिलकुल  बुड्ढे हो चुके थे और  शरीर से भी काफी दुर्बल लग रहे थे |

सचमुच बुढ़ापा बहुत दुखदाई होता है | खास कर जब उसका सब कुछ लुट चूका हो |

जवान बेटा को खोया और साथ ही साथ बुढ़ापे का सहारा  पत्नी भी भगवान् को प्यारी हो गई |

तभी नीलामी की कार्यवाही शुरू हो गई और बोली 25 लाख से शुरू हुई | अंत में राजेश ने सबसे ज्यादा बोली ५० लाख की लगा कर नीलामी अपने नाम कर लिया |

इस पर रतन ने  टोका और राजेश को रोकते हुए कहा …इतना ज्यादा बोली लगाने की क्या ज़रुरत है ? इतने पैसों में इससे अच्छी मकान  इस इलाके में मिल जायेगा |

नहीं मेरे दोस्त / इस मकान को दूसरा कोई भी नहीं ले सकता है क्योकि इस घर से  मेरे बाबु जी की यादें जुडी हुई है | मेरी माँ जी की रूह  बसती है |

अगर इससे भी ज्यादा रूपये देने की ज़रुरत पड़ती तो भी मैं पीछे नहीं हटता |

आज मैं जो कुछ भी हूँ , जितना भी धन दौलत है,  सब बाबूजी की बदौलत है |

वर्ना मैं तो एक भिखारी ही था जो मंदिर की सीढियों पर बैठ कर भीख माँगा करता था |

इन्होने ही मुझे नयी ज़िन्दगी दी है और इतना कह कर वह अपने कुर्सी से उठा और सीधे बाबूजी के पास पहुँचा |

उनके  पैर छू कर प्रणाम किया और बोला …बाबू जी उठिए ..अपने घर चलें |.

सेठ जी अपने बूढी आँखों से लगी चश्मा साफ़ करते हुए कहा … तुम कौन हो नौजवान और किस घर की बात कर रहे हो ?… अपना घर तो आज नीलाम हो गया |

कल से हमारा ठिकाना मंदिर  होगा जहाँ लोगों से भीख मांगकर अपना पेट पालना होगा |

इतना सुनते ही राजेश की आँखों में आंसूं आ गए | उसने बाबु जी के पैर पकड़ का कहा …आपका ठिकाना मंदिर नहीं होगा बाबु जी,..

. क्योकि आज से पच्चीस साल पहले एक मंदिर से भीख मांगते बच्चे को वहाँ से निकाल कर सहारा दिया था ,,,उसे एक नयी ज़िन्दगी दी थी |

आज वही लड़का अब आपको सहारा देगा और एक नयी ज़िन्दगी देगा |

उसने अपने गले से लॉकेट निकाल कर बाबू जी के गले में पहना दिया |

बाबूजी लॉकेट देख कर तुरंत पहचान गए और राजेश से लिपट कर बोले  …राजू , तू कहाँ था इतने दिन |

आज यहाँ आकर इस बूढ़े को तूने नयी ज़िन्दगी दे दी |

वो राजेश को एक टक  देखे जा रहे थे …उनके आँखों से झर झर आँसू बह रहे थे …खुशियों के आँसू. |

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हर ब्लॉग कुछ कहता है …13

मैं और मेरा ब्लॉग

आज मोर्निंग वाक से फ्री होकर जब मैं ब्लॉग लिखने बैठा तो मेरे एक हाथ में चाय थी और दुसरे हाथ में अखबार |

मैं आज के अखबार पर सरसरी नज़र डाल ही रहा था कि उसके एक शीर्षक के ऊपर मेरी नज़र अटक गई |

हम बीते साल के अंतिम पडाव पार कर चुके है और नया साल २०२१ में प्रवेश कर चुके है | तो

ऐसे में पुरे साल का लेखा जोखा तो होना ही था ताकि बीते साल की उपलब्धियों और तकलीफ देय घटनाओं का मूल्यांकन किया जा सके. |

मेरे दिमाग में भी इस तरह के ख्याल आने लगे  और मैंने सोचा कि मेरा भी यह ब्लॉग एक साल पूरा करने जा रहा है |  अतः मुझे भी इच्छा हुई कि आज मैं अपने इस ब्लॉग की यात्रा के बारे में  आपसे चर्चा करूँ. |

आज जब ब्लॉग के वर्तमान स्थिति का अध्ययन करने लगा तो मुझे इसके उपलब्धियों (achievement) को देख कर ख़ुशी महसूस हो रही है, क्योकि सिर्फ एक साल में ही मैंने 360 ब्लॉग लिख डाले, जिसे मैं अपनी उपलब्धि मान सकता हूँ |

और सबसे बड़ी बात कि इसमें 50,000 से ज्यादा  व्यू (views ) भी आये और   170 से ज्यादा  फोलोवर (Follower) भी  बने  |

यह इस बात को दर्शाता है कि आपलोगों ने मेरी लेखनी को पसंद किया है | मुझ जैसे नौसिखिये  के लिए तो  यह बहुत ख़ुशी की बात है |

मैंने  जब इस ब्लॉग की शुरुआत की थी तो उस समय  ब्लॉग के बारे में ज्यादा कुछ जानता भी नहीं था |  मैंने  तो अपनी सारी ज़िन्दगी बैंकिंग सेवा से गुजार दी |

लिखने – पढने का समय नहीं निकाल सका था | लेकिन बचपन से लिखने – पढने का शौक मेरे अन्दर मौजूद  था | 

रिटायरमेंट के बाद अपने खाली  समय का उपयोग करने का मौका अभी मिला तो मैं इस दबी हुई इच्छा को परवान चढ़ाया |

हालाँकि रिटायरमेंट के बाद कुछ दिनों तक बिना काम के खाली घर में  बैठे रहने से कुछ चिडचिडा हो गया था और  मैं इस मुसीबत का समाधान ढूंढ ही रहा था तभी मेरे एक मित्र ने मुझे सुझाव दिया कि आप लोगों से सोशल मीडिया के द्वारा जुड़े रहने के लिए blogging शुरू कर सकते है |

इससे आप अपने समय का सदुपयोग रचनात्मक कार्यों के लिए कर सकेंगे |

 आप के पास जीवन का  एक लम्बा अनुभव है ,उसे आप इस ब्लोगिंग के माध्यम से लोगों के साथ अपने अनुभव  शेयर कर सकते है | अपने विचार व्यक्त कर सकते है जिसे पढ़ कर लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा |

