# तूं क्यों उदास है ?

यह कविता जीवन की अनिश्चितताओं और संघर्षों के बीच धैर्य और सकारात्मक बनाए रखने का संदेश देती है। यह हमें याद दिलाती है कि जीवन का सफर आसान नहीं होता, लेकिन कठिनाइयों के बावजूद हमें अपने इरादों को मजबूत रखना चाहिए।

मुझे आशा है आप इसे पसंद करेंगे

तूं क्यों उदास है,

ऐ दिल, बता, आज तू क्यों उदास है,
वक़्त की ठोकरों से क्यों तू हताश है?
यूँ भी ज़िंदगी का सफ़र आसान नहीं होता,
चाहे इंसान कितना भी बड़ा और ख़ास है।

उम्र गुज़ार दी, कितनों ने इसे समझने मे
फिर भी ज़िंदगी की पहेली सुलझा नहीं पाते है
यूं तो कोशिश सब करते है ज़िंदगी जीने की
पर वही ज़िंदगी को मौत से बदतर बताते है

कभी ख़ुशी, कभी ग़म—ये तो चलता रहता है,
ज़िंदगी हर रोज़ अपना रंग बदलता रहता है।
किसी के रोने या उदास होने से क्या होगा?
ज़िंदगी के रंग मंच पर नाटक चलता रहता है।

बस मेहनत करो और अपने इरादों को पक्का रखो,
अपने सपनों को संजोकर दिल में ज़िंदा रखो।
देखना एक दिन तुम्हारी ये मिहनत रंग लाएगी ,
और देखते-देखते तुम्हारी भी किस्मत संवर जाएगी।

छोड़ो उदासियों को और  खुशियों की चादर ओढ़ो,
अपने टूटे हुए सपनों को तुम फिर से जोड़ो।
बदलाव की शुरुआत तो तुम्हें ही करना है ,
दौड़ जितना है तो ज़रा और तेज़ दौड़ो।

ऐ दिल, बता, क्या अब भी तू उदास है?
या तेरे भीतर अभी भी जीत की आस है ।
रात चाहे कितनी भी लंबी हो जीवन में,
अँधेरे रात के बाद नई सुबह तुम्हारे पास है।

(विजय वर्मा)

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4 replies

  1. वाह…. उत्कृष्ट सृजन…
    “तुम बदलो तो ये वक़्त भी बदल जायेगा!”

    Liked by 2 people

    • धन्यवाद! आपकी सराहना प्रेरणा देती है।
      सही कहा आपने, जब हम खुद को बदलते हैं, तो समय और परिस्थितियाँ भी हमारे साथ कदम मिलाने लगती हैं।
      इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।

      Liked by 1 person

  2. very nice.

    Liked by 3 people

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