
यह कविता एक अनकही भावना को व्यक्त करती है, जो किसी अज्ञात चेहरे की ओर खिंचाव को महसूस कराती है। इसमें एक सुंदर ख्वाब और उसकी चाहत को वास्तविकता में बदलने की उम्मीद झलकती है।
प्रेम, रहस्य और आत्मीयता के भावों से बसी यह रचना आप को एक अदृश्य दुनिया की सैर कराती है, जहाँ सपनों और वास्तविकता का संगम होता है।
अनदेखा ख्वाब
कौन हो तुम, पहचाना कभी नहीं,
कहाँ हो तुम, जाना कभी नहीं।
तुम्हारी परछाईं सी कोई छवि,
मेरे दिल के करीब कहीं बसी।
जानता हूँ तो सिर्फ इतना,
तुम एक सुंदर ख्वाब हो,
जिसे मैं खोया खोया सा देख रहा हूँ,
और हर पल तुमसे कुछ कह रहा हूँ।
तुम्हारी हर मुस्कान में,
कोई अनकही बात छिपी है,
तुम्हारी हर सांस में,
कोई अनसुनी धुन बसी है।
सोचता हूँ, काश यह ख्वाब,
हकीकत की दुनिया में ढल जाये,
तुम्हारे साथ हर लम्हा,
इक नई दास्तान बन जाये।
तुम्हारी आंखों में बसी रौशनी,
मेरी राहों का चिराग बन जाये,
और इस प्यार की कहानी में,
हर शब्द दिल की आवाज़ बन जाये।
तुम कौन हो, ये जानने की जरूरत नहीं,
तुम कहाँ हो, अब तलाशने की फिक्र नहीं।
बस इतना काफी है कि तुम हो,
और अब ख्वाब देखने की ज़रूरत नहीं।
(विजय वर्मा)
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Categories: kavita
Beautiful poem 🌺🌺
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Thank you so much dear.
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very nice.
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Thank you so much.
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Love her gaze :))
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Glad you noticed.😊
There’s something captivating about it, isn’t there? 😄 Thank you!
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yeah.. animated, character ❤
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Thank you so much 😊
Animated characters bring such unique energy to storytelling.
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