हर ब्लॉग कुछ कहता है -14

बुढ़ापा अभिशाप नहीं

दोस्तों,

आज सुबह जब उठा तो मौसम का मिजाज़ कुछ बिगड़ा हुआ पाया | लेकिन मोर्निंग वाक तो जाना ही था सो मैंने ठण्ड से बचने के लिए पर्याप्त कपडे पहने और जैकेट के पॉकेट में हाथ डाल कर  निकल गया पार्क की ओर |

हलकी हलकी धुप थी लेकिन साथ ही ठंडी हवा भी चल रही थी | मैं कान में हेड फ़ोन लगा कर टहलते हुए हनुमान चालीसा  सुन रहा था तभी मेरे मोबाइल में एक कॉल आया और हनुमान चालीसा बजना बंद हो गया |

मैं पॉकेट से अपना मोबाइल निकाल कर देखा तो मिश्रा जी का फोन था |

मैंने जैसे ही फ़ोन उठाया तो मिश्राजी की आवाज़ आयी….हैप्पी न्यू इयर वर्मा जी | आप कैसे है ?

सेम टू यू मिश्रा जी | इतने दिनों के बाद आपका फ़ोन आया | आजकल आप कहाँ है ? और आपका स्वास्थ  कैसा है ?.. मैंने उत्सुकता से पूछा |

मिश्राजी ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया… मैं अभी डेल्ही में हूँ अपने बेटे के पास | उनकी आवाज़ कुछ उदास सी लग रही थी |

हमेशा खुशमिजाज़ रहने वाले रमेश मिश्रा जी की आवाज़ आज दुःख भरी लग रही थी |

अभी तीन  साल पहले ही एक साथ हम दोनों बैंक की नौकरी से रिटायर (retire) हुए थे | मैं पटना छोड़ कर कोलकाता आ गया और मिश्रा जी पटना छोड़ कर डेल्ही अपने बेटे के पास चले गए |

मैं कुछ आशंका जताते हुए प्रश्न किया …आप की आवाज़ में आज वो खनक नहीं महसूस  हो रही है जो हमेशा से आप से बात करते हुए महसूस होती है |

आप ठीक अनुमान लगा रहे है | इन दिनों मेरी तबियत ठीक नहीं चल रही है | हमारा ब्लड प्रेशर हाई रहता है और ब्लड सुगर भी ऊपर नीचे होता रहता है …मिश्रा जी ने उदास स्वर में कहा |  

 लेकिन आप तो अपने स्वास्थ पर हमेशा से ध्यान रखते थे फिर कैसे रोग के चक्कर में पड़ गए ?

मिश्राजी लम्बी साँसे खीचते हुए अपनी राम कहानी बताने लगे |

अब आप से क्या छिपाना वर्मा जी | मैंने सोचा था कि रिटायर होकर आराम की ज़िन्दगी जिऊंगा | ऑफिस के काम के टेंशन से दूर अपने शौक मौज को फिर से जिंदा करूँगा |

देश दुनिया का भ्रमण करूँगा |

 लेकिन ऐसा कुछ नहीं कर पा रहा हूँ | हम सब सोचते बहुत कुछ है, लेकिन होता वही है जो मंजूरे खुदा  होता है |

बेटे के साथ रहना अब मज़बूरी हो गई है | उसके एक साल के बच्चे को संभालना पड़ता है क्योंकि बेटा – बहु दोनों नौकरी में है

पत्नी का दुःख देखा नहीं जाता है | उनके घुटने के दर्द के बाबजूद सुबह जल्दी उठ कर बेटे बहु के लिए नास्ता और टिफ़िन तैयार करना पड़ता है |

मुझे भी कुछ काम सौप दिया गया है |

यहाँ नया जगह होने के कारण, ना कोई अपना रिश्तेदार है और न कोई दोस्त |

अकेले मन बहुत घबड़ाता है, और चिंता फिकर होने से तरह तरह के शारीरिक विकार उत्पन्न होने लगे है | इतना सब कहते कहते मिश्राजी रो पड़े | फ़ोन पर उनकी सिसकियाँ सुनाई पड़ रही थी |

मैं उनके दुःख भरी बात को सुन कर उदास हो गया | फिर उन्हें समझाते हुए कहा….क्या मिश्राजी,  आप तो बच्चों की तरह रो रहे है | आज साल का पहला दिन है, आज खुश रहेंगे हो सालों  भर खुश रहेंगे |

आपको याद है ना.. मैं हर साल के पहला दिन को  बैंक में रसगुल्ला  मंगा कर सब को खिलाता था  ताकि सालों भर हमलोग के सम्बन्ध मधुर रहे |

मिश्राजी अपने को सँभालते हुए कहा … आप ठीक कहते है | मुझे वो पहले वाले दिनों की याद आ रही है, जब हमलोगों के दिन हँसते गाते और  ख़ुशी मनाते  बीतते थे |

आज तो एक एक पल काटना मुश्किल लग रहा है | जैसे मुझे किसी ने कैद खाने में लाकर बंद कर दिया है |

मिश्राजी  की बातें सुन कर मेरा भी जी भर आया | मैं उन्हें हिम्मत बंधाते हुए कहा…आप तो खुद ही समझदार है | अगर अभी बी पी,  सुगर और थाइरोइड से ग्रसित हो जायेंगे तो ज़िन्दगी का सुख कैसे भोग पाएंगे |

और आप को तो पता ही है कि अगर आप खाट  पकड़ लिए तो किसी के पास आप को पानी पिलाने के लिए भी टाइम नहीं है |

जिस बाल बच्चे को पालने के लिए न जाने कितने शौक मौज का त्याग किया होगा लेकिन आज आप के लिए किसी के पास समय नहीं है |

बहुत ज्यादा भला वे करेंगे तो आपको  बृद्धा आश्रम छोड़ कर आ जायेंगे  ताकि वहाँ उचित देख भाल हो सके और वे अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति पा सकें |

इसलिए आज से अपनी दिनचर्या बदलिए और आज से ही एक पक्का  इरादा कर डालिए … वैसे भी आज साल का पहला दिन है … अपने को खुश रखने के लिए वो सब कुछ कीजिये जो आप को अच्छा लगता है |

यह भूल जाइये कि लोग क्या कहेंगे | खुल कर जीना शुरू कीजिये और सबों को खुश रखने की कोशिश करना छोड़ दीजिये |

आप ठीक कहते है वर्मा जी, अब अपने लिए समय निकालना और अपने लिए जीना शुरू करना ही पड़ेगा | जब तन खुश रहेगा तभी मन भी  खुश रहेगा |

मैं आज क्या, अभी से मोर्निंग वाक शुरू करता हूँ |

अच्छा फ़ोन रखता हूँ वर्मा जी, थैंक यू एंड… हैप्पी न्यू इयर, वन्स अगेन |

दोस्तों, मेरा मानना है कि हमें भी अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए अपने व्यस्त समय में से थोडा समय अपने लिए भी ज़रूर निकालना चाहिए, जिससे कि हमारा तन और मन दोनों खुश रहे | 

बुढ़ापा अभिशाप नहीं है, यह अभिशाप तब बनता है जब हम लापरवाही के कारण बीमारी से घिर जाते है | यह समय है अपने मन का करने का | अपनी इच्छा के अनुसार जीने का

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हर शब्द में अर्थ होता है …

हर अर्थ में तर्क होता है  !

सब कहते हैं हम….

हँसतें बहुत हैं  !

लेकिन हंसने वालों के,

दिल में भी तो दर्द होता है ..

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साल नया और संकल्प पुराना …

 

दोस्तों,

जब मैं  नया साल २०२१ में अपने पुराने संकल्पों के बारे में जांच पड़ताल करता हूँ तो पाता  हूँ कि कुछ ही संकल्पों को मैं प्राप्त कर सका हूँ और बाकी तो अधूरे ही रह गए है …

आज उन सभी संकल्पों पर एक बार फिर से विचार करने का उपयुक्त समय है …और यह भी पता लगाने का समय है कि मेरे बहुत सारे संकल्प क्यों अधूरे रह गए …..आखिर कमी कहाँ रह गई |  .

