
यह कविता हमारे जीवन की उन कठिनाइयों और संघर्षों को दर्शाती है, जिनसे हम सभी कभी न कभी गुजरते हैं। इस कविता के शब्द हमारी भावनाओं और संवेदनाओं को दर्शाता है | मुझे आशा है आप पसंद करेंगे |
अंधेरों में उम्मीद
आंखों में डूबते सपने, अब तैर रहे हैं,
जो सोचा था वो अब नहीं हो रहे हैं।
मेरी कल्पनाओं के रंग फीके पड़ रहे हैं,
मेरे जीवन के सच सामने आ रहे हैं।
जिंदगी जैसे एक अंधेरी गुफा है,
जिसमें सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है।
ना जाने कब तक रहेगा ये अंधेरा,
एक अनजाना डर मन को घेरा है।
इंसान बेबस देखता रह जाता है,
हाथों से फिसलते सपनों को,
आंखों में आंसू लेकर, इंसान
बस, यादों में खो जाता है।
हर दिन एक नई उम्मीद लाता है,
पर, हर रात वही अंधेरा छा जाता है।
मन में उठते सवालों को कैसे कहें,
जब हर तरफ सन्नाटा ही पाता है।
पर, इन अंधेरों में भी एक तारा टिमटिमाता है,
जो मेरी आशा की किरण बन जाता है।
और फिर, सपनों के टुकड़े को जोड़कर,
मन, फिर से उड़ान भरने लग जाता है ।
(विजय वर्मा)

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Categories: kavita
♥️💚🧡
Blessed and Happy afternoon 🌞
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Thank you so much, dear.
Have a nice day.
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very nice
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Thank you,
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