#खुशी

# मैं जो लिखता हूँ #

यह कविता एक ऐसे लेखक की आत्मस्वीकृति है, जो दिखावे से नहीं, अनुभव और संवेदना से लिखता है। यह रचना खामोशी, दर्द और भावुकता को कमजोरी नहीं, बल्कि रचनात्मक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। शब्दों के माध्यम से… Read More ›

# खोई हुई मुस्कान #

यह कविता बचपन की बेफिक्र हँसी और वर्तमान की समझदारी के बीच के अंतर को भावनात्मक रूप से उजागर करती है। यह सवाल उठाती है कि क्या हमने बड़े होकर कुछ पाया है या अनजाने में कुछ खो दिया है।… Read More ›

# यादों के उस पार #

यह कविता जीवन की उन भावनात्मक पगडंडियों का चित्रण है जहाँ अतीत की यादें, खोए हुए पल, रूठे हुए अपने और अधूरे सपने दिल में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। इसमें बचपन की मासूमियत, रिश्तों की गर्माहट, और समय के… Read More ›

# भावनाओं की चुप्पी #

भावनाएँ शब्दों से परे होती हैं—ये ना चाहकर भी दिल पर दस्तक देती हैं, यादों को जगाती हैं और हमें हमारी ही गहराइयों से मिलाती हैं। कभी प्रकाश बनकर, कभी धुंध बनकर, तो कभी एक ख़ामोश स्पर्श की तरह। यह… Read More ›

“अधूरे लम्हों की गर्माहट ”

यह कविता खोए हुए स्पर्श, अधूरे लम्हों और आजीवन चलने वाली मोहब्बत की वह खामोश तड़प बयां करती है, जो दिल को तोड़ती भी है और भरती भी है। # अधूरे लम्हों की गर्माहट # हवाओं में खोए हुए वो… Read More ›

# रूह का सफ़र #

रूह का सफ़र”—यह केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा आंतरिक अनुभव है जहाँ मन अपनी गहराइयों में उतरकर खुद से मिलता है। इस सफ़र में दुनिया की चमक-दमक, नाम-दौलत, रिश्तों की भाग-दौड़ सब पीछे छूट जाते हैं, और… Read More ›

# वक़्त का पैग़ाम #

यह कविता “वक्त” की अनमोलता और उसकी विविधताओं पर केंद्रित है। यह बताती है कि जीवन में सुख-दुःख, संघर्ष और सफलता का अनुभव समय के साथ आता है। जो व्यक्ति समय की चाल को समझकर उसके अनुसार चलता है, वही… Read More ›

# ख्वाबों के पंख#

यह कविता उन ख्वाबों और इच्छाओं के बारे में है जिन्हें हम अपने भीतर संजोते हैं। डर और असफलताओं के बावजूद, असली खतरा तब होता है जब हम अपने ख्वाबों को मरने देते हैं और जिंदा रहकर भी अपने अंदर… Read More ›