.अतः बेहतर होगा कि उन सारी  संकल्पों को यहाँ पुनः प्रस्तुत करें और एक -एक संकल्प पर विचार किया जाए .|

साथ ही अपने किए गए  प्रयासों का मूल्यांकन भी किया जाए ताकि उनमे उपयुक्त सुधार  किया जा सके |

, आइये अब अपने संकल्पों की चर्चा करे…

पहला संकल्प 1:  किसी भी तरह के नशे से तौबा करना

यह सही है कि कभी कभी दोस्तों के बीच  ड्रिंक्स ले लेता हूँ | मुझे पता है कि  मेरे उम्र के इस पड़ाव में यह काफी हानिकारक है, इसलिए मैं आज संकल्प लेता हूँ कि कभी शराब को हाँथ नहीं लगाऊंगा | नए साल के celebration में भी शराब को हाँथ नहीं लगाया था |

दूसरा संकल्प :   चाय पीना  कम करेंगे या छोड़ देंगे

पिछले साल में भी यह निश्चय किया था  कि इस साल या तो चाय पीना कम करेंगे या  छोड़ देंगे, पर होता यह है कि जब भी हम इन्हें छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोचते हैं तो उतनी ही गंभीरता से हमें इनकी तलब लग जाती है। उस समय हम अपना संकल्प भूल जाते हैं। सुबह की शुरुआत ही चाय या कॉफी से होती है।

लेकिन इस बार हम असफल नहीं होंगे और इसका पालन करने की कोशिश करेंगे |

तीसरा संकल्प:  मोर्निंग वाक और योगा  नियमित रूप से करेंगे …

वैसे पिछली साल भी मोर्निंग वाक और योगा करते रहे है लेकिन बीच बीच  में किसी कारण वश यह बंद भी हो जाता था | लेकिन इस बार हम संकल्प लेते हैं कि इस नये साल में रोज कम से कम पांच किलोमीटर की सैर और योगा नियमित रूप से करेंगे |

चौथा संकल्प : किसी की बुराई नहीं करेंगे

इस दुनिया में 100 में से 80 लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा दूसरो की बुराई करने में लगे रहते हैं। ऐसे लोग खुद की Value तो कम करते ही हैं साथ में Negativity को भी Attract करते हैं।

इसलिए हमने सोचा है कि बुराई करने की आदत से अपने को बचाएंगे और और अच्छाई की ओर कदम बढ़ाएं।

पांचवा संकल्प :  Social Media  का सिमित उपयोग करेंगे .

सोशल मीडिया के बिना हम एक क्षण भी नहीं रह सकते है | यह लत इतनी बुरी है कि इसका असर हमारे रिश्‍तों पर भी पड़ने लगा है। परिवार में कलह का एक कारण यह भी बन गया है।

आज कई Students फेसबुक पर Online रहते हैं और अपनी पढाई की ओर ध्यान नहीं दे पाते। और फ़ालतू में अपने कई घंटे बर्बाद कर देते हैं। दफ्तर में काम के बीच चैटिंग करने से हम बाज नहीं आते और बॉस की डांट खाते हैं।

हालाँकि सोशल मीडिया आज कल के समय में इतना important है कि इसे पूरी तरह नज़रंदाज़  नहीं किया जा सकत , लेकिन उसके उपयोग को सिमित किया ही जा सकता है, इसलिए अन्य संकल्पों की तरह एक संकल्प लेते है कि सोशल मीडिया पर दो घंटे से ज्यादा समय नहीं बितायेगे /

छठा संकल्प:  अपने गुस्से पर काबू करेंगे, और खुश रहेंगे ..

क्रोध में व्यक्ति हमेशा नुकसान ही करता है। वह चाहे अपना हो या दूसरों का …. यह बात तो जग जाहिर है गुस्सा हमारे लिए कितना खतरनाक है। हमें सुखी जीवन जीने के लिए गुस्सा को त्यागना ही पड़ेगा | इसलिए इस साल  यह भी संकल्प लेते है कि गुस्सा ना अपने आप पर और ना दुसरो पर करेंगे


सातवाँ संकल्प : खुद के लिए समय निकालेंगे

आज की इस भगा दौड़ भरी ज़िन्दगी में हम खुद के लिए थोड़ा सा भी समय नहीं निकाल पाते। हम हमेशा खुद को काम में हमेशा busy रखते हैं। लगातार काम करने से काम का तनाव हम पर हावी हो जाता है। इससे हम ज़िन्दगी तो जीते है पर हम ज़िन्दगी का लुत्फ़ नहीं उठा पाते है ।

इसलिए हम संकल्प लेते है कि अपने घर-परिवार के अलावा खुद के लिए भी समय निकालेंगे। और अपने अधूरे शौक को पूरा करेंगे |

आठवां संकल्प :  फालतू के कामों में अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे

हम अपना अधिकतर  समय बर्बाद करने में रुचि रखते हैं। कोई अपना समय  दोस्तों के साथ बिताने में लगा देता  है तो कोई गप्पे मारने में समय बर्बाद करता है। बहुत कम लोग होते हैं जो इस Time की वैल्यू को समझते है और उसकी क़द्र करते  हैं।

समय की कीमत समझते हुए हम संकल्प लेते हैं कि वो हम अपना सिमित और कीमती समय फालतू कार्यों में लगा कर बर्बाद नहीं करेंगे।

 नौवां संकल्प:   अपने  काम को हमेशा खुश करेंगे

अगर आपको लाइफ में दुःख से दूर रहना है तो  अपना काम खुद करना आपको आना चाहिये। दुसरे पर निर्भर नहीं होना चाहिए |

अपना काम खुद करने में एक अलग ही आनंद आता है और शारीर भी स्वस्थ रहता है /.

इस बात को  ध्‍यान में रखते हुए हम यह भी संकल्प लेते है कि  अपना काम खुद करेंगे


दसवां संकल्प :  ज्ञानवर्धक  पुस्तकों से दोस्ती करेंगे

हम सभी जानते है कि एक सफल और अच्छे इंसान बनने के लिए हमें अपने  ज्ञान (Knowledge) को अपडेट करना और नयी नयी बातें सीखना बहुत ज़रूरी है /

 किसी महान व्यक्ति की जीवनी, किसी बिसनेसमैन की Success Story और किसी फील्ड से Related Information, पढ़ने के लिए किताबें तो हम मंगा तो लेते है पर पढ़ नहीं पाते है /

परन्तु इस बार ऐसा नहीं होगा / हम संकल्प लेते है कि उन सभी किताबों को पढ़ते रहेंगे |

एक संकल्प और :   नियमित रूप से ब्लॉग लिखेंगे और   पेन्टिंग ड्राइंग करेंगे ..

जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि हमने पिछले साल से ही यह blogging शुरू किया है , इस साल इसे continue करते हुए रोज एक या दो ब्लॉग पोस्ट करने की कोशिश करेंगे | इसके अलावा ड्राइंग और  पेन्टिंग जो अब मेरा passion बन गया है , उसके लिए रोज  थोडा समय निकाल कर अपने शौक को जीवित रखेंगे | इसके द्वारा हम अपने दोस्तों के संपर्क में रहते है जिससे अपना मन प्रसन्नचित रहता है |

दोस्तों , इस बार लिए गए संकल्पों की समीक्षा हम बीच बीच में करते रहेंगे, ताकि कितनी प्रतिशत सफलता अर्जित की है उसका पता लग सके …आप कितनी प्रतिशत सफतला का अनुमान लगाते है , हमें अपने कमेंट द्वारा ज़रूर अवगत कराएँगे ..