मुझे अपने दोस्त की बात पसंद आई और मैंने मन ही मन इस क्षेत्र में ध्यान देने का फैसला कर लिया |

मैं धड़कते दिलो से और एक अंजाना डर के साथ अपने इस ब्लॉग की शुरुआत कर दी |

आज जब मैं इसके  उपलब्धियों पर गौर करता हूँ तो खुद भी मुझे विश्वास नहीं होता है |

मेरे साथ मित्रों ने भरपूर सहयोग दिया है | मैं मित्रों के कहने पर इस क्षेत्र में कदम रखा था | और अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा है  | मुझे रोज़ अपने दोस्तों के कमेंट्स का इंतज़ार रहता है |

सच कहूँ तो  मैं अपने मित्रो का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने हर कदम पर  मेरा साथ दे रहे है, चाहे अपनी कमेंट्स या अपना अनुभव से मेरा मार्ग दर्शन कर रहे है |.

मैं आप सब लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ |

सबसे पहले तो ब्लॉग  किस नाम से शुरू करूँ ..यह एक समस्या थी | तभी  मेरे ज़ेहन में यह बात आयी कि मैं एक रिटायर्ड बैंकर हूँ और मेरी कलम से निकले  शब्दों को आप तक पहुँचाना मेरा मकसद है,  इसीलिए मैंने इसका नाम दिया ….RETIRED KALAM .COM ..

इस  ब्लॉग में मैंने अपने अनुभव के विभिन्न रंगों को बिखेरने के लिए  विभिन्नं तरह के केटेगरी (category) बना रखी है जैसे …

  • कहानी,
  • कविता ,
  • हर ब्लॉग कुछ कहता है
  • स्वस्थ रहना ज़रूरी है
  • Me and my Art
  • मेरे संस्मरण
  • आज मैंने पढ़ा,  इत्यादि

आपको ये केटेगरी  कैसे लगते है ज़रूर बताएं, या कोई अच्छा टॉपिक या केटेगरी का सुझाव दें तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी |

मैं अपने को भाग्यशाली समझता हूँ कि आप सब लोग मुझे हर पल , हर कदम  Blog लिखने में मदद को तैयार रहते है |

इसके अलावा मैं अपनी स्वरचित कविताओं को भी प्रकाशित करने लगा हूँ | और सबसे बड़ी बात कि  इसके अलावा ड्राइंग और पेन्टिंग (drawing and painting) की भी मैंने एक केटेगरी बना रखी है जिसमे खुद के द्वारा बनाये गए ड्राइंग..| पेन्टिंग  पोस्ट करता हूँ |

मुझे बहुत सराहना भी आप लोगों के द्वारा मिलती है, जिसे पाकर मेरा मन हमेशा तरो – ताज़ा और खुश रहता है | अब तो यह ब्लॉग लेखन  मेरे जीवन का एक हिस्सा बन गया है |

हालाँकि  ब्लॉग की बारीकियों के बारे में अभी भी ज्यादा कुछ भी नहीं जानता हूँ,  लेकिन नित्य दिन  कुछ न कुछ  नया सिख रहा हूँ और रोज़ कुछ न कुछ अनुभव प्राप्त कर रहा हूँ |

आप मेरे इस ब्लॉग के बारे में कैसा महसूस करते है मुझे कमेंट्स के माध्यम से अवश्य बताएं, मुझे ख़ुशी होगी |

 नया साल २०२१ के अवसर पर मैं यही कहना चाहता हूँ कि ..

आप की आँखों में सजे है  जो भी सपने

और दिल में छुपी है जो भी अभिलाषाएं

यह नया साल इसे सच बनाये …

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …..

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मेरी श्रद्धांजलि

और दिनों की तरह आज भी जब मैं  मोर्निंग वाक से वापस आया तो मन बिलकुल तरो ताज़ा था क्योकि मोर्निंग वाक के दौरान मैं कुछ spiritual बातें मोबाइल के द्वारा सुनता रहता हूँ | जिसको सुन कर मन शांत हो जाता है और ख़ुशी की अनुभूति होती है |

घर आकर अपने रीडिंग टेबल पर बैठ अपने मोबाइल में खो गया

उनलोगों  के ज़बाब चेक (check) करने लगा, जिसे कल मैंने  “हैप्पी न्यू इयर “ का मेसेज भेजा था …उन्हें सकुशल रहने की कामना किया था |

कुछ लोगों के जबाब तो आये, मतलब उन्होंने भी मेरे सकुशल रहने की कामना की थी |

यह सत्य है कि दोस्तों और अपनों से मिले दुआएं और आशीर्वाद ही हमें खुश और तंदरुस्त रखते है |

लेकिन अचानक एक जगह व्हाट्स अप (WhatsApp) पर मैं रुक गया |  उसने मेरे मेसेज का ज़बाब नहीं दिया था, शायद मेसेज भी नहीं देखा था |

मुझे बहुत दुःख हुआ और नाराजगी भी हुई कि जिसके साथ वर्षों बैंक में काम किया और दुःख सुख के कई पलों को साथ साँझा किया |

उसने तो जबाब ही नहीं दिया और ना ही फ़ोन ही किया …और तो और उसने मेरे न्यू इयर मेसेज को देखा तक नहीं |

मैं दुखी मन यही सब सोच रहा था कि तभी मेरे मोबाइल में ट्रिंग ट्रिंग की घंटी बजी .. शायद कोई मेसेज आया था |

मैं मेसेज खोल कर देखा तो मैं स्तब्ध रह गया | मुझे अपने आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ |

अशोक दा का मेसेज था  …लिखा था.... Do you remember Partho ? He expired yesterday.  

मेरे लिए यह सुचना स्तब्ध करने वाला था | मैं तुरंत अशोक दा को वापस फ़ोन लगाया तो उसने इस बात की पुष्टि की |

 मेरा तो उससे रोज़ मेसेज का आदान प्रदान हो रहा था और अचानक आज सब कुछ ख़त्म |

लेकिन जीवन का यह भी एक कटु सत्य है, …. रात बारह बजे तक तो उसने न्यू इयर की पार्टी की थी .., फिर रात देरी से सोया …क्योकि दोस्तो के संग बिताये नए साल का जश्न याद करते हुए सोना नहीं चाहता था, यह दिन तो साल में एक बार ही आता है दोस्तों के साथ ख़ुशी मनाने के लिए….

