
वक्त, एक ऐसा रहस्यमय साथी है जो हर पल हमारे साथ चलता है। कभी हमें संभालता है, तो कभी हमारी परीक्षा लेता है। यह हमारे जीवन का सच्चा गवाह है हमें आगे बढ़ने का हौसला देता है।
इस कविता में, वक्त के साथ अपने रिश्ते को बताया है — वक्त केवल एक कालचक्र नहीं, बल्कि हमारे जीवन का सच्चा गवाह और मार्गदर्शक है।
एक ऐसा बंधन जो जीवन को नई दिशा और पहचान देता है।
“मेरा वक्त: मेरा गवाह”
वक्त की चादर में लिपटी एक कहानी,
हर धड़कन में छुपी अनसुनी निशानी।
कभी रंगीन सपने तो कभी आंसुओं की धार,
हर मोड़ पर वक्त ने दिया नया उपहार।
कभी मुस्कान के झूले पर झुलाया,
कभी खामोशी में दर्द को सहलाया।
कभी राह दिखाकर भटका दिया,
तो कभी गिरा तो मुझे संभाल लिया।
वक्त मेरा साथी, वक्त मेरा दुश्मन,
हर पल देता है जीवन का वचन।
कभी सिखाता सब्र, कभी देता उड़ान,
तो कभी रोककर दिखाता नई पहचान।
इसकी रफ्तार में छुपा है एक राज,
हर पल जीने का सिखाता अंदाज।
वक्त से लड़ो या इसे अपनाओ,
इसके संग चलकर खुद को सजाओ।
ओ वक्त, तेरा करिश्मा है महान,
तू ही है मेरा सच्चा भगवान ।
साथ चलें हम, चाहे हो कैसी भी राह,
तू मेरा गवाह, और मैं बनूँ तेरा चाह।
(विजय वर्मा )

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Categories: kavita
very nice
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Thank you so much.
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Nice presentation dear Gentlemen
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Thank you so much for your kind words and warm appreciation!
I’m truly grateful for your support and encouragement—it means a lot to me. 😊✨
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