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मानव सेवा – सच्ची सेवा

हम सब अपनी ज़िन्दगी में सेवा भाव रखते है और किसी न किसी रूप में अपनी सेवा देते है |

चाहे वो पैसा कमाने के बदले अपनी नौकरी के तहत हो या किसी अन्य  क्षेत्र में |

हकीकत में सेवा दो तरह की होती है ..एक वह सेवा जिसमे हम  बदले में कुछ पाने की उम्मीद रखते है | जैसे हम नौकरी या कोई व्यवसाय करते है उससे हमारी जीविका चलती है |

लेकिन इसके विपरीत भी कुछ सेवा ऐसे भी होते है जिसके बदले में कुछ नहीं चाहते है यानी कि निष्काम सेवा, निस्वार्थ सेवा  |

यह जो निष्काम सेवा होता है वह महान सेवा होता है । कोई  भी सेवा छोटी या बड़ी नहीं होती। सेवा करने वाले की भावना और सेवा करते समय उसके चेहरे पर मुस्कुराहट के भाव ही मायने रखती है |

अगर आदमी यह महसूस करे कि उसका जन्म दूसरों की सेवा के लिए ही हुआ है और अगर वह  निःस्वार्थ भाव से सेवा करे तो वह व्यक्ति श्रेष्ट बन जाता है |

अगर, यही भावना समाज के सभी लोगो में आ जाये तो हमारा समाज और सारी दुनिया ही न केवल खुबसूरत हो जाएगी बल्कि सुख शांति से भरपूर भी हो जाएगी |

चूँकि हम सब मानव है इसलिए हम सबों को  मानवता की सेवा के लिए  सदा तत्पर रहना चाहिए |

सेवा की भाषा ही प्रेम की भाषा होती है  और यह भाषा हर कोई  समझ लेता है |

वह चाहे छोटा बच्चा ही क्यों न हो |

किसी भी देश में रहने वाला कोई भी व्यक्ति हो, इस भाषा को समझ लेता है।  आज की दुनिया को इसी भाषा की सबसे ज्यादा ज़रुरत है |

आइये, इस प्रेम की भाषा की क़द्र करें और मन में सबों के लिए प्यार और सेवा भाव रखे, क्योकि

भगवान् वही बसते है जहाँ औरो के लिए सेवा भाव होता है ….

मानव सेवा सच्ची सेवा … जो करे सुख पाए

मन की शांति  मिले …. जन्म सफल हो जाए

भूखे को रोटी खिला …प्यासे को  पिला पानी

उनके आशीर्वाद से तुझको …कभी न होगी हानि  .

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फिर नयी शुरुआत

वर्ल्ड बैंक ने एक इन्सान की औसत आयु 78 वर्ष माना है | उसने यह आकलन किया है जिसके अनुसार औसतन 29 वर्ष सोने में, 3-4 वर्ष शिक्षा में, 10-12 वर्ष रोजगार में, 9-10 वर्ष मनोरंजन में, 15-18 वर्ष­ अन्य रोज़मर्रा के कामों में जैसे खाना पीना, यात्रा, नित्य कर्म, घर के काम इत्यादि में खर्च हो जाते है|

इस तरह हमारे पास अपने सपनो को पूरा करने के लिय्रे मात्र 9 साल ही बचता है | इस तरह से हम पाते है कि हमारा  समय बहुत मूल्यवान है और हमें एक एक क्षण का सही उपयोग करना है …

ज्यादातर लोग यही सोचते है कि ज़िन्दगी काफी लम्बी अतः कुछ करने के लिए जल्दीबाजी क्यों की जाए .. ऐसे लोग बस सोचते रह जाते है | उन्हें अपनी गलती का एहसास तब होता है जब समय मुट्ठी में बंधे रेत  की तरह फिसल जाती है और ज़िन्दगी के अंतिम मुकान पर पहुँचते पहुँचते उनकी मुट्ठी खाली  रह जाती है |

कहने का तात्पर्य कि जब हम  समय की क़द्र करेंगे  तभी समय भी हमारी क़द्र करेगा |

ऐसे ऊपर से देखा जाए तो हमें यह लगता है ७८ साल काफी होते है ज़िन्दगी जीने के लिए और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए |

अगर उसका हम बारीकी से विश्लेषण करते है तो पाते है कि हकीकत में हमारे पास अपने सपनों (Dreams) को पूरा करने व कुछ कर दिखाने के लिए मात्र 3500 दिन अथवा 84,000 घंटे ही होते है |

इसलिए आइये अपनी बची हुई ज़िन्दगी को अपने ढंग से जियें और खुशियों का एहसास करें….

नए  वर्ष की ..नयी सुबह

नयी कलम और नयी डायरी

काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि

सब के दिलों को छू जाऊँ

देखने वालों की.. नज़र बन जाऊँ

सच्चे इंसान की.. जुवां बन जाऊँ

लिखने वालों की ..कलम बन जाऊँ

दीपक की.. किरण बन जाऊँ

 जीत की .उमंग बन जाऊँ, और                                      

काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि

नफरत की जंग.. प्यार से जीत जाऊँ.. और

खुद ही एक कविता बन जाऊँ..

…………………….विजय वर्मा

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सकारात्मक विचार …8

तेरा शुक्रिया है … 

दोस्तों…

वैसे तो हर कोई खुश रहना चाहता है लेकिन हकीकत में वह अक्सर परेशान और ज्यादातर दुखी ही रहता हैं।

वर्तमान स्थिति में चिंता और तनाव हमारे ज़िन्दगी का हिस्सा बन चूका है | इसका मुख्य कारण है कि हम उन चीजों के पीछे भागते रहते है जो मेरे पास नहीं है,|

 लेकिन जो मेरे पास  है उसकी  हम क़द्र ही नहीं करते है |

अगर अपने मन को थोडा सा  समझाया जा सके तो हम अपने दुखी मन को खुश रख  सकते है |

आइये, इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँ …

एक बार की बात है कि एक व्यक्ति जो किसी कंपनी में जॉब करता था, लेकिन हमेशा अपने काम को लेकर  कुछ न कुछ परेशानियों में उलझा  रहता था |

शाम के वक़्त वह ऑफिस से निकल कर घर की ओर जा रहा था और वह मन ही मन सोच रहा था ..यह भी कोई ज़िन्दगी है ? हमेशा काम के कारण तनाव में रहता हूँ |

तभी रास्ते में एक भिखारी दिखा | जो सड़क के किनारे ठण्ड से ठिठुरते हुए भीख मांग रहा था |

 उसे देख कर उस व्यक्ति के मन में ख्याल आया,  मेरी ज़िन्दगी इस भिखारी से तो अच्छी है,  हाँ, मेरे ज़िन्दगी में थोड़ी सी परेशानी है तो क्या हुआ |

परन्तु इस भिखारी से तो अच्छी स्थिति में हूँ.. .. .यह सोच कर उसके चेहरे पर अचानक  मुस्कान बिखर गयी और उपर वाले को याद कर बोला… थैंक यू प्रभु, !

 आपने मुझे इस भिखारी से तो अच्छी ज़िन्दगी दी है |

वो भिखारी अपने दुखो के लिए भगवान् को कोसते रहता था ..तभी उस भिखारी ने सामने से गुज़रते हुए एक बीमार आदमी को देखा |

वह दर्द से कराह रहा था,  और लोग उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जा रहे थे |

भिखारी  की नज़र जब उस बीमार आदमी पर पड़ी , उसके दयनीय स्थिति को देख कर  उसने मन ही मन सोचा …मैं तो इस बीमार आदमी से अच्छी स्थिति में हूँ | मैं तो रोग मुक्त हूँ, हाँ थोड़े कष्ट है तो क्या हुआ |

फिर उसने भगवान् को अपने हाथ उठाकर कहा ….धन्यवाद प्रभु , आपने हमें इन सब बिमारियों से दूर रखा है |

उधर वह मरीज़ जो दर्द से कराह  रहा था और अपने कष्टों के लिए भगवान् को दोषी मांग रहा था …जब हॉस्पिटल पहुँचा तो वहाँ उसने एक मरे हुए इंसान को देखा |

उस लाश के पास खड़े उसके परिवार के लोग रो रहे थे |

तभी मरीज़ के मन में ख्याल आया कि मैं तो कम से कम उस मरे हुए व्यक्ति से तो अच्छा हूँ … मैं जिंदा तो हूँ ..और ऐसा सोचते ही उसका दर्द कम हो गया |

 उसने भगवान् को याद किया और उसे धन्यवाद देते हुए कहा… थैंक यू भगवान्,  मैं बीमार ज़रूर हूँ पर जिंदा तो  हूँ | ऐसा बोलते हुए वह खुश हो गया |

इस कहानी से बस यही निष्कर्ष निकाला  जा सकता है कि हर इंसान को भगवान् के प्रति  कृतज्ञ  होना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि भगवान् ने उसे बहुत कुछ दिया है …थोड़े से दुःख साथ में है तो क्या हुआ ..आस पास बहुत सारे ऐसे लोग भी है जिनका दुःख उसके दुखों से बहुत ज्यादा है |

ज्यादातर लोग दुखी जीवन जी रहे है क्योकि वो भगवान् के प्रति आभार प्रकट करना भूल चुके है |  उनका ध्यान उन चीज़ पर होता है जो उनके पास नहीं है |

लेकिन सच तो यह है कि आप अपने को हमेशा खुश रख  सकते है, उन चीज़ों को महसूस कर के जो आप के पास है | 

आप अपने सकारात्मक सोच से मन को स्वस्थ रखेगे तो आपका तन भी स्वस्थ रहेगा

भगवान् ने जो भी दिया है हमारे खुश रहने के लिए काफी है | इसलिए हर परिस्थिति में खुश रहना सीखें.. और भगवान् को रोज़ शुक्रिया कहें …..

