# बरसात की यादें #

यह एक भावनात्मक कविता है जो बारिश के मौसम से जुड़ी यादों, भावनाओं और प्रेम की गहराई को दर्शाती है। यह कविता उस भीगे हुए एहसास की कहानी कहती है, जहाँ हर बूँद बीते लम्हों की दस्तक देती है और दिल को पुराने रिश्तों की मिठास में भिगो देती है।

कविता में बारिश केवल मौसम नहीं, बल्कि एक अंदरूनी संवाद बन जाती है — आत्मा की गहराई से निकलती हुई स्मृतियों की सरगम। यह रचना आप को अपने ही किसी खास पल में लौटा ले जाती है, जब मन भीगा था, और दिल ने चुपचाप कुछ महसूस किया था।

बरसात की यादें

बरसात में, कुछ यादें भीग जाती हैं,
पुरानी डायरी के पन्ने खुल जाते हैं।
खिड़की से झाँकती बूँदें कुछ कह जाती हैं,
मेरे तन्हा दिल को फिर से महका जाती हैं…

चाय की प्याली और वो पुरानी ग़ज़ल,
तेरे बिना सब लगे जैसे एक अधूरा पल।
हर बूँद ले आई तेरी मुस्कान की बात,
मिट्टी की ख़ुशबू में है तेरी छुपी हुई बात…

बरसात में वो पहला मिलना याद आया,
तेरे भीगते बालों में कुछ तो था जो समाया।
जिसे समेट के रखा था दिल के किसी कोने में,
आज फिर से उभर आया है इन बरसाती सुरों में…

मैं चल पड़ा था ज़िंदगी की किसी और राह पे,
पर बारिश ने रोक लिया इस मोड़ पे।
हर क़दम पर तेरी हँसी की गूँज सुनाई दी,
जैसे हर बूँद में तेरे ख्वाब समाई थी…

बरसात में, आँसुओं का फ़र्क़ मुश्किल हो जाता है,
दिल रोता भी है, और हँस भी लेता है।
ये मौसम सिर्फ़ भीगता नहीं, जगाता भी है,
जो सोए थे जज़्बात, उन्हें सुलगाता भी है…

कभी तो लगता है, बरसात तेरी तरफ़ से पैग़ाम है,
तेरी यादों का प्यारा-सा सलाम है।
क्या तू भी किसी कोने में भीग रही है आज,
मेरी तरह तू भी यादों में जी रही है आज?

बरसात में सब कुछ नया लगता है,
फिर भी अंदर कुछ तो पुराना जगता है।
वक़्त के इस सफ़र में, तू साथ हो या ना हो,
पर बरसात में, तू हमेशा पास लगता है…

( विजय वर्मा )



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4 replies

  1. very nice

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