शायद  सोचते सोचते उसकी आँख लग गयी होगी लेकिन कुछ ही पलों बाद शायद चार बजे भोर में हार्ट अटैक हुआ और कुछ ही पलों में सब कुछ समाप्त हो गया |

वह अलविदा कह गया |

यह सवाल कि सचमुच ज़िन्दगी इतना unpredictable क्यों हो गयी है, समझ में नहीं आता …  

आप खुशियाँ मनाएँ नए साल में

बस हँसे, मुस्कुराएँ नए साल में

गीत गाते रहें, गुनगुनाते रहें

हैं ये शुभ-कामनाएं नए साल में..

लेकिन

 कैसे खुशियाँ मनाये नए साल में ,

तुम अलविदा कह गए नए साल में

कैसे गीत गाएं , कैसे गुनगुनाएं नए साल में

हँसता मुस्कुराता दोस्त छोड़ गया नए साल में ,

तुम्हे लम्बी उम्र की दुआ देता नए साल में

लेकिन, नींद से जगे ही नहीं नए साल में ..

आज मैं कुछ ज्यादा ही भावुक हो गया हूँ  क्योंकि मेरे परम मित्र पार्थो प्रतिम मित्रा के निधन का समाचार सुन कर गहरा दुःख हो रहा है |

यह हम सब के लिए एक  अपूरणीय क्षति है |

भगवान् दिवंगत आत्मा को शांति दें, और उनके परिवार को इस दुःख की घडी को सहने की हिम्मत प्रदान करे

 भावभीनी श्रधांजलि

ॐ शांति ॐ

और मूंछ कट गयी….

दोस्तों कभी कभी कुछ घटनाएँ ज़िन्दगी में ऐसी घटती है कि वह हमेशा के लिए दिलो दिमाग पर छा जाती है |

आज जीवन में घटी एक सच्ची  घटना का  वृत्तांत आप सबों  के समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूँ जिसे पढ़ कर आपको अवश्य मजा आएगा |

जब यह घटना मेरे साथ घटित हुई थी तो मुझे पहले तो बहुत बुरा लगा था  लेकिन बाद में जब भी यह घटना मुझे याद आती है तो मेरे होठों पर मुस्कान बिखर जाता है |.

मुझे आज भी याद है वह दिन …  24 जुलाई 1977 का वह दिन था, जब हमलोगों ने रांची एग्रीकल्चर कॉलेज में एडमिशन लिया था |

एडमिशन के तुरंत बाद ही हमलोगों को  हॉस्टल आवंटित किया गया था | मुझे होस्टल नम्बर 3 का रूम नम्बर १० अलॉट  हुआ था |

हालाँकि मैं उन दिनों रांची में ही रहता था, और बस से  कॉलेज आता था और क्लास ख़त्म होने पर फिर वापस  रांची लौट जाया करता था |

आने जाने में परेशानी अवश्य होती थी लेकिन कॉलेज में चल रहे रैगिंग के डर से ऐसा करना पड़ रहा था |

कॉलेज के शुरुवाती दिन थे और उन दिनों में रैगिंग भी बड़े जोरो की हुआ करती थी |

सीनियर छात्रों  के आदेशानुसार फर्स्ट trimester के छात्रो को डिनर के बाद नौ बजे रात  में  कॉमन रूम में उपस्थित होना पड़ता था जहाँ हमलोगों की तरह तरह से रैगिंग किया जाता था |

हॉस्टल में रह रहे हमारे मित्र जब क्लास में मिलते तो अपने अनुभव share करते हुए बताते थे  कि इस रैगिंग से कभी कभी इतने परेशान हो जाते है कि पढाई छोड़ कर घर वापस लौट जाने का मन करता है |

इन सब बातों को सुन कर मैं डर  जाया करता और फिर अपने मन को समझाता  कि चलो अभी रांची से हीआना जाना किया जाए और  कुछ दिनों के बाद  जब स्थिति सामान्य होगी तो फिर हॉस्टल में शिफ्ट कर जाऊंगा |

नियमतः रोज रैगिंग लेने वाले सिनिअर्स पहले हॉस्टल के कॉमन रूम में सभी को खड़ा कर लोगों का attendence लेते थे ताकि कोई चालाकी दिखा कर  रैगिंग से छुट ना जाए  |

लेकिन संजोग से रोज़  मैं ही वहाँ अनुपस्थित रहता था क्योकि मैं तो रोज अपने घर से ही आना जाना करता था |

एक दिन की बात है कि शाम के करीब चार बजे हमलोगों का क्लास समाप्त हुआ | मैं दोस्तों के साथ क्लास से बाहर निकला और मेरे सारे दोस्त हॉस्टल की ओर मुड गए और मैं बस पकड़ने के लिए कॉलेज के गेट की ओर जा रहा था तभी कुछ सीनियर्स हमें अकेला देख कर घेर लिए और पूछने लगे….तुम रात में रैगिंग से अनुपस्थित क्यों रहते हो ?

मैं उनलोगों के बीच अपने को  अकेला पाकर  घबरा गया और धीरे से बोला … बॉस, मैं जल्द ही हॉस्टल में शिफ्ट कर जाऊंगा और फिर रैगिंग क्लास में उपस्थित रहूँगा |

तभी सभी सीनियर लोग आपस में बोलने लगे | इसके क्लास के सभी मुर्गों का रैगिंग हो रहा है और यह महाशय ठाठ से लोगों को कहते फिरता है कि मेरा कौन रैगिंग ले सकता है, मैं तो यहाँ का लोकल हूँ | इसके घमंड को समाप्त करना होगा |

उनमे से एक बॉस के कहा… इसे अभी हॉस्टल में ले चलो, बहुत मुश्किल से आज  पकड़ में आया है |

और इस तरह वे सीनियर्स मिलकर मुझे  हॉस्टल में ले गए और ना चाहते हुए भी उनके साथ जाना पड़ा |

मैं उनलोगों के रैगिंग का विरोध कर रहा था | इससे वे लोग क्रोधित हो गए | तभी उनलोगों में से एक बॉस ने अपने रूम से दाढ़ी बनाने वाला रेजर ले आये और अचानक मेरी मूँछ पर रख कर मुझे डराना चाहा |

 और इसी नोक – झोक में मेरी आधी मूँछ कट गई |

मेरी नई नई मूँछ निकली थी जिसे  मैं बहुत पसंद करता था | अपने मूंछ से अपना रूतबा महसूस करता था | इस मूंछ को संभाल कर रखता था क्योंकि यह मेरे जवान होने की निशानी थी |