वो कौन है …. जो मुझे जगाया

वो तू ही तो है …वो तू ही तो है

जैिसे सबने भगवान् बताया ..

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नया साल नयी सोच..

नया साल यानी नए ख्याल |

        नए  ख्याल यानी नयी सोच |

                 नयी सोच वह जो ज़िन्दगी बदल दे |

इस नए साल में हम कुछ ऐसा करें कि हमारी ज़िन्दगी बेहतर से बेहतरीन बन सके  |

इसके लिए हमें सिर्फ इतना सोचना है कि हमारा आने वाल साल बीते साल से बेहतर हो |

यह जो दिसम्बर का महिना है, यह एक तरह का आईना है जो दिखाता है कि पुरे साल हमने क्या खोया ….क्या पाया |

और दूसरी तरफ जो आने वाला जनवरी का महिना है, वो दिखाता है एक सुनहरा सपना | सच, हमलोग आने वाले साल भर के लिए एक सपना संजोते है |

आइये पहले हम आईना देखें और बीते साल का विश्लेषण करें |

मेरा मतलब है कि बीते साल हमारे लिए कैसा रहा .. हमने क्या खोया और क्या पाया |

इससे हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते है कि बीते साल में क्या क्या कमियाँ रही और क्यों हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाए.| .

इस साल कौन से आवश्यक सुधार किये जाएँ ताकि आने वाले साल में हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके |

अपनी कमजोरी को स्वीकार करने की हिम्मत और उसमे सुधार करने की नियत होनी चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते है |

सबसे पहले हमें किसी भी काम में सफल होने के लिए संकल्प लेना होगा, हमें प्रण करना होगा कि बस अब बहुत हो गया …अब आलस नहीं करेंगे और आज का काम कल पर नहीं टालेंगे |

नए साल के लिए मैं यहाँ पाँच संकल्पों की चर्चा करना चाहूँगा जिसे हर हाल में  पूरा करना है | मुझे विश्वास है कि साल के अंत में अपने को एक नया इंसान के रूप में बदल चुके होंगे |

हर व्यक्ति के लिए अगल अगल प्राथमिकतायें होती है जैसे एक स्टूडेंट के लिए पढाई , सीनियर सिटीजन के लिए स्वास्थ,  बेरोजगार के लिए एक स्टार्ट अप शुरू करना इत्यादि

मैंने भी एक लिस्ट बनाकर अपनी डायरी में उन लक्ष्यों को लिख लिया है जो मुझे साल के अंत तक प्राप्त करने है |

और सबसे ज़रूरी बात कि उस पर लगातार मेहनत करनी होगी, ध्यान देकर उस पर अमल करना होगा  |

हमें रोज़ थोडा थोडा बेहतर (improvement) करते जाना होगा ,

छोटी छोटी सफलताओं का जश्न (celebration) भी मनाना होगा |

और इस तरह से हम अपने आप से यही कामना करते है कि

बस इतनी सी ख्वाहिस है तुझसे ये ज़िन्दगी  .

मेरा आने वाला कल  बीते हुए कल से बेहतर हो ..

तो आइये निम्नलिखित बातों पर गौर करें जो भविष्य के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो ….

अपने व्यक्तिगत ज़िन्दगी (personal life) को बेहतर बनाना :

सबसे  पहला संकल्प है कि हमें  अपने व्यतिगत जीवन को बेहतर बनाना है,  उसके लिए खुद को अनुशासन  में रखना  बहुत ज़रूरी है और अपने दिन को ऑर्गनाइज (organize) रखना भी ज़रूरी है | हमारे पास समय सिमित है और कीमती भी | साथ ही यह  तेजी से निकला चला जा रहा है |

यह सच है कि तारीखे तो लौट कर आती है लेकिन वह दिन लौट कर कभी नहीं आता है

इसलिए जो बीत गया उसके बारे में सोच कर, और अफ़सोस कर हम अपने आज को क्यों बर्बाद करें ?

 उसके बजाये हम संकल्प करें कि आने वाला एक एक  दिन को एन्जॉय करेंगे और  अपने  आज को बेहतर ढंग से प्रबंधन (manage)  करेंगे |

जिसमे हमारे स्वास्थ (Health )  से लेकर अपने शौक (hobby) तक को ध्यान में रख कर एक संतुलित दैनिक रूटीन हो जिसका अनुशरण (follow) करते हुए हमें ख़ुशी भी महसूस हो और बेकार के तनाव से भी बचे रहे |

पारिवारिक संबंधों  को बेहतर बनाना  :

हमारा परिवार हमारे जीवन का हिस्सा है | परिवार हमारी ज़रुरत ही नहीं बल्कि सब कुछ है | परिवार के मजबूत संबंधों पर ही हमारी सुकून की ज़िन्दगी टिकी हुई है |

हम दुनिया के लिए एक आम इंसान हो सकते है परन्तु हम अपने परिवार के लिए तो पूरी दुनिया ही है |

 इस कोरोना काल में एक बात तो अच्छी हुई कि जहाँ हम अपने परिवार के लिए समय नहीं निकल पाते थे | अब हमारे पास पारिवारिक रिश्तो को सुधारने  (improve), और मजबूत करने के लिए समय मिल रहा है | तो ऐसे समय को नए साल में सदुपयोग करना चाहिए |

 हमें उनका ख्याल रखना चाहिए जो हमारा ख्याल रखते है |

कोशिश होनी  चाहिए कि  घर में  खुशियों का माहौल हो | घर के हरेक कोने से हँसने और खिलखिलाने की आवाज़ आए | आप खुश  रहें और परिवार के अन्य सदस्यों को भी खुश रखें |

सामाजिक जीवन में सुधार करना :

हम एक समाज में रहते है | रोज़ लोगों से मिलना जुलना होता है | जहाँ हम काम करते है या  हमारे घर के आस पास के लोगों  से बेहतर सम्बन्ध बना कर रखना है | यह ज़रूरी नहीं कि हम बहुत सारे नए रिश्ते बना लें लेकिन यह बहुत ज़रूरी है कि जो पुराने रिश्ते है उनको संभाल  कर रखा जाए |

रिश्ते वो नहीं होते जो तस्वीर में साथ खड़े दिखाई देते है बल्कि रिश्ते वो होते है जो तकलीफ में साथ खड़े होते है | हमें हमेशा दूसरों की मदद करने की सोच रखना चाहिए  |

क्योंकि रिश्ते ज़िन्दगी के साथ नहीं चलते, लेकिन एक बार जब रिश्ता बन जाता है तो  ज़िन्दगी रिश्तों  के साथ चलती है | अगर कुछ छोटी मोटी रंजिश है तो तुरंत उसे ठीक कर लें | कही ऐसा ना हो कि नए रिश्ते बनाने के चक्कर में पुराने छुट जाएँ |

अपने सपनो को साकार करना

हर इंसान के ज़िन्दगी में कुछ शौक (hobby) होती है,  कुछ सपने होते है, जिसे वह पूरा करना चाहता है |

अगर सपने हमारे है तो कोशिश भी हमें ही करनी होगी |

मंजिल मिले ना मिले यह बड़ी बात नहीं है लेकिन कोशिश भी ना करे तो ये गलत बात होगी | हमें कोशिश करनी है अपने सपनो को साकार करने के लिए |

हमें अपनी  क़ाबलियत बढानी होगी, उसके लिए हमें लगातार प्रयास करनी होगी  |  समाज को दिखाना होगा कि हमने अपनी क़ाबलियत के बल पर ये मुकाम हासिल किया है |

यूँ ही नहीं होती हाथ की लकीरों  के आगे उँगलियों .

