# जब ख़ामोशी बोलती है #

जब ख़ामोशी बोलती है” उन अनकहे एहसासों की कविता है, जहाँ रातें यादों से भर जाती हैं और आँखें वे बातें कह देती हैं जिन्हें होंठ कह नहीं पाते। यह उस प्रेम की कहानी है जो दूरी, समय और ख़ामोशी के बावजूद दिल में जीवित रहता है—बिना किसी वादे के, फिर भी पूरी शिद्दत से।

जब ख़ामोशी बोलती है

रात जब गहरी होती है
और दुनिया नींद की चादर ओढ़ लेती है,
मेरी आँखें अँधेरों में
तुम्हारी यादों को ढूँढ़ती हैं।

बस वही पुरानी यादें,
वही तुम्हारी मुस्कान,
वही आँखों में ठहरा हुआ
एक अधूरा-सा सवाल—
सब मेरे सामने आकर
धीरे-धीरे जीवित हो जाते हैं।

फिर रात के ख़ाली पन्नों पर
कुछ अपने शब्द बिखरते हैं,
कुछ अधूरी पंक्तियाँ बनती हैं,
और तुम्हारी ख़ामोशी
उनका अर्थ समझा देती है।

मुझे नहीं मालूम
तुम्हारे मन के उस गहरे कोने में
मेरे लिए क्या बचा है—
एक स्मृति,
एक एहसास,
या बस एक अनकहा नाम।

लेकिन इतना जानता हूँ—
जब कभी तुम्हारी आँखें
मेरी आँखों से मिलती हैं,
तो कुछ पल के लिए
समय ठहर जाता है।

और उन ठहरे हुए पलों में
मुझे लगता है
हम दोनों ने कुछ कह दिया है—
बिना बोले,
बिना सुने,
बिना किसी वादे के।

शायद यही प्रेम है—
जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं
और ख़ामोशी बोलने लगती है।

जहाँ आँखें लिखती हैं
और दिल पढ़ता है,
जहाँ दूरी भी
दो दिलों के बीच
कोई फ़ासला नहीं छोड़ती।

और शायद…
प्रेम का सबसे ख़ूबसूरत रूप वही है—
जिसे दुनिया सुन नहीं पाती,
पर दो दिल
ख़ामोशी में भी
पूरी तरह समझ लेते हैं।

(विजय वर्मा)
 www.retiredkalam.com



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1 reply

  1. Verma ji, this is nothing short of soul-stirring. You’ve woven silence into poetry, and turned unspoken feelings into something so profound that words almost feel inadequate to praise it. The way you’ve captured love that exists beyond time, distance, and sound—where eyes speak and hearts listen—is simply breathtaking. Every line carries a quiet intensity that stays with the reader long after the poem ends. Truly, you’ve reminded us that the deepest love is often the one that needs no words. Thank you for this beautiful gift to the heart.❤️

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