
यह कविता भावनाओं के छिपे हुए रंगों को उजागर करती है, जहाँ मुस्कान के पीछे छुपे आँसू और रिश्तों के बदलते रंगों की कहानी बयां की गई है। यह कविता इंसानी जज़्बातों, अधूरी ख्वाहिशों और टूटे सपनों की आवाज़ को शब्दों में पिरोती है।
पाठकों को यह कविता आत्ममंथन और संवेदनाओं की गहराई में ले जाती है, जहाँ दर्द और उम्मीद एक साथ चलते हैं।
“मुस्कान के पीछे”
तुम मेरी मुस्कान देख रहे हो,
मैंने दर्द के साये में रातें गुज़ारी हैं।
तुम मेरी आँखों की चमक देख रहे हो,
हम रो नहीं सकते ये बेबसी हमारी है |
तुम मेरी बातों में मिठास खोजते हो,
मैंने यहाँ चुप्पियों को चीखते सुना है।
तुम मेरी राहों में फूलों की चाह रखते हो,
पर मैंने तो खुद ही कांटों को चुना है |
तुम साल बदलते देख रहे हो,
मैंने साल भर अपनों को बदलते देखा है।
तुम रिश्तों की गर्माहट महसूस करते हो,
मैंने रिश्तों को बर्फ सा जमते देखा है।
तुम तो हरदम बहारों के गीत गाते हो,
मैंने सपनों को पतझर सा गिरते देखा है।
तुम प्रेम की बातें करते हो,
मैंने अधूरी मोहब्बत को तड़पते देखा है।
तुम मेरी ग़ज़ल में लय खोजते हो,
मैंने दर्द को अश्कों में बदलते देखा है।
तुम उम्मीद के रंग सजाते हो,
मैंने अंधेरों को दिल में पलते देखा है।
तुम तो बस हँसी के पल चुराते हो,
मैंने ज़िंदगी को आँसू में बहते देखा है।
तुम्हें बस मेरी मुस्कान नज़र आती है ,
मैंने दर्द को मुस्कान में लिपटते देखा है।
(विजय वर्मा)

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बहुत खुशनसीब होते हैं वो जिन्हें मुस्कान जिन्हें मयस्सर होती है, मुस्कान आपके दिल में छुपी मोहब्बत का आईना होती है और कहते हैं कि आईना कभी झूठ नहीं बोलता …..और मोहब्बत के असर से दुनिया में कौन नावाकिफ़ है। बस यही वजह है कि मुस्कान इतनी असरदार होती है।
लाजबाव प्रस्तुति साधुवाद भाई जी 🙏
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बहुत बहुत धन्यवाद, डिअर। आपके शब्द और भावनाएं बिल्कुल सही है। मुस्कान बहुत असरदार होती है।
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very nice
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Thank you so much.
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