गाहे बगाहे जब कभी मेरे हाथ मूँछ पर जाती तो मुझे अपने चेहरा रोबदार होने का एहसास होता |

अब तो मेरी मूंछ आधी कट चुकी थी | उस समय देख भी नहीं सकता था कि अब मेरा मुखड़ा कैसा लग रहा है |

क्योकि उस ज़माने में मोबाइल नहीं हुआ करते थे कि उसके कैमरे को ऑन करके अपना आधी कटी मूछों वाला चेहरा देख कर अनुमान लगा सकूँ |

मुझे बहुत जोर का गुस्सा आ रहा था , लेकिन क्या करता …

वहाँ खड़े सभी सीनियर्स मेरे  आधी कटी मूंछ वाले चेहरे को देख कर हँस रहे थे |

मैं अपने गुस्से को किसी तरह काबू में किया, क्योकि मुझे इन्ही बॉस लोगों के बीच रह कर पढाई करनी थी |

मैं पॉकेट से रुमाल निकाला और अपने मुखड़े के आधी मूंछ को ढकते हुए चुप चाप वहाँ से खिसक लिया |

मैं कॉलेज गेट पर पहुँचा तो वहाँ खड़ी बस मिल गयी और मैं चुप चाप उस बस में बैठ गया |

मैं पुरे रास्ते सोच रहा था कि घर में कैसे बताऊंगा कि मेरी आधी मूंछ काट दी गई है |

मैं मुखड़े पर रुमाल रखे हुए ही घर में पहुँचा |

मेरी भाभी जी ने जैसे ही दरवाज़ा खोला | मेरे चेहरे को रुमाल से ढका देख वो चिंतित होते हुए पूछा …अरे विजय,  मुँह में चोट लगी है क्या. यह कैसे हुआ ?

मैं कुछ बोलने ही वाला था कि उन्होंने मेरे मुँह से रुमाल हटा दिया |

मेरे आधी कट चुकी मूंछ को देख कर अचानक वो जोर जोर से हंसने लगी | वह लगातार हँसे जा रही थी और मैं खिसियानी बिल्ली की तरह हंसने में उनका साथ दे रहा था |

फिर ज़ल्दी से आईने के सामने जाकर खड़ा हो गया ताकि मैं भी अपने मुखड़े को देख सकूँ |

मुझे भी अपने चेहरे को देख कर अचानक हँसी आ गई और हम दोनों देर तक हँसते रहे |

अगर उस समय मोबाइल का ज़माना होता तो  सेल्फी ज़रूर लेता और आज उसका इस्तेमाल करता | 

और कोई ऐसी सूरत न देख ले इसलिए तुरंत ही  घर में पड़े रेजर से बाकि बचे आधी मूँछ भी काट डाली |

उसी समय मेरा भांजा जो मेरी हम उम्र था , बाज़ार से सब्जी लेकर घर में घुसा और उसकी नज़र मेरी ओर अचानक पड़ी |

उसने तो पहचाना ही नहीं और मेरे पास से होते हुए आगे रसोई घर की ओर बढ़ गया |

तभी मैंने उसे आवाज़  लगाईं तो उसने चौक कर मुझे गौर से देखा और फिर उसका मूंह खुला का खुला रहा गया |

..उसके मुँह से बस यही निकला …यह क्या किया मामा जी ?.

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Merry Christmas

दोस्तों,

दुनियाभर में हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन क्या बच्चे और क्या बड़े सभी को अपने सेंटा क्लॉस (Santa Claus) से तोहफे मिलने का इंतजार बना रहता है।

वही शांता, सफ़ेद लम्बी ढाढ़ी वाले बाबा जो  लाला पोषक पहने आते है और बच्चो को तोहफे देकर जाते है | बच्चे जिंगल बेल ..जिंगल बेल ख़ुशी ख़ुशी गाते है और इस  त्योहार को ईसा मसीह के जन्म की खुशी में मनाते है ।

लोग इस दिन एक दूसरे को उपहार देने के साथ खूबसूरत बधाई संदेश भी भेजते हैं । हमलोग सोशल मीडिया के द्वारा शुभकामना संदेश और रंग बिरंगी कार्ड्स भेजते है । 

कल २५ दिसम्बर बस आने ही वाला है और हम लोग इस अवसर पर दोस्तों और रिश्तेदारों को अलग अलग तरीके से “Merry Christmas” की शुभकामना का सन्देश भेजने की तैयारी कर रहे  है |

आज सुबह सुबह मेरी छः साल की पोती ने एक कागज़ में कुछ लिखा, उसे एक लिफाफे में बंद किया और  मुझे दिखा कर कहा … मैं सांता क्लॉस से अपनी इच्छा के तोहफे के बारे में इस पेपर पर लिख दिया है लेकिन यह secret है, किसी को भी नहीं दिखाउंगी |

इसे तकिये के नीचे रख कर आज रात को सो जाऊँगी तो रात में सांता आएगा और मेरे कागज़ में लिखे गिफ्ट को मेरे सिरहाने रख कर चला जायेगा, क्योकि कल merry Christmas है |

मैं Christmas tree को  सजाऊँगी | उसने एक पेपर पर सुन्दर सांता क्लॉस का चित्र भी बना कर दिखाया |

सचमुच बच्चे को इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है | सांता को बच्चे अपना बेस्ट फ्रेंड जो मानते है |

अचानक मेरी पोती ने मुझे सांता की कहानी सुनाने की जिद की और मुझे उसे कहानी सुनानी ही पड़ी | तो आइये आप भी जानिए कि यह “सांता क्लॉस”  कौन है ..

