
यह कविता एक ऐसे घर की कहानी है जिसने हँसी, प्यार और परिवार की गर्माहट को कभी अपने भीतर सँजोया था। माँ की विदाई के बाद वही घर स्मृतियों, सन्नाटों और टूटे हुए उजालों का पात्र बन जाता है।
कविता माँ की उपस्थिति को महसूस कराता है और शब्दों के माध्यम से उस घर में फिर से धड़कनें लौट आती हैं। यह कविता याद, खोए हुए स्नेह, और माँ के अदृश्य साथ का हृदयस्पर्शी चित्रण है।
यह वही घर है…
यह वही घर है…
जहाँ दीवारों ने भी साँसें ली थीं,
जहाँ हँसी का एक छोटा-सा दीपक
तूफ़ान में भी सदा जलता रहा था।
तीन कमरों की वह दुनिया,
जिसमें माँ की हथेलियों की गर्माहट थी,
और पिताजी की यादों का सहारा,
जो हर मुश्किल को हल्का कर देता था।
दरवाज़े पर टँगी पुरानी घंटी
आज भी हिलती है हवा के संग,
पर अब उसकी आवाज़ में
स्वागत नहीं, सन्नाटा झरता है।
माँ जब तक साथ थी—
घर सचमुच का घर था,
तब दीवारें धड़कती थीं,
छत आशीर्वाद-सी सिर पर थी।
उसके जाने के बाद
सब कुछ अपनी जगह है,
पर कुछ भी वैसा नहीं।
रातें अब ठंडी नहीं—खाली लगती हैं,
चाँदनी आकर भी उजाला नहीं करती।
खिड़कियों पर धूप तो टिकती है,
पर घर में अब सुबह नहीं होती।
मैं… बस ख़ामोश बैठा रहता हूँ
घर के एकांत कोने में,
जहाँ माँ बैठकर कहानियाँ सुनाती थी,
और आँसू मनमानी करते जाते हैं।
मैं उन्हें अब नहीं रोकता—
बस काग़ज़ पर गिरने देता हूँ,
देखता हूँ वक़्त की बेवफ़ाई
उन्हें अक्षरों में बदलने देती है।
शायद मेरी ये कविताएँ
किसी की आँखों तक न पहुँचें,
पर मेरे लिए यह काफी है कि
हर शब्द में माँ की याद है।
इस सूने घर की धड़कनें
धीरे-धीरे फिर सुनाई देती हैं।
लिखते समय अक्सर मैं
यहाँ अकेला नहीं होता—
माँ मेरे शब्दों के बीच
चुपके से आकर बैठ जाती है,
और यह घर एक पल को
फिर से घर बन जाता है।
(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com

Categories: kavita
very nice .
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Thank you so much.
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What a sensitive and emotional text, my friend.
It transforms the mother’s absence into a living presence, showing how love continues to inhabit the home even in silence and memories.
Thank you for this touching and human sharing.
May you have a wonderful weekend, with peace in your heart and good memories illuminating your days. 🙂🙏✨🧘🏻♂️🪷✍🏻
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