रब ने किस्मत से पहले  मेहनत जो लिखी है …

अगर किसी अच्छे काम के लिए लोगों से वाह – वाही (appreciation) नहीं मिलती है तो कोई बात नहीं ,… बस अपनी कोशिश जारी रखनी है | फल की चिंता ऊपर वाले पर छोड़ देना चाहिए |

सकारात्मक सोच रखना

ऊपर  लिखे सारी बातों का कोई मतलब नहीं अगर हम अपनी सोच सकारात्मक नहीं रखते है |

अपनी सोच ऐसी होनी चाहिए कि …मन का हो तो अच्छा और अगर मन का ना हो तो और भी अच्छा | क्योंकि ऐसी स्थिति में वही होगा जो भगवान् को मंज़ूर होगा | और हमें तो भगवान् पर पूरा भरोसा है |

अगर हमें कुछ पल के लिए सफलता नहीं मिल रही है तो हमें उदास होकर बैठ नहीं जाना है, बल्कि अपने बेस्ट (best) देने का प्रयत्न करते रहना चाहिए.| एक दिन  उसका फल मेरे मन के अनुसार अवश्य मिलेगा  |

ज़िन्दगी में तो समस्याएँ आएँगी ही,  बस हमें धर्य बनाये रखना होगा, और पूरी शक्ति से मुकाबला करना होगा |

हो सकता है कभी लोग मजाक भी उड़ायें, ताने भी कसे,  परन्तु उनकी इन बातों का अपने पर असर नहीं होना चाहिए | अपना रिमोट बटन दुसरे के हाथ में क्यों देना |

सफलता उन्हें नहीं मिलती जो पाने का प्रयास करते है बल्कि सफलता उन्हें मिलती है जो पाने तक प्रयास करते रहते है |

हमें आशा है कि आप भी नए साल के लिए कुछ सपने संजोय होंगे और उसे पाने के लिए कुछ संकल्प किया होगा | आपने resolution बनाया कि नहीं ?

हमें ज़रूर अपने विचारों से अवगत कराएँगे .. ..नया साल २०२१ आप को बहुर बहुत मुबराल्क हो …

गुज़रो न बस क़रीब से..तुम  ख़याल की तरह

अब तो मुस्कुराओ ज़िंदगी ..नए साल की तरह,

आँसू छलक पड़ें न फिर… किसी की बात पर

लग जाओ मेरी आँखों   से.. रूमाल की तरह..

बैठो भी अब ज़हन में .. मीठी याद की तरह

उठते हो बार-बार क्यों  ..सवाल की तरह..??

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सकारात्मक विचार ….7

सिर्फ सकारात्मक सोच ही हमें इस संसार में खुशियाँ दे सकती है, जबकि नकारात्मक सोच सिर्फ दुःख ही नहीं देती, बल्कि पूरी तरह तबाह कर देती है।

हमारी हर सोच आनेवाली परिस्थिति के बीज बोती है, तो क्यों ना हम सकारात्मक सोच रखे |

 किसी मुश्किल घड़ी में यदि हम सकारत्मक रहे, तो वह दुःखदाई परिस्थिति को भी सुखदाई बना देती है और वह दुःख का  समय भी गुज़र जाता है |

……मैं कोई उपदेशक नहीं परंतु जागरूकता फैलाने वाला जरूर हूं।

…..दुनिया में केवल एक ही इंसान  आप की तकदीर बदल सकता है ..”वो हैं आप “..

… जीवन मे आपकी खुशी या आपके दुःख का कारण कोई दूसरा व्यक्ति नही होना चाहिए, अपने सुख और दुःख की चाबी दूसरे व्यक्ति के हाथ मे मत दीजिए |

किसी व्यक्ति को इतना हक मत दीजिए कि आपको दुःखी कर सके। जीवन एक बार मिलता है.. खुश रहिए और खुशी बांटिए ,

…  मां अपने बच्चे को प्रौढ़ बनाने के लिए 20 साल गुजार देती है जबकि वही एक अन्य स्त्री को उसे बेवकूफ बनाने में मात्र 20 मिनट ही लगता है।

…. यदि हम  मुस्कुरा नहीं सकते तो हम सभी पागल हो सकते हैं।

…… दुनिया भर के आधे लोग जिनके पास कुछ कहने के लिए होता है लेकिन वो कुछ कह नहीं सकते और बचे आधे लोग जिनके पास कुछ कहने के लिए नहीं होता है लेकिन वो हमेशा बोलते रहते हैं।

…  अगर किसी लेखक को लिखते समय उसको अपने  लेखन  पर आश्चर्य नहीं होता, तो पाठक को भी उसे पढ़ते समय कोई आश्चर्य नहीं होता ।

….अगर आप आपदाओ के बारे में बार बार सोचोगे तो वह आ जाएँगी. अगर आप मृत्यु के बारे में गंभीरता से सोचते रहोगे  तो आप अपने मौत की ओर बढ़ने लगते हो |
 जब आप सकारात्मक और स्वेच्छा से सोचोगे, तब विश्वास और निष्ठा के साथ आपका जीवन सुरक्षित हो पायेगा |

कम डरो,…. अधिक आशा रखो,  

  कम खाओ,…. ज्यादा पचाओ.

कम कराहों, ….ज्यादा साँस लो,

 कम बोलो,…. कहो ज्यादा.

 प्रेम अधिक करो  और  तब सभी अच्छी चीजे आपकी होगी |.

….किसी “निराशावादी” को हर अवसर में मुश्किलें दिखाई देती है और ठीक उसके विपरीत “आशावादी” को मुश्किलों में अवसर दिखाई देता है…….. विंस्टन चर्चिल

…….खुद के लिए मैं बहुत आशावादी हूँ. इसके अलावा कुछ और होना ज्यादा मायने नहीं रखता………विंस्टन चर्चिल

…. दो व्यक्तियों का आपस में मिलना दो रासायनिक पदार्थो के मिलने जैसा है. यदि इनमे कोई प्रतिक्रिया होती है तो दोनों में बदलाव आता  |

…. मनुष्य वह प्राणी है जो अपने विचारो से बना होता है, वह जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है |.

…. एक बार जब आप नकारात्मक विचारो को सकारात्मक विचारो में बदल देते हो, तब आपको सकारात्मक नतीजे मिलने शुरू हो जाते है…

… मैंने अपनी पूरी ज़िन्दगी में जो कुछ भी सीखा है उसे मात्र 3 शब्दों में समेट सकता हूं.. जीवन चलता रहता है ।

…. यह मेरे आपके लिए आखिरी शब्द है. जीवन से नहीं डरे. यह यकीन रखे की जिन्दगी जीने के लायक है और आपका यह यकीन इसे सच बना देगा…

ज़िन्दगी ज़ख्मों से भरी है

वक़्त को महरम बनाना सिख लो,

हारना तो है एक दिन मौत से ….

फ़िलहाल …………………,

दोस्तों के साथ ज़िन्दगी जीना सिख लो

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हर ब्लॉग कुछ कहता है …12

लक्ष्य की प्राप्ति  कैसे करें ?

हेल्लो दोस्तों ,

जीवन में कोई भी सफलता अर्जित करने के लिए सबसे पहला कदम आपके द्वारा अपने लक्ष्यों का निर्धारण करना होता है।  

लक्ष्य निर्धारण एक ऐसी गतिविधि है जिसके लिए आपको पर्याप्त समय देने की आवश्यकता होती है और यही आपके समय का सदुपयोग है।

किसी भी काम में चाहे वो पढाई लिखाई  हो या कोई अन्य काम हो या कोई भी सेट किया हुआ गोल हो ..आप पुरे ध्यान, पक्का  इरादा और एकाग्रचित होकर  प्रयास करें तो  सफलता अवश्य प्राप्त होगी |   

इस बात को सही चरितार्थ करता एक छोटी सी कहानी  यहाँ प्रस्तुत है जो ज्ञान वर्धक तो है ही साथ में मजेदार भी है ..