तीसरी शताब्दी में जन्मे सर निकोलस को सांता क्लॉस के नाम से जाना जाता है |

ऐसा माना  जाता है कि सर निकोलस का जन्म  तुर्की में २८० ई में हुआ था | ये  एक इसाई बिशप थे | निकोलस एक ऐसे परिवार से थे जो हमेशा ज़रूरतमंदो की मदद किया करते थे  |

उन्हें अपनी धार्मिकता और दया के लिए जाना जाता था | सांता की लाल पोषक और हंसमुख लम्बी दाढ़ी वाली छवि को बना कर कार्टून और कहानियों में प्रकाशित होने लगी जो बच्चो को खास भाने  लगी |

और इस तरह से सांता का रूप सबके सामने आया | हमलोगों के मन में भी यह बात आती है कि क्यों सांता हमारे  बच्चो की विश पूरा करने और उनके जुराबों में गिफ्ट भरने आते है |

इसके पीछे भी एक कहानी है जो निकोलस का लोगों के प्रति सेवा भाव  को दर्शाती है |

इस कहानी के अनुसार एक गरीब व्यक्ति था जिसके पास अपनी तीन बेटियों की शादी के लिए धन नहीं था इसलिए वह उन्हें मजबूरन देह व्यापार में धकेल रहा था |

यह देख कर निकोलस को उन लड़कियों पर दया आ गई और उसने  घर के बाहर उन लड़कियों के सुख रही जुराबों में चुपके से सोने के सिक्के रख दिए  और इस तरह उन्होंने अपनी उदारता का परिचय दिया |

इस कहानी से प्रेरणा लेकर बच्चे  क्रिसमस की रात में  अपनी जुराब और थैली को अपने छतों पर लटकाते है ताकि सांता उनके लिए उनमे गिफ्ट रख सके |

इस तरह आज बच्चो के बीच  हँसता हुआ सफ़ेद दाढ़ी वाला सांता क्लॉज़ बहुत लोकप्रिय है |

इस अवसर पर देश और धर्म के बंधन से ऊपर उठ कर दुनिया के सभी लोग सुख और शांति की कामना करते है | सबलोग मिल जुल कर इस पर्व को मनाते  है और एक दुसरे को  Merry Christmas बोलते है ..

क्रिसमस के शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं …Merry Christmas in advance……

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मेरी पहली विदेश यात्रा …4

source: Google.com

तीसरा दिन

चार दिनों के टूर पैकेज का दो दिन तो फुल मौज मस्ती में निकल गया | सचमुच हमलोग खूब मस्ती कर रहे थे |

दिन भर  के थका देने वाले कार्यक्रम के बाद तीसरे दिन सुबह देर तक सो रहा था, तभी  दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी |

मैं अलसाए हुए बिस्तर से उठा और दरवाज़ा खोला तो सामने मेरे एक मित्र थे | मुझे देखते ही कहा ….अभी तक आपलोग सो रहे हो ? हमलोगों की  टूरिस्ट बस आ चुकी है |

आप लोग ज़ल्दी से तैयार होकर  नास्ता हेतु रेस्टोरेंट में आ जाओ ताकि समय पर हमलोग घुमने निकल सकें |

उसके जाने के बाद  हमलोग ज़ल्दी ज़ल्दी स्नान वगैरह …करके निवृत हुए |

मैं कपडे पहन ही रहा था कि मेरे रूम पार्टनर ने बताया कि हमारी आज का टूरिस्ट प्रोग्राम यहाँ के प्रसिद्ध  “बौद्ध – मंदिर” देखने का है |

हमने कही पढ़ा था कि  थाईलैंड की  ९५% की आबादी बौद्ध धर्म को मानती है | इसलिए यहाँ का बौद्ध  मंदिर विजिट  करना तो बहुत ज़रूरी है |

इसलिए आज का कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाया गया था | हमलोग ब्रेकफास्ट लेकर होटल से करीब नौ बजे यात्रा के लिए तैयार हो कर निकल गए …मंदिर दर्शन को |

सोचा कि यहाँ की हसीनाओं की सुन्दरता तो  बहुत निहार ली,  अब थोडा भगवान् भक्ति में भी समय बिताया जाए |

हमलोगों   “टेम्पल  ऑफ़ गोल्डन बुद्ध” के नाम से प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन करने पहुँच गए | यह मंदिर कुछ ऊंचाई  पर बनाया गया था |

सीढियाँ चढ़ कर जब ऊपर  मंदिर के प्रांगन में पहुँचे तो वहाँ पर  अजीब सी शांति का आभास हो रहा था |

अंदर मंदिर में घुसते ही सामने भगवान् बुद्ध की विशालकाय  प्रतिमा थी जो पुरे सोने की बनी हुई थी |

यहाँ आकर लगा कि यहाँ के लोग  बहुत धार्मिक भी होते है | हमलोग भगवान् बुद्ध के दर्शन किये और वहाँ के  खुबसूरत प्राकृतिक दृश्य को देख कर मंत्र-मुग्ध हो गए  |

वहाँ करीब एक घंटा बिताने के बाद हमारा  अगला पड़ाव था “फ्लोटिंग मार्किट” घूमना |

मुझे टूरिस्ट गाइड ने बताया कि यह दुनिया का पहला और दर्शनीय  “फ्लोटिंग मार्किट” है |

हमलोग यहाँ पहुँच कर सचमुच आश्चर्य चकित थे | फ्लोटिंग मार्किट देखते ही मन खुश हो गया क्योंकि  यहाँ का नज़ारा बहुत ही खुबसूरत था |

यहाँ पूरा का पूरा मार्किट  पानी पर तैरते नाव पर सजाया गया था जो बड़ा ही खुबसूरत नज़ारा प्रस्तुत कर रहा था |

पटाया घुमने वालों के लिए इस मार्किट को देखना आवश्यक ही बनता था |

हालाँकि कुछ दिनों पूर्व मुझे कोलकाता के पाटोली एरिया में भी इसी concept पर बनाया गया “फ्लोटिंग मार्किट” देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था  |

कोलकाता  का फ्लोटिंग मार्किट भी थाईलैंड के फ्लोटिंग मार्किट की तरह ही बनाया गया था,  लेकिन वहाँ  ज्यादातर सब्जी और फल का मार्किट था, जो पानी में तैरते नाव पर सुसज्जित था |

 हालाँकि  वहाँ का भी दृश्य बहुत खुबसूरत था , लेकिन थाईलैंड के उस मार्किट की बात ही कुछ और थी | यहाँ की भीड़ को देख कर एहसास हुआ कि बहुत सारे पर्यटक इसे देखने आते है |

इस तरह सारा दिन घूम – घूम कर इन जगहों का मज़ा लेते रहे और शाम होते ही हमलोग होटल आ गए | यहाँ पर दो घंटा आराम करने के बाद फिर अपने आप को तरो ताज़ा कर लिया |

क्योंकि आज शाम को एक और  खुबसूरत जगह विजिट करने का कार्यक्रम था |

जी हाँ आज रात नौ बजे से  “अल्काजार कैबरे शो” देखने का कार्यक्रम था | इस कैबरे शो के बारे में बहुत सुन रखा था |  हमलोग वहाँ  समय से एक घंटा पहले ही पहुँच गए |

