# चुप रहना सीख लिया#

यह कविता उन भावनाओं को दर्शाती है जो दर्द और अनुभवों के बाद होती हैं। यह आत्म-संयम, चुप रहने की शक्ति, और जीवन के उतार-चढ़ाव में तालमेल बिठाने की सीख देती है।

जो शब्द पहले दिल से निकलते थे, अब खामोशी में छिप जाते हैं, क्योंकि समय ने हमें सहने और मुस्कुराने की कला सिखा दी है।

चुप रहना सीख लिया

हमने भी अब सहना सीख लिया,
हर दर्द को हँसकर कहना सीख लिया।
जो कह नहीं सकते थे किसी से,
अब ख़ुद ही ख़ुद से कहना सीख लिया।

पहले हर बात पे रो देते थे,
अब मुस्कुरा कर सहना सीख लिया।
जो सवाल उठते थे दिल में कभी,
अब उन्हें दबाकर रखना सीख लिया।

कभी बहुत उम्मीदें थी अपनों से,
अब ख़ुद को अपना कहना सीख लिया।
जो छूट गया, वो ख्वाब समझकर,
बस आँखों में सपने बुनना सीख लिया।

बोलते तो शायद दिल छलनी हो जाता यारो
तो, खामोश लफ्ज़ों को चुनना सीख लिया।
कभी तन्हाइयाँ चुभती थीं बहुत,
अब चुप्पियों में रहना सीख लिया
हाँ, मैंने अब जीना सीख लिया |
(विजय वर्मा)

BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…

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6 replies

    • बहुत बहुत धन्यवाद ,
      आपकी सराहना मेरे लिए अनमोल है। 🙏😊
      आपके शब्दों से प्रेरणा मिलती है कि और भी भावनात्मक और सुंदर रचनाएँ लिखता रहूँ। ऐसे ही अपना स्नेह बनाए रखें! 💖✨

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