# गुज़रा हुआ ज़माना # 

बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं । हम सभी अपने बचपन में चिंतामुक्त जीवन जीते थे  । खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता था ।

माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों का प्यार और दुलार बड़ा अच्छा लगता था ।  सचमुच बचपन के दिन बड़े प्यारे और मनोरंजक थे ।

मुझे अपने बाल्यकाल की बहुत-सी बातें याद हैं । इनमें से कुछ यादें प्रिय तो कुछ अप्रिय भी है ।

छुट्टी के समय  गुल्ली-डंडा खेलना, दोस्तों के साथ धमा-चौकड़ी मचाना, टायर की गाड़ी चलाना , पतंग उड़ना , लट्टू चलाना मेरे पसंदीदा खेल थे |

इन कार्यो में कभी-कभी चोट या खरोंच भी लग जाती थी । मगर कोई फिक्र नहीं थी , अगले दिन ये कार्य फिर शुरू हो जाते थे |

बचपन के उन दिनों की यादों को  कविता के माध्यम से समेटने की प्रयास  कर रहा हूँ ..

गुज़रा हुआ ज़माना

दिल आज भी याद करता है

बचपन के गाँव  को

बरगद के छांव को

अपने कमीने दोस्तों को

कीचड़ में सने पांव को

पानी में तैरती कागज़ की नाव को.

अपना  दिल फिर  मचलता है |

गुल्ली डंडे से खेलने को 

टायर की गाड़ी ठेलने को 

कागज़ से बनाये पतंग उड़ाने को,

पिट्टो मार कर दोस्तों को रुलाने को

कबड्डी खेलते हुए दोस्तों को गिराने को |

दिल फिर बहकता है

बरसात में भींगने को

होली के मस्ती में झुमने को |

भांग  का  गिलास चूमने को

दिवाली में पटाका चलाने को 

दूसरों के देहरी से दीप चुराने को

काका  के खेत से चना उखाड़ने को

बचपन की बातें , दोस्तों की यादें 

आता है याद मुझको

अपना गुज़रा हुआ ज़माना ..

अब मुमकिन नहीं है यारों 

वहाँ  फिर से लौट के  जाना |

………….( विजय वर्मा )

मेरी कुछ यादें   हेतु  नीचे link पर click करे..



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12 replies

  1. अब मुमकिन नहीं है यारों

    वहाँ फिर से लौट के जाना |

    बहुत अच्छा

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  2. Sundar Kavita.

    Padke sukoon ( सुकून) mila

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  3. Bahut Sundar Kavita.Jo Jaa chuki hai kabhi vapas nahi aati.Magar yaad bahut majedar hota hai.

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