इसकी सबसे ख़ास बात लगी कि यह लेडी बॉय डांस शो था, जिसे हमलोग की भाषा में  “लौंडा – डांस” भी कहते है | हमारा शो रात के 9.30  से शुरू होने वाला था  |

अभी आधा घंटा समय बाकी होने की वजह से हमलोग, वहाँ  के नज़ारे का लुफ्त उठाने लगे  |

बहुत लोग इन डांसर के साथ फोटो भी खिचवा रहे थे | यहाँ फोटो खिचवाने के भी पैसे देने पड़ते थे |

खैर जब इनका डांस शो  शुरू हुआ तो सचमुच बहुत अच्छा लगा | मैं तो यह देख कर  दंग रह  गया कि यहाँ के कलाकार  थाई कैबरे डांस को हमारे भोजपुरी गाने की धुन पर प्रस्तुत कर रहे थे |  भोजपुरी भाषा इन्हें आती है या नहीं, मुझे नहीं पता,  परन्तु इनका नृत्य बहुत ही अच्छा था |

आप भी इस “अक्लाजार कैबरे शो” का लुफ्त उठा सकते है, link नीचे दिया हुआ है ….

https:||youtu.be|1sIfzdbTKBQ

इस तरह टूर का  तीसरा  दिन समाप्त हो गया  |

चौथा दिन

सुबह ज़ल्दी उठाना पड़ा क्योकि आज यहाँ से बैंकाक शिफ्ट होना था |

हमलोग ब्रेकफास्ट लेकर बैंकाक  के लिए सुबह करीब 9.00 बजे निकल गए | यहाँ होटल में शिफ्ट होते ही सबसे पहले लंच करना था क्योकि भूख लग  रही थी | यहाँ खाना खाने के लिए भारतीय रेस्टुरेंट में जाना था जो थोड़े दूर में ही स्थित था |

हमलोग तैयार होकर पहुँच गए इंडियन होटल में | वहाँ का खाना काफी स्वादिस्ट था | ऐसा लगा जैसे हमलोग इंडिया में ही किसी होटल में खाना खा रहे है |

खाना खाने के बाद तीन घंटे का समय शौपिंग  के लिए रखा गया था | क्योकि रात में नाना प्लाजा घुमने का कार्यक्रम था |

हमलोग टहलते हुए थोड़ी दूर पर स्थित MBK center Mall में पहुँच गए | बहुत ही बड़ा मॉल था और हमलोग अलग अलग ज़रुरत के हिसाब से खरीदारी करने लगे |

मुझे टूरिस्ट गाइड ने बताया था कि यहाँ बहुत मोल -तोल (bargain) होता है और सामान भी डुप्लीकेट मिलता है, इसलिए कोई भी सामान खरीदने से पहले खूब अच्छे से मोल – तोल करना है |

मैं घूमते हुए एक “इलेक्ट्रॉनिक शॉप” में घुस गया | वहाँ पर दूकानदार ने एक एप्पल का मोबाइल दिखाया जिसका कीमत २०,००० रूपये बताया | उसने यह भी कहा कि यह डुप्लीकेट है और इसका ओरिजिनल कीमत ८०,००० रूपये है |

उसने उसे ऑपरेट करके भी दिखाया  | बिलकुल ओरिजिनल एप्पल का मोबाइल लग रहा था | मुझे लगा कि यह लोगों को दिखलाने के ख्याल से लिया जा सकता है,  यह चलता भी ठीक है और दीखता भी ठीक है | मैं उससे मोल जोल करने लगा | अंत में उसने मात्र २५०० रूपये में देने को तैयार हो गया |

मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि इतनी भी bargaining हो सकती है | मैं जोश में आकर पैसे दिए और मोबाइल की खरीदारी कर ली | उसके बाद उस मोबाइल का क्या हश्र हुआ यह नहीं पूछे तो अच्छा होगा |

वैसे तो और भी कुछ आइटम खरीदने की इच्छा  हो रही थी, लेकिन डुप्लीकेट माल होने की वज़ह से और कुछ भी खरीदारी करने की मेरी हिम्मत नहीं हुई  |

करीब  पाँच बजे हमलोग होटल आ गए और एक घंटा आराम करने के बाद फिर रात में यहाँ की रंगिनिया देखने को “नैना प्लाजा” चल दिया |

वहाँ का भी नज़ारा बिलकुल “वाल्किंग स्ट्रीट” जैसा ही था | यहाँ आकर मैंने देखा कि पश्चिमी सभ्यता के नाम पर लोगों ने कितनी आज़ादी ले रखी है कि शर्म – लाज जैसे बातें  यहाँ बेमानी लगती है  |

यहाँ चाहे लड़की हो या लड़का सबों ने पेट की भूख मिटाने  के लिए किस हद तक अपने को नंगा कर रखा है | मुझे बहुत कुछ यहाँ  अनुभव कराता चौथा और अंतिम दिन भी बीत गया |

हालाँकि इसके अलावा भी बहुत जगह ऐसे थे जहाँ समय के अभाव के कारण घुमने का मौका नहीं मिल सका | लेकिन भविष्य में कभी मौका मिला तो एक बार फिर विजिट  करूँगा , बाकी जगहों को देखने के लिए |

उसके बाद कहने को और ज्यादा कुछ नहीं है दोस्तों,  

हाँ, जितने थाई करेंसी मेरे पॉकेट में बच गए थे , उससे मैंने वहाँ से विदेशी शराब खरीद ली, अपने देश के दोस्तों के लिए ….

