
यह कविता जीवन की यात्रा को दर्शाती है, जहाँ हर मोड़ पर एक नया अनुभव, एक नई सीख होती है। रिश्ते-नाते, सुख-दुख, हार-जीत, सब कुछ अस्थायी है, लेकिन प्रेम, दया और करुणा के सहारे हम इसे सुंदर बना सकते हैं।
प्रतिस्पर्धा और भौतिकता से परे, प्रकृति और आत्मिक शांति में जीवन का असली सार मिलता है। अंततः, हमें प्रेम और करुणा के माध्यम से इस संसार को स्वर्ग बनाने का प्रयास करना चाहिए।
जीवन – एक यात्रा
यह जीवन तो एक यात्रा है,
जहाँ उम्मीदें ही सहारा हैं।
अब समझा, और जाना मैंने,
यहाँ कुछ भी नहीं हमारा है।
रिश्ते-नाते, धूप-छाँव से,
सुख-दुख के हर पड़ाव से,
बस चलते ही जाना है,
और सबको यही समझाना है।
रोका नहीं किसी ने मुझको,
मैं ही खुद को रोक रहा था।
जीवन तो एक बहती नदी है,
संग बहने की सोच रहा था।
भय नहीं मुझे बिछड़ने का,
ना चिंता नाम बिगड़ने का।
जिसने बांटा, वही रहेगा,
समय आया ये समझने का।
सड़क किनारे छोटा व्यापारी,
कभी ठगता, कभी हँसाता है।
यहाँ मुस्कुराते लोगों के चेहरे,
आईने को नज़र लगाता है।
बचपन और बुढ़ापे के किस्से,
दोहराने में रस मिलता है।
चाहे जितनी बार उन्हें सुनो,
हर बार उनमें मूल्य दिखता है।
प्रतिस्पर्धा से अब मुक्त हूँ मैं,
किसे हराऊँ, किसे जिताऊँ?
सब अपनी-अपनी राह चले,
मैं भला किस राह जाऊँ?
बाज़ार की चमक-दमक से परे,
अब प्रकृति की छाँव सुहानी है।
मंद-मंद हवा के झोंके में,
मिट्टी की खुशबू जानी-पहचानी है।
अब बस मौन ही उत्तर मेरा,
शब्दों को क्यों परेशान करूँ?
जो समझो, बस उतना ही काफी,
क्यों किसी से पहचान करूँ?
आत्मा मेरी प्रभु का दान,
चेतन मिला माँ-बाप से।
नाम दिया परिवार ने मुझको,
क्यों शिकायत करूँ आप से?
हर क्षण को जीना सीख लिया,
हर धड़कन को महसूस किया।
अब प्रेम, दया, और करुणा से,
मैंने तो खुद को जीत लिया।
आखिर में तो अंत मिलेगा,
मिट्टी में मिल जाना है।
प्रेम और करुणा के बूते,
दुनिया को स्वर्ग बनाना है।
(विजय वर्मा)

BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…
If you liked the post, please show your support by liking it,
following, sharing, and commenting.
Sure! Visit my website for more content. Click here
Categories: kavita
very nice
LikeLiked by 2 people
Thank you so much.
LikeLike
hi sir my self yashwant from working pan,
please suggest me in future always I contact you from WordPress mediums
LikeLiked by 1 person
Hi Yashwant,
Thank you for reaching out! You are always welcome to connect with me through WordPress. I look forward to engaging with you there and sharing thoughts on writing, creativity, and more.
LikeLike