यह कहानी है एक फ़क़ीर बाबा की |  जिसके बारे में कहा जाता था कि वो किसी भी बात को कहते थे या समस्या के समाधान बताते थे तो  सामने वाला सुन कर उनसे बहुत प्रभावित हो जाता था |

उनके द्वारा कहे  गए बातों को हमेशा के लिए अपने मन में बैठा लेता था |  सचमुच उनके पास ज्ञान का भण्डार था | 

उनकी यह विशेषता काफी लोकप्रिय होने लगी |  दूर दूर से लोग अपनी समस्या को लेकर आते और ख़ुशी ख़ुशी उसका समाधान पाकर चले जाते | 

उनकी इस  ख्याति के बारे में  वहाँ के राजा ने भी सुना | राजा को फ़क़ीर बाबा की यह विशेषता जान कर  बहुत ख़ुशी हुई कि हमारे  राज्य में इतने पहुंचे हुए बाबा है |

जब वे इतने लोगों का भला कर रहे है तो मुझे भी  उनका उचित सम्मान करना चाहिए और उनसे कुछ ज्ञान भी प्राप्त करना चाहिए |   

ऐसा सोच कर राजा ने अपने मंत्री को बुलाया और उसे अपने मन  की बात कह दी | 

फिर क्या था, मंत्री ने राजा के हुक्म की तमिल करते हुए अपने पुरे लाव – लश्कर और ढोल- नगाड़े को तैयार कर दिया और राजा साहब से निवेदन किया कि आप जैसा चाहते थे वैसा इंतज़ाम हम ने कर दिया है | 

राजा मंत्री की बात सुन कर खुश हो गए और अपने सैनिको और ढोल – नगाड़ों के साथ उस फ़क़ीर बाबा से मिलने के लिए चल दिए, साथ में उनके मंत्री भी थे | 

राजा साहब जैसे ही उस फ़क़ीर बाबा के आश्रम के पास पहुचे तो उन्होंने देखा कि वो फ़क़ीर बाबा पास  ही अपने बगीचे में  एक गड्ढा खोदने में मशगुल है | 

राजा साहब सोच रहे थे कि वह  फ़क़ीर राजा को अपने आश्रम में देख कर ख़ुशी से पागल हो जायेगा | वह  दौड़ कर आएगा और उनके सम्मान में हाथ जोड़ कर खड़ा हो जायेगा | 

लेकिन यह क्या..  ऐसा कुछ भी नहीं हुआ |   

उसने तो राजा की तरफ देखा तक नहीं और  गड्ढा खोदने का काम वो तन्मयता से करता रहा | 

फ़क़ीर का ऐसा  व्यवहार देख कर राजा को बहुत बुरा लगा | 

 राजा ने कुछ देर सोचा और फिर अपने मंत्री से कहा कि अपने सैनिक को उस फ़क़ीर  के पास भेजो जो उसे बताये कि उससे मिलने खुद राजा साहब आये है |   

राजा की हुक्म की तमिल हुई और  सैनिक फ़क़ीर के पास जाकर कहा … आपके आश्रम में राजा साहब आप से मिलने आये है | 

लेकिन फ़क़ीर उस सैनिक की बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपने गड्ढे खोदने का काम उसी तरह करता रहा | 

सैनिक  वापस आकर राजा  को हकीकत बताई  और कहा …आपके द्वारा भेजे गए सन्देश को उसने अनसुनी कर दिया और उसी तरह अपने काम में मशगुल है |

तब राजा ने मन ही मन सोचा कि यह पहुंचे हुए फ़क़ीर बाबा नहीं कोई पागल लगता है,|

तब ही तो ऐसे तुच्छ कार्य में लगा है और अपने आश्रम में आये राजा की अनदेखी कर रहा है |   ऐसे छोटे मोटे काम तो अपने शिष्य से भी करा सकता था | 

राजा को इस बात से बहुत गुस्सा आया कि फ़क़ीर ने मेरी सेना के सामने मेरा अपमान कर रहा है | 

राजा ने फिर  मंत्री की ओर मुखातिब हो कर कहा … ढोल – नगाड़े बजाएं जाएँ,  ताकि उस फ़क़ीर बाबा का  ध्यान भंग  हो और उसे अपनी गलती का एहसास हो |  

मंत्रीने  ऐसा ही किया और ढोल नगाड़े  बजने लगे | लेकिन फिर भी उस फ़क़ीर बाबा पर इसका कोई असर नहीं हो रहा था और पहले की तरह ही वह अपना काम करता रहा |   कुछ देर बाद ढोल नगाड़े शांत हो गए | 

अब राजा को पक्का यकीन हो चला था कि फ़क़ीर सचमुच एक पागल ही है | 

तभी थोड़ी देर में फ़क़ीर बाबा का काम जैसे ही पूरा हुआ, उनकी नज़र रजा साहब पर पड़ी |  वे राजा के पास आये और उन्हें प्रणाम कर अपने कुटिया में आकर शीतल जल ग्रहण करने हेतु निवेदन करने लगे | 

उस फ़क़ीर की बात सुनते ही राजा भड़क गए और गुस्से में कहा…आप जल पीने  की बात क्यों कर रहे है ? 

क्या आप देख नहीं रहे है कि  आधे घंटे से मैं आपका इंतज़ार कर रहा हूँ और आपने  का सारा ध्यान एक तुच्छ गड्ढे खोदने को में लगा रखी है || इस तरह तो आप  मेरा अपमान ही कर रहे है | 

मैं तो आप से ज्ञान लेने आया था लेकिन ज्ञान की बात तो छोडो.. आप तो  इस छोटे से  काम करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे थे | 

इस पर फ़क़ीर बाबा ने कहा ..बेटा, कौन काम बड़ा है और कौन छोटा, यह तो ऊपर वाला जाने |  मैं तो हर काम को बड़ा और महत्वपूर्ण समझ कर करता हूँ | 

और रही बात ज्ञान देने की तो वो मैं पहले ही आपको दे चूका हूँ | 

उस फ़क़ीर की बात को सुनकर राजा  के मन में अचानक बहुत से सवाल उभर आये | 

वे मन ही मन जिज्ञासा से सोचने लगे कि फ़क़ीर तो अभी बात भी शुरू नहीं की और कहता है कि हमें ज्ञान दे चूका है | उसने  ज्ञान कब दिया हमें ? 

राजा का  गुस्सा अचानक शांत हो गया और शांत भाव से  फ़क़ीर की तरफ देखते हुए पूछा ..फ़क़ीर बाबा, एक बात समझ में नहीं आया कि अभी आप गड्ढा खोद रहे थे और हमसे कोई बात भी नहीं हुई.. फिर आपने ज्ञान कब और कैसे दिया ? 

इस पर फ़क़ीर बाबा ने ज़बाब दिया…बेटा, जब मैं गड्ढा खोद रहा था तो आप को ऐसा लग रहा था कि मैं सिर्फ गड्ढा खोद रहा हूँ |    

मैं उस गड्ढे को खोदने की क्रिया में इतना तल्लीन हो चूका था कि आप के सैनिकों की आवाज़ और आपके ढोल नगाड़े  की आवाज़ भी मेरा ध्यान भंग नहीं कर सके |

लेकिन वह काम जैसे ही पूरा हुआ तो सामने आप नज़र आ गए | आपके आगमन का पता चलते ही मैं सीधा आपके पास चला आया | 

उस दिन उस फ़क़ीर बाबा ने राजा को बहुत बड़ी बात सिखाई कि ध्यान क्या होता है, काम में तन्मयता क्या होती है | 

यह सत्य है कि हम सब कई सारे काम करने का लक्ष्य निर्धारित करते है, टारगेट बनाते है | और सोचते है कि उसे प्राप्त कर लेंगे | लेकिन ज्यादा तर हम  उसमे फेल हो जाते है | 

इसका मुख्य कारण यह है कि हम काम तो करते होते है लेकिन ध्यान पूरी तरह उस पर केन्द्रित नहीं कर पाते है,  हमारा ध्यान हमेशा इधर उधर भटकता रहता है | 

इसलिए मेरा मानना है कि हम ज़िन्दगी में जो भी काम करे ,या गोल निर्धारित करे उसे पूरा करने के लिए पुरे ध्यान और पुरे समर्पण से प्रयास करें. |

    यह तभी संभव है जब उस कार्य को करने में हमें आनंद का भी अनुभव हो |

दोस्तों, नया साल आने वाला है और आने वाले नए साल में हम फिर कुछ resolution बनायेगें |

लेकिन इस बार पिछली साल की तरह लक्ष्य प्राप्त करने से चुकेंगे नहीं बल्कि हर हाल में ज़रूर सफल होंगे | 

 बस इतना ध्यान रखना है कि उस काम को करते हुए आनंद का अनुभव हो और पुरे  ध्यान से और एकाग्रचित होकर उस काम को करना है | तो हमें सफलता ज़रूर मिलेगी | 

आशा है कि आने वाले  साल का हर दिन ख़ुशी और उत्साह मनाने के मौके लेकर आये |  सफलता आप सबों की कदम चूमेंगे |

आप सब खुश रहेंगे… मस्त रहेंगे और….हँसते रहेंगे ..