यह सही है कि टूरिज्म एक बड़ी इंडस्ट्री है इसके तहत बिलकुल व्यवस्थित ढंग से  हमलोग को विदेशो में घुमने का मौका मिलता है | चूँकि यह पैकेज टूर था  इसलिए हमलोग को किसी बात की चिंता करने की ज़रुरत नहीं  पड़ी ..बल्कि सिर्फ घूमना और मौज मस्ती ही करना था |

मेरी यह पहली विदेश यात्रा  के लिए मैं अपने बैंक को धन्यवाद देना चाहूँगा कि उसने हमें रोज़ के उबाऊ दिनचर्या से से हट कर कुछ दिनों के लिए विश्राम और मौज मस्ती करने का अवसर दिया |

उससे ना केवल मेरी थकान दूर हुई बल्कि और तरोताज़ा होकर बैंक के लिए और अधिक लगन से कम करने को प्रेरित हुए |

थाईलैंड अपने नाईट – लाइफ और खास कर थाई मसाज़ के लिए जाना जाता है | वैसे और भी बहुत घुमने की जगहे है जिसका लुफ्त उठा सकते है | अगर कभी मौका मिले तो …. एक बार ज़रूर इसका मज़ा लेना चाहिए |

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मेरी पहली विदेश यात्रा …3

source: Google.com

सुबह पांच बजे मैं बिस्तर छोड़ दिया | रात में नींद पूरी नहीं होने के कारण उस समय मेरी आँखे भारी  लग रही थी | शरीर  में भी थकावट का अनुभव कर रहा था |

मैं अपनी थकान को कम करने के लिए, वही कमरे के फर्श पर बैठ कर योगा करने लगा |

मेरे भ्रामरी प्राणायाम की आवाज़ सुनकर मेरे रूम पार्टनर की नींद खुल गई और उसने मुझे देखते हुए कहा शिकायत भरे लहजे में कहा …आप तो मुझे सोने ही नहीं दोगे |

 अब मैं उसको क्या कहता,  बस मैं अपने गुस्से को पी गया और  वहाँ से उठ कर चुप चाप स्नान करने चला गया | जब मैं स्नान कर वापस आया तब तक उसके तेवर बदल चुके थे |

 उसने मेरा हाँथ पकड़ते हुए कहा …आई ऍम सॉरी बॉस | मैं जानता हूँ कि मेरी नाक बहुत आवाज़ करती है | शायद रात को इस वजह से आपको परेशानी हुई होगी | लेकिन मुझे माफ़ कर दो , मेरी तो यह बिमारी है |

उसकी बातों को सुन कर मेरा गुस्सा शांत हो गया और हमलोग ज़ल्दी ज़ल्दी तैयार होने लगे क्योकि ब्रेकफास्ट लेने के बाद  नौ बजे ही पटाया बिच के लिए रवाना होना था |

होटल तो शानदार  था ही , उसका रेस्टोरेंट भी लाजवाब था | यहाँ ज्यादातर “नॉन वेज” आइटम ही थे | लेकिन मैं हमेशा ऐसे मौकों पर “वेज” आइटम ही पसंद करता  हूँ | इसलिए मैंने प्लेट में फ्रूट्स ले लिया तभी मेरी नज़र वहाँ बना रहे गरमा गरम ढोसे पर पड़ी |

फिर क्या था , हमने ढोसा का मज़ा लिया और कॉफ़ी पीया | आज का कार्यक्रम “कोरल आइलैंड” घुमने का था , इसलिए हमलोग तैयार होकर पटाया बिच आ गए | बहुत ही खुबसूरत जगह थी , बहुत मज़ा आ रहा था |

यहाँ से हमलोगों ने मोटरबोट लीं और कोरल आइलैंड  के लिए रवाना  हो गए  |

समुद्र में मोटरबोट से सफ़र करने का मेरा पहला मौका था | मोटर बोट काफी स्पीड में  पानी पर तैर रहा था | मुझे तो शुरू में थोडा डर लग रहा था लेकिन फिर खूब मज़ा आने  लगा  , बिलकुल adventurous drive था वह |

लगभग बीस मिनट के समुद्री सफ़र कर हमलोग कोरल आइलैंड पर पहुँच गए | मैंने सुन रखा था कि यह पटाया का सबसे बड़ा और खुबसूरत आइलैंड है |

सचमुच, बहुत खुबसूरत नज़ारा था | यहाँ का पानी बिलकुल साफ़ और नीला था,  बिलकुल नीचे सतह देख सकते थे |

बिच में मौज मस्ती करते हुए  बहुत से विदेशी टूरिस्ट भी थे |

सचमुच नीला समंदर का पानी और नीला आसमान एक जगह हो तो इससे बढ़ कर और  कोई दूसरी खुबसूरत चीज़ नहीं हो सकती थी …यहाँ प्रकृति का अद्भुत नज़ारा सामने था

वहीँ, दूसरी तरफ जंगल  और पहाड़ का अद्भुत दृश्य दिखाई पद रहा था | बड़ा ही प्यारा और मनोरम दृश्य था | हालाँकि थोड़ी हलकी गर्मी भी थी लेकिन यहाँ के जीवंत वातावरण को देख कर दिल को बहुत सुकुन लग रहा था |

समुद्र का पानी इतना साफ़ था कि हमलोग तुरंत ही डुबकी लगाने से अपने को रोक नहीं सके |

सभी दोस्तों के साथ पानी में खूब मौज मस्ती कर रहे थे और फोटो भी खीचा रहे थे | तभी हमलोगों की इच्छा हुई कि बोटिंग का भी मज़ा लिया जाए |  

यहाँ तरह तरह के “वाटर राइड्स” करते लोगों के चेहरे पर ख़ुशी झलक रही थी |

हमलोगों ने भी “बनाना राइड्स” का मज़ा लिया |

यहाँ खाने के लिए तरह तरह के “सी – फ़ूड” भी मिल रहे थे | हमलोगों को भूख भी लग रही थी | यहाँ नारियल पानी और सी फ़ूड का मज़ा लेने लगे |

 यहाँ का नारियल पानी का स्वाद कुछ अलग तरह का था, लेकिन उसका मलाई खाने में बड़ा  मज़ा आया | दिन भर कैसे निकल गए, पता ही नहीं चला |

हमलोग शाम को “कोरल आइलैंड” से वापस अपने होटल आ गए | होटल में आ कर फिर साफ़ पानी से स्नान किया | समुद्र बिच में गोता लगाने के बाद टैप वाटर से नहाना  ज़रूरी हो गया था |

रात में यहाँ के “वाल्किंग स्ट्रीट” घुमने का प्रोग्राम था |

सुना था कि यहाँ की मदमस्त और चकाचौंध भरी  रात सारे  विश्व में मशहूर है |  

रात भर इस स्ट्रीट पर लोग तरह तरह से लुफ्त उठाते है |

वैसे हमलोग का होटल वाल्किंग स्ट्रीट के पास ही था |  हमलोग बन ठन  कर रात में घुमने निकल पड़े |

मैंने जो वहाँ देखा उसका वर्णन यहाँ नहीं कर सकता  | ऐसा लगा जैसे हम एक अलग  दुनिया में ही आ गए हों |  यहाँ संगीत की धुन पर थिरकते लोग |

