#भावना

# रूह की आवाज़ #

कभी-कभी जीवन की भीड़ और शोर में हम यह भूल जाते हैं कि हम वास्तव में कौन हैं। हम नाम, पहचान, सफलता और असफलता के जाल में उलझते रहते हैं—और धीरे-धीरे अपनी ही रूह की आवाज़ से दूर हो जाते… Read More ›

# मौन की आवाज़ #

यह कविता मौन की उस गहराई को उजागर करती है जहाँ शब्द थम जाते हैं और भावनाएँ स्वयं बोलने लगती हैं। यह जीवन के दर्द, स्मृतियों, विश्वास और भीतर जलते प्रकाश को बड़े सहज और संवेदनशील तरीके से व्यक्त करती… Read More ›

# अजब सा सफ़र #

यह ग़ज़ल जीवन की उस गहरी सच्चाई को छूती है, जहाँ हर मुस्कान के पीछे एक अनकहा कारण छिपा होता है। इसमें सफ़र, संघर्ष, मौन और आत्मा की उस अनंत लौ का ज़िक्र है, जो हर टूटन के बाद भी… Read More ›

# जब मुस्कान बेवजह थी #

यह चित्र बचपन की उस सच्ची और बेफिक्र खुशी को पकड़ता है, जहाँ मुस्कान किसी वजह की मोहताज नहीं होती। कीचड़ से सना चेहरा और हवा में उलझे बाल—ये अव्यवस्था नहीं, बल्कि आज़ादी के प्रतीक हैं। यह पल हमें याद… Read More ›

# भावनाओं की चुप्पी #

भावनाएँ शब्दों से परे होती हैं—ये ना चाहकर भी दिल पर दस्तक देती हैं, यादों को जगाती हैं और हमें हमारी ही गहराइयों से मिलाती हैं। कभी प्रकाश बनकर, कभी धुंध बनकर, तो कभी एक ख़ामोश स्पर्श की तरह। यह… Read More ›

# ए मेरे शहर…

यह कविता एक ऐसे शहर को संबोधित है जो सिर्फ़ ईंट-पत्थर का नहीं, बल्कि यादों, रिश्तों और बीते हुए समय का घर है। यह बचपन की मासूमियत, दोस्ती की गर्माहट और उम्र के साथ आए सन्नाटे के बीच का एक… Read More ›

# हाँ, मैं सड़क हूँ #

हाँ, मैं सड़क हूँ, हाँ, मैं सड़क हूँ,अनगिनत मौसमों की गवाह।धूप की तपिश सहती,बारिश की ठंडक ओढ़े,मैं यहीं की यहीं पड़ी हूँ..स्थिर, मगर सब कुछ देखती हुई। रोज़ नए मुसाफ़िर मुझ पर से गुज़रते हैं,कुछ अपने से, कुछ बिल्कुल अजनबी।सब… Read More ›

“अधूरे लम्हों की गर्माहट ”

यह कविता खोए हुए स्पर्श, अधूरे लम्हों और आजीवन चलने वाली मोहब्बत की वह खामोश तड़प बयां करती है, जो दिल को तोड़ती भी है और भरती भी है। # अधूरे लम्हों की गर्माहट # हवाओं में खोए हुए वो… Read More ›