आपकी आँखों में सजे है जो भी सपने ,

यह नया वर्ष उन्हें सच कर जाए

आप के लिए यही है हमारी शुभकामनाएं |

आप सभी दोस्तों को नया साल २०२१ बहुत बहुत मुबारक हो |

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सकारात्मक विचार …6

लकडहारे की सोच

हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है. जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते है तब हमारे सारे काम भी सही तरीके से पूरे हो जाते है.|

 जिस व्यक्ति की सोच नकारात्मक होती है वह हर चीज में नकारात्मक बातें ढूंढने लगता है जिससे उस व्यक्ति का कोई भी  काम सही सही ढंग से नहीं  हो पाता है |

यह सोच का ही अंतर होता है जहाँ कोई विद्यार्थी कक्षा में अच्छी सोच के कारण अच्छे नंबर ले आता है तो कोई नकारात्मक सोच रखने वाला छात्र कक्षा में फेल हो जाता है |.

हमारे मन में लगातार कुछ ना कुछ विचार आते रहते है , उसमे कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक भी होते है |

अगर हमें अपने जीवन में कुछ भी कामयाबी प्राप्त करनी है तो आज से ही हमें अपनी सोच सकारात्मक रखनी होगी |.

इसी सन्दर्भ में मुझे एक कहानी याद आ गई जिसे मैंने एक बार पढ़ा था | वह कहानी मैं आप सब लोगों  के साथ शेयर करना चाहता हूँ |

एक लकडहारा था जो रोज जंगल  से लकड़ियाँ काट कर लाता  और उसे बेच कर  अपने और अपने परिवार का भरण पोषण करता था | एक दिन वह लकड़ी काटने  के लिए एक घने जंगल में बहुत अन्दर तक चला गया | 

लकड़ियाँ काटते हुए वह काफी थक चूका था,  ऊपर से गर्मी के कारण वह पसीने से लथ पथ हो रहा था |

तभी सामने एक विशालकाए वृक्ष देख कर उसके नीचे बैठ कर वह आराम करने लगा | वहाँ आराम करते हुए उसके मन में ख्याल आने लगा …यहाँ का ज़मीन  कितना सख्त है, अगर यहाँ आरामदायक बिस्तर होता हो मैं उसपर आराम कर अपनी सारी थकान मिटा लेता |

उसी समय एक चमत्कार  हुआ और तुरंत ही वह अपने को एक आरामदायक और  गद्देदार बिस्तर पर पाया |

उसे यह  देख कर  आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा | वो बिस्तर पर लेट  कर आराम करते हुए फिर सोचने लगा , काश इस जंगल में इस समय स्वादिस्ट भोजन भी मिल जाता तो उसे खाकर मैं अपनी भूख मिटा पाता |

तभी दूसरा चमत्कार  हुआ और उसने एक सुन्दर थाली में स्वादिस्ट भोजन सामने रखा हुआ पाया | वह आश्चर्य से इधर उधर देखा लेकिन उसे  वहाँ कोई भी दिखाई नहीं दिया |

वह सोचने लगा कि आज  क्या बात है कि मैं जो भी इच्छा कर रहा हूँ वो अपने आप पूरा हो  हो रहा है |

खाना खाने  के बाद उसे पानी पीने की इच्छा हुई, तभी उसके मन में विचार आया  कि काश अभी ठंडी लस्सी मिल जाती तो इस गर्मी में उससे अपनी प्यास बुझाता |

और तभी तीसरा चमत्कार हुआ और चाँदी के गिलास में स्वादिस्ट लस्सी उसके सामने रखा था | वह घोर आश्चर्य में पड़  गया | यहाँ तो कोई भी नहीं है फिर यह सब कौन दे रहा है |

इसका पता लगाने के लिए वह मन ही मन सोचने लगा और अपने मन में इच्छा किया कि कोई मेरे बदन का मसाज़ कर देता तो सारी थकान मिट जाती |

उसके मन में ऐसा ख्याल आते ही उसने महसूस किया कि कोई मुलायम  हाथ उसके बदन का मसाज़ कर रहा है, लेकिन कोई दिख नहीं रहा है |  उसे बहुत आराम महसूस होने लगा |

वह आँखे बंद किये सोच रहा था कि मैं जो भी सोच रहा हूँ वह सब सच कैसे हो जा रहा है |,

 शाम होने को आ रही थी और उसे अब डर भी सताने लगा | और डर के मारे उसके मन में ख्याल आया कि इतना घना  जंगल है कि  कही यहाँ शेर ना आ जाए |

उसके मन में ऐसा विचार आते ही एक शेर सामने प्रकट हो गया और वह लकडहारा को देख कर गुर्राया |

शेर को सामने पाते  ही वह काफी डर  गया और शेर को गुस्से में गुर्राते हुए देखा तो डर से थर थर कांपने लगा और अचानक उसके मन में ख्याल आया …अब तो मेरी ज़िन्दगी समाप्त हो जाएगी , यह शेर मुझे मार  कर खा जायेगा |

जैसे ही उसके मन में यह विचार आया , शेर उसपर झपटा और उसे मार कर  खा गया |

दरअसल, यह चमत्कार इसलिए हो रहा था क्योंकि वह लकडहारा जिस वृक्ष के नीचे बैठा था वह कल्पतरुं वृक्ष था, जिसे इच्छा पूरी करने वाला  वृक्ष माना जाता है |

कोई भी व्यक्ति इस वृक्ष के नीचे बैठ कर जो भी उसके मन में इच्छा करता है वह पूरा हो जाता है |

वह लकडहारा इस बात  से अज्ञान था कि यह “कल्पतरुं वृक्ष” है और उसके नीचे बैठ कर वह जो भी इच्छा करता था वह सब पूरा हो रहा था, | उसे तो यह सब चमत्कार लग रह था |

हमारे  संत महापुरुष ने इस घटना  का विश्लेषण करते हुआ बताया ….यह जो “कल्पतरु वृक्ष” है यह और कुछ नहीं बल्कि हमारा mind है और हम अपने दिमाग में जो भी चीज़ बार बार सोचते है वह हकीकत में होने लगता है |

आप अपने अन्दर बार बार जैसा  महसूस ( अच्छा या बुरा ) करते है वह प्रत्यक्ष रूप से होने लगता है |  आप जो भी कल्पना करते है वह हकीकत में भी हो सकता है, बशर्ते कि उस कल्पना को साकार करने के लिए सही ढंग  से प्रयास किया जाये |

आज जो बल्ब और हवाई ज़हाज़ का आविष्कार हुआ है ..उसकी पहले किसी ने कल्पना की थी और फिर प्रयास से कल्पना हकीकत में बदल गया |

इसका मतलब है हमारा mind बहुत ही पावरफुल है, जिसकी शक्ति का हमें आभास नहीं है | इसे हम जिस तरह से  handle करते है वैसी ही हमारी life हो जाती है |

अगर समय रहते अपनी नकारात्मक सोच को सकारात्मक नहीं करेंगे तब तक हम सब  परेशानी और दुखों का सामना करते रहेंगे |

आप अभ्यास के द्वारा अपनी सोच को सकारात्मक रखे और उसे अनुभव भी करें |

अगर इससे अपनी आदत में सुधार कर लेते है तो आप महसूस करेंगे कि आपका मन स्थिर रहने लगा है और आप ने अपने मन के तनाव और दुखों से छुटकारा पा लिया है |

वैसे भी सही कहा गया है कि …

मन के हारे हार है और मन के जीते जीत |

यह ज़िन्दगी बहुत कीमती है इसे अच्छी सोच से खुबसूरत बनाना चाहिए |

मंजिल उन्ही को मिलती है

जिनके सपनों में जान होती है

पंख से कुछ नहीं होता

हौसलों से उड़ान होती है

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सकारात्मक विचार …5

करोगे भला तो होगा भला

आपकी सकारात्मक सोच ही इस दुनिया को स्वर्ग बनायेगी ।” “भगवान उसकी मदद करता है जो खुद अपनी मदद करता है।”

“चुनौतियां जीवन को अधिक रुचिकर बनाती है, और उन्हें दूर करना जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।” “खुद में वह बदलाव लाइए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं।

“सकारात्मक सोच आदमी का वह ब्रह्मास्त्र है, जो उसके मार्ग के सभी व्यवधानों को समाप्त कर उसकी सफलता का मार्ग प्रशस्त कर देता है।”

हमारे विचार हमारी संपत्ति हैं क्यों इन पर नकारात्मक विचारों का दीमक लगाए ?

