
यह कविता प्रकृति की सुंदरता और शांति के भाव प्रकट करता है । उसके हरियाली, झरने, वादियों, हवा, पहाड़ियों, ढलानों, रेत के किनारों, पक्षियों की चहचहाहट, और इसकी सुंदरता और आकर्षण को उजागर करता है।
कवि, प्रकृति को अपने प्यार और जीवन का स्रोत मानता है। वह प्रकृति में अपने अस्तित्व को ढूँढता है।
मुझे उम्मीद है कि यह कविता आपको पसंद आएगी।

प्रकृति
प्रकृति, तू मेरी आत्मा है,
तुझमें मैं खुद को खोजता हूँ,
तुझमें मैं अपनी शांति पाता हूँ,
तुझमें मैं अपना सुकून पाता हूँ।
तेरी हरियाली, तेरे झरने,
तेरी हसीन वादियों,
तेरी सुगंध भरी हवा,
मुझे मोहित कर लेती है।
तेरी ऊंची पहाड़ियों,
तेरी हरी भरी ढलानों,
तेरी सुनहरी रेत के किनारों,
मुझे रोमांचित कर देती है।
तेरी पक्षियों की चहचहाहट,
तेरी नदियों की लहरों की आवाज,
तेरी हवा में बहती खुशबू,
मुझे मंत्रमुग्ध कर देती है।
प्रकृति, तू मेरी ज़िंदगी है,
तुझमें मैं अपना अस्तित्व पाता हूँ,
तुझमें मैं अपना प्यार पाता हूँ,
तुझमें मैं अपना जीवन पाता हूँ।
(विजय वर्मा )
BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…
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Categories: kavita
अच्छी कविता।
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Thank you so much.
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nice
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Thank you so much❤
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प्रकृति प्रेम पर बहुत सुन्दर रचना है 🙏
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बहुत बहुत धन्यवाद dear .❤❤
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WELCOME
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I have visited your Blog and found useful and interesting.
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🩶✏️
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Thank you so much.❤❤
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Lovely lines, thanks.
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Thank you so much for your appreciation.
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बहुत बढ़िया ।
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न्बहुत बहुत धन्येआद , सर जी |
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A good poem depicting nature objectively!
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Yes, well said.
Thanks for appreciation.❤
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