चारो तरफ रौशनी की चकाचौंध और यहाँ लाइन से खड़ी  अप्सराएं मसाज़ करने के लिए ग्राहक को मुस्कुरा कर लुभाने का प्रयास कर रही थी |

यहाँ साथ शराब पीने पिलाने के लिए भी भाड़े पर लड़कियां  मिल रही थी |

 इसे adult स्ट्रीट कहना गलत नहीं होगा | यहाँ की दुनिया कुछ अलग ही थी  | आधुनिकता के नाम पर खुले बदन, और लड़कियां हाथों में सिगरेट लेकर ऐसा कश  लगाती दिखी कि मर्द  भी इनके सामने फेल है |

रात भर मौज मस्ती करते लोग,  संगीत और रौशनी से नहाया यह वाल्किंग स्ट्रीट,  इसकी  चकाचौंध एक  अलग ही नज़ारा प्रस्तुत कर रहा था |  मेरा इस तरह का बिलकुल नया ही अनुभव हो  रहा था |

आज टूर का पहला दिन बहुत से नए और अजीब अनुभव कराता गुजर गया |

दुसरे दिन सुबह थकान के कारण कुछ देर से उठा | तभी  गाइड ने  आकर हम सबों को खबर किया कि गाड़ी आ गई है और जल्द तैयार होकर सबलोग नीचे आ जाएँ | आज हमलोग को  पारा सेल्लिंग और सी वाल्किंग (sea walking) के लिए जाना है |

मैं कभी पैरा – सेल्लिंग नहीं किया था, इसलिए उसका अनुभन करना ज़रूरी था |

हमलोग मोटरबोट की मदद से उस जगह पर पहुँच गए | सचमुच काफी adventurous स्पोर्ट्स था | सभी लोग इस साहसिक स्पोर्ट्स “पैरा – ग्लाइडिंग” का मज़ा ले रहे थे |

 मुझे शुरू में बहुत डर  लग रहा था, हालाँकि  सेफ्टी का पूरा ख्याल रखा गया था | काफी कौतुहल हो रही थी |  पैरा सेल्लिंग कर के मुझे बहुत मज़ा आया |

मैं वहाँ कॉफ़ी पी पी रहा था  तभी  दूसरी तरफ  सी वाल्किंग (sea walking )  का मजा देते हुए लोग दिख रहे थे |

बिलकुल समुद्र के अन्दर उसके सतह पर पैदल चलने का अनुभव भी अलग होता होगा |

ऐसा सोच कर हमलोग भी “सी वाल्किंग “ sea walking का मज़ा लेने का मन बना लिया |

हमलोगों को  हेलमेट टाइप का कॉस्टयूम (costume) पहना दिया जिससे पानी के अन्दर भी ऑक्सीजन मिलता रहे | दस लोगों के ग्रुप में हमलोगों को समुद्र के अन्दर ले जाया गया , साथ में ट्रेनर भी था |

हमलोग जब समुद्र के सतह पर पहुंचे तो बहुत से जलिए जीव को देख कर मन रोमांचित हो गया | ट्रेनर ने मछली के खाने के दाने बिखेर दिया,  तभी बहुत सारी  खुबसूरत समुद्री मछलियाँ हमलोगों के आस पास आ गई |

हमलोग उसे छू भी सकते थे | बड़ा ही रोमांचित कर देने वाला क्षण था | तभी  हमारा एक दोस्त मकड़ी की तरह की कोई जीव को छू दिया , तभी वो समुद्री जीव उस पर हमला कर दिया और उसके नाक के पास से खून निकलने लगा |

बहुत मुश्किल से उस जीव को शरीर  से अलग किया गया और हमलोगों को तुरंत पानी से बाहर निकाल दिया गया |

दरअसल, समुद्री जीव को सिर्फ देखना था उसे छेड़ने की मनाही थी ,लेकिन हमलोग कभी कभी ज्यादा ही रोमांचित हो जाते है और दुर्घटना का शिकार हो जाते है |

हमलोग का दूसरा  दिन इस तरह से  बीत गया , सच पूछिये तो वहाँ से आने की इच्छा ही नहीं हो रही थी | “सी वाल्किंग” में मेरे दोस्त के साथ दुर्घटना के कारण पूरा मज़ा नहीं ले सका  और पटाया का समुद्र का रोमांच भरा यात्रा यही समाप्त हो गया |

अगला कार्यक्रम था …आज रात में  टिफ़नी कैबरे “ tiffany cabaret” शो देखने का |

हमलोग ठीक नौ बजे उस थिएटर में थे और 9.३० रात  में शो शुरू हो गया | इसमें तरह तरह के नृत्य के द्वारा थाईलैंड की संस्कृति और कल्चर की झलक देखने को मिल रही थी | ..यहाँ की लोकल ग्रुप डांस बहुत ही अच्छा लगा | यह भी एक अलग तरह का अनुभव था | सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यहाँ थाईलैंड में हिंदी गाना पर इन्होने अपनी संस्कृति का समावेश कर बहुत अच्छे तरह से डांस प्रस्तुत किया | इस कैबरे डांस का मजा आप भी ज़रूर लीजिये , इसका link नीचे दिया गया है …

रात के करीब ग्यारह बजे होटल वापस आ गए |  वहाँ कुछ दोस्त लोग होटल में स्थित  बार में दारु का मजा ले रहे थे | वहाँ संगीत भी  चल रहा था  और लोग शराब पीने के बाद डांस के लिए बने स्टेज पर डांस भी कर रहे थे | रंग बिरंगी रौशनी और संगीत के साथ डांस दोस्तों के साथ करने का एक अलग ही मज़ा है |

मैं भी दो पैग ले लिया और फिर डांस में शरीक हो गया | हमलोग जम कर एक घंटे तक  डांस करते  रहे  |

मेरे  डांस को देख कर हमारे साथी आश्चर्य चकित हो  रहे थे | इतना शांत रहने वाला इंसान  आज दारू पीने के बाद अन्दर के टैलेंट को बाहर निकाल रहा था | सचमुच बहुत दिनों के बाद अपनी पुरानी  शौक को पूरा करने का मौका मिल रहा था |

इस तरह मैं थक कर चूर हो चूका था और फिर रात के बारह बजे हमलोगों ने डिनर लिया |

रात को मैं कमरे में आराम से सो गया | आज मुझे रूम पार्टर की नाक की आवाज़ भी मेरी नींद को डिस्टर्ब नहीं कर सका | सचमुच कभी कभी दारु बड़े काम की चीज़ साबित होती है ….(क्रमशः )

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