
यादें भी अजीब होती हैं जीवन के उन अनमोल पलों की भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जो वक़्त बीत जाने के बाद भी हमारे दिल में जीवित रहते हैं। कभी ये चेहरे पर मुस्कान लाती हैं, तो कभी आँखों को नम कर जाती हैं।
ये कविता यादों के सुख-दुःख, अपनों की कमी और उस अनकहे रिश्ते को समर्पित है, जो अतीत को हमारे वर्तमान से जोड़कर रखता है। क्योंकि कुछ पल बीत जाते हैं, कुछ लोग बिछड़ जाते हैं, लेकिन उनकी यादें ताउम्र हमारा साथ निभाती हैं।
यादें भी अजीब होती हैं
कुछ यादें अँधेरे में भी चमकती हैं,
बुझते हुए दिल में उम्मीद जगाती हैं।
कभी रोशनी बनकर राह दिखाती हैं,
तो कभी हमें बीते कल में ले जाती हैं।
कुछ यादें तपती धूप में
शीतल छाँव का एहसास कराती हैं,
कुछ होंठों पर मुस्कान सजाती हैं,
तो कुछ आँखों को नम कर जाती हैं।
सचमुच, यादें भी अजीब होती हैं,
कभी अपनेपन का एहसास कराती हैं,
तो कभी अपनों की कमी खलने पर
मन को तन्हाइयों से भर जाती हैं।
कभी एकांत में चुपके से आती हैं,
मन के बंद दरवाज़े खटखटाती हैं,
कभी नींद से जगा देती हैं,
तो कभी रात भर सोने नहीं देती हैं।
कभी बीते लम्हों की खुशबू बनकर
साँसों में चुपचाप उतर जाती हैं,
कभी किसी अपने की आवाज़ बनकर
कानों में गूँजती रह जाती हैं।
जब यादें सिर चढ़कर बोलती हैं,
तो लफ़्ज़ भी ख़ामोश हो जाते हैं,
दिल में उठते तूफ़ानों के आगे
सारे तर्क बेमानी हो जाते हैं।
कुछ यादें ऐसी भी होती हैं,
जिन्हें भुलाने की कोशिश करते हैं,
जितना दूर भागते हैं उनसे,
उतना ही उनके करीब होते हैं।
कभी लगता है, काश! वो पल
फिर से लौटकर आ जाएँ,
जिनमें अपने साथ हुआ करते थे
और खुशियाँ करीब रहती थीं।
मगर वक़्त कहाँ कभी लौटता है,
न बीता कल वापस आता है,
बस यादों का एक कारवाँ है,
जो दिल में चलता जाता है।
फिर भी, ये यादें ही तो हैं,
जो जीने का सहारा बनती हैं,
टूटे हुए मन के आँगन में
उम्मीद के फूल खिलाती हैं।
सोचता हूँ, अगर यादें न होतीं,
तो जीवन कितना सूना होता,
न हँसने की कोई वजह होती,
न आँसुओं का कोई किस्सा होता।
यादें ही तो हैं,
जो बीते कल को आज में जीती हैं,
टूटे हुए दिल के किसी कोने में
उम्मीद के दीप जलाए रखती हैं।
हाँ, मेरी यादें ऐसी ही हैं—
कुछ मीठी, कुछ खट्टी, कुछ अनकही,
कुछ दिल के बेहद करीब हैं,
कुछ की टीस अब भी है वही।
सच है, यादें ही जीवन का सार होती हैं,
कभी आँसू, कभी मुस्कान होती हैं,
वक़्त छीन लेता है भले ही सब कुछ,
यादें ही हैं, जो ताउम्र साथ होती हैं।
— विजय वर्मा
www.retiredkalam.com

Categories: kavita
Verma ji, this is a beautifully penned poem. Your verses capture the true essence of memories—how they can both comfort and ache, how they keep our loved ones close even when time moves on. The lines about memories being a caravan that keeps moving in the heart are especially touching. Thank you for sharing such an emotional and heartfelt piece—it truly resonates.🤝
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Thank you so much for your beautiful words and heartfelt appreciation. 🙏❤️ Memories are indeed a precious caravan that keeps travelling through the corridors of our hearts, bringing smiles to our lips and sometimes tears to our eyes. I’m glad my verses touched your heart.
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Very nice.
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Thank you so much.
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