# ख्वाबों के पंख#

यह कविता उन ख्वाबों और इच्छाओं के बारे में है जिन्हें हम अपने भीतर संजोते हैं। डर और असफलताओं के बावजूद, असली खतरा तब होता है जब हम अपने ख्वाबों को मरने देते हैं और जिंदा रहकर भी अपने अंदर की आग को बुझा देते हैं।

यह कविता हौसले, उम्मीद और जीवन की सच्ची उड़ान की बात करती है।

ख्वाबों के पंख

ख्वाबों के पंख लगाकर,
जब उड़ने की ठान ली थी,
तो आसमान ने भी कहा —
“चलो, देखता हूँ कितनी उड़ान बाकी है!”

डर तो था…
हर गिरने से, हर ठोकर से,
पर खतरनाक वो नहीं था —
जो चोट दे गया |
खतरनाक था वो पल —
जब मैंने उड़ना छोड़ दिया ।

कुछ हसरतें राह में छूट गईं,
कुछ अरमानों ने नींदें चुरा लीं,
पर बुरा तो बस इतना लगा —
कि मैं खुद से दूर चला गया।

खतरनाक नहीं था हार जाना,
न ही तन्हा रह जाना,
खतरनाक था वो वक्त,
जब दिल ने कहना छोड़ दिया —
“मुझे अब भी कुछ चाहिए |

अब समझ आया —
ज़िंदगी साँसों से नहीं चलती,
चलती है उन ख्वाबों से,
जो हर सुबह आँखों में मुस्कुराते हैं,
और हर रात उम्मीदों में सो जाते हैं।

तो उड़ता रहूँगा…
चाहे पंख जल जाएँ,
पर रुकूँगा नहीं —
क्योंकि खतरनाक वो दिन होगा,
जब मैं ज़िंदा तो रहूँगा,
पर भीतर सब कुछ मर जाएगा।

(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com

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Categories: kavita

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16 replies

  1. very nice .

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  2. So much inspiring poem it is Sir. You have successfully conveyed millions of motivations only through a simple and short poem. Hats off to your creativity sir. Truly u are an inspiring personality.

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    • Thank you so much for your kind and uplifting words! 🌸🙏
      Your appreciation truly means a lot to me. I’m humbled that the poem could touch your heart and inspire you in some way.
      It’s encouragement like yours that keeps the pen flowing and the spirit motivated. 🌟✨

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  3. प्रिय मित्र वर्मा जी,हर शब्द हौसले की उड़ान देता है — ये कविता सिर्फ पढ़ी नहीं जाती, महसूस की जाती है।

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    • बहुत-बहुत धन्यवाद, प्रिय मित्र। 🙏
      आपका यह स्नेहिल और प्रेरक संदेश पढ़कर दिल को बड़ी तसल्ली मिली।
      सच में, अगर मेरे शब्द किसी के हौसले को उड़ान दे सकें, तो यही मेरी सबसे बड़ी खुशी है। 🌸

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