किसी ने ठीक ही कहा है कि अपने  को  खुश रखने के तरीके ढूंढें, क्योंकि तकलीफें तो आपको ढूंढ ही रही है |

आइये कुछ अच्छा सुनते है , …कुछ अच्छा पढ़ते है …

एक बुढिया जिसकी उम्र करीब 70 साल की थी वह जिस घर में रहती थी उसे खाली करने के लिए बार बार नोटिस आ रहे थे |

उनके बेटे और पति की एक कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो चुकी थी | और अब तो खाने के लाले पड़  चुके थे तो वह अपने इस गिरवी पड़े मकान को कैसे छुड़ा पाती |

उन्होंने अपने जवानी के दिनों में बहुत लोगों और रिश्तेदारों की मदद  की थी |

आज वे उन्ही रिश्तेदारों और पहचान वालें लोगो से मदद मांगती रही ताकि मकान को गिरवी से  छुड़ा लिया जाए |

लेकिन उम्र के इस पड़ाव में भी उस बुढिया  की मदद को कोई भी तैयार नहीं हुआ | सब लोगों ने अपने मज़बूरी का कोई ना कोई बहाना बना दिया |

सेठ जी के द्वारा मकान खाली करने के नोटिस भेजने के बाद अन्ततः  आज घर खाली करवाने के लिए अपने सिक्यूरिटी गार्ड्स को भेज दिया |

उन गार्ड्स ने आकर उस बुढिया  से कहा …अम्मा जी आज मकान  खाली  करने की आखरी तारीख है, इसलिए  आज  मकान खाली तो करना ही पड़ेगा |

बुढिया उनलोगों के सामने हाथ जोड़ कर निवेदन कर रही थी कि सेठ से कहो कि दो दिन का मोहलत दे दे तो मैं अपने रहने के लिए कोई दूसरा इंतज़ाम कर लूँ |

लेकिन गार्ड्स उनकी बात को सुनने को तैयार नहीं थे | उसने कहा कि मुझे तो सेठ ने भेजा है इस मकान को खाली कराने के लिए |

और इतना बोल कर मकान से एक एक सामन निकाल कर बाहर रोड पर रखने लगा | वहाँ लोगों की भीड़ लग गई |

सभी लोग वहाँ खड़े खड़े  बस तमाशा देख रहे थे | बुढिया असहाय सब कुछ देख रही थी , उसकी सुनी आँखों से बस आँसू बह रहे थे | 

तभी उस भीड़ को चीरता हुआ एक नौजवान प्रकट होता है, जिसके हाथ में कुछ पेपर्स होते है |

वह नौजवान आकर उन गार्ड्स को कहता है कि माँ जी का सामान वापस  उनके घर में रख दो और आप सब लोग यहाँ से चले जाओ, क्योंकि इस घर की मालकिन यही है |

आश्चर्य से वो बूढी अम्मा उस नौजवान को देखने लगी | उन्हें कुछ समझ नहीं आता है और ना गार्ड्स को ही |

गार्ड के इसका कारण पूछा तो  उसने कहा …. अभी अभी इस मकान के सारे कर्जो को मैं सेठ जी को चूका दिया है और  इस मकान के कागजात वापस लेकर यहाँ आया हूँ |

ये अम्मा अब यही रहने वाली है, इन्हें अब यहाँ से कोई भी नहीं निकाल सकता |

गार्ड्स ने उससे पेपर को लेकर चेक कर सही पाया  और वहाँ से चले जाते है |

तभी अम्मा उस नौजवान से पूछती है …आप मेरे लिए भगवान् बन कर इस मौके पर कैसे प्रकट तो गए |

इसपर नौजवान उस अम्मा के सामने ही फर्श पर बैठ गया  और उनके जिज्ञासा को शांत करने के ख्याल से कहा … क्या आपको याद है अम्मा ? ,

आज से तीस  साल पहले आप  आपके पति के साथ बनारस के  काशी  विश्वनाथ  मंदिर में दर्शन को पहुंचे थे | वही मंदिर के बाहर एक कोने में खड़ा पांच साल  का एक बच्चा आपसे कुछ पैसो की मदद माँग रहा था |

उस समय उसे  जोरों की भूख लगी थी और जाड़े के मौसम  के कारण ठण्ड से ठिठुर रहा था |

वह  काफी परेशानी में था क्योकि उसके माता पिता कुछ दिनों पूर्व ही गंगा स्नान के दिन उस  नदी में डूब गए थे | वह अनाथ हो गया था और उसे मदद करने वाला कोई नहीं था |

उसकी बातें सुन कर आपके पति ने पैसे देने से आप को रोका था | उन्होंने कहा था …, यह बच्चा  झूठ बोल रहा है | इसे  पैसे मत देना | यह पैसा लेकर  कोई नशा कर लेगा ..,ड्रग्स ले लेगा ||

लेकिन अपने पति  के मना  करने के बाबजूद आप ने अपने पर्स में  जितना  कैश था सब आपने उसे दे दिया था और साथ में एक  लॉकेट  गले में पहना दिया और कहा था ..यह लॉकेट लकी चाम है, इसे हमेशा अपने  साथ रखना | यह हर मुसीबत  से तुम्हारी रक्षा करेगा |

उसने अपने गले में पहने उस लॉकेट को दिखाते हुए कहा ….यह देखिये आप का वही  लॉकेट है और वह छोटा बच्चा मैं ही हूँ |

मैं आप लोगों का  ना तो नाम जानता था और ना ही पता |  मैं आपलोगों को बहुत ढूंढने की कोशिश की लेकिन आप से मिल नहीं सका |

आपने जो पैसे दिए थे उसकी मदद से मैं पढाई शुरू की और उन तीस सालों में अपने लगन और मेहनत से आज एक कामयाब  बिल्डर बन गया हूँ |

एक दिन मैं लैपटॉप पर मकान खरीद बिक्री की साईट पर सर्च कर रहा था तभी मैंने  इन्टरनेट पर आपके मकान की नीलामी की खबर देखा | मैं उसमे  फोटो देख कर आपको पहचान लिया और मेरी खोज भी पूरी हो गई |

मैं फटाफट इस मकान के लिए सेठ जी से मिला और आपके बारे में सारी जानकारी प्राप्त हुई | मैंने  सेठ जी के बकाया के सारे पैसे को चुकाया और आज इस मकान को वापस कर रहा हूँ |

 मकान के पेपर  अम्मा को देते हुए कहा ..आज से तीस साल पहले आपने जो मेरी मदद की थी, मेरी लाइफ सँवारी थी |

मैं चाहता हूँ कि आप की लाइफ इस उम्र में दुखो और तकलीफों में ना गुज़रे, अब मैं आपकी लाइफ संवारना चाहता हूँ |

और अम्मा, मैं आपको आपका यह लॉकेट वापस कर रहा हूँ ताकि यह लॉकेट अब आगे आपको सभी मुसीबतों से सुरक्षा करता रहे |

राजेश की बातों को सुनकर अम्मा को वो सारी घटनाएँ याद आ गई | उन्होंने राजेश को गौड़ से देखा….अम्मा के आँखों में आँसू थे ….ख़ुशी के आँसू  |

उन्होंने राजेश को गले लगा लिया और कहा …भगवान् ने मुझे दूसरा बेटा भेज दिया है |

यह कहानी  बताती है कि अगर आप ने दुआएं कमाई है तो आपका साथ ऊपर वाला ज़रूर देगा और  नीचे वाले आपका कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे |

पैसा तो हर इंसान कमाता है, पर  दुआ कमाना सबसे मुश्किल काम  है |

हमें अच्छे कर्म करना चाहिए . ज़रुरतमंद को मदद करनी चाहिए  और दुआएं कमाना चाहिए |

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