# आज कुछ तो लिखूँ #

यह कविता एक लेखक के मन में उठते उन अनगिनत विचारों और भावनाओं की यात्रा है, जो हर सुबह एक खाली काग़ज़ और चलती हुई कलम के बीच जन्म लेते हैं। कभी पुरानी यादें, कभी प्रेम की कसक, कभी जीवन की खुशियाँ और कभी अधूरे सपने शब्दों का रूप लेने को बेचैन होते हैं।

अंततः कवि समझता है कि लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि अपने भीतर के एहसासों को अभिव्यक्त करने और जीवन को महसूस करने का माध्यम है।
जब तक दिल में एहसास बाकी हैं, तब तक लिखने की वजह बाकी है।”

# आज कुछ तो लिखूँ #

आज सुबह जब आँख खुली,
छत को देखा, कुछ देर सोचा,
मन के कोने से आवाज़ आई—
आज कुछ नया लिखूँ।

कुछ सच लिखूँ, कुछ ख़्वाब लिखूँ,
दिल की कोई अनकही बात लिखूँ।
अपनी कहानी, जग की कहानी,
या बीते कल की कोई निशानी लिखूँ?

लेकिन आज क्या लिखूँ?

आज फिर तेरी याद आई,
सूने मन में हलचल छाई।
तेरी आँखों की वो मस्ती,
तेरी हँसी, वो प्यारी शरारत,
तेरा अचानक सामने आना,
धीरे से मुस्काना, गीत गुनगुनाना—
यादों ने फिर दस्तक दी है,
दिल ने तेरी राह तकी है।

लेकिन तुझे कैसे लिखूँ?

अपनी जीत की कहानी लिखूँ,
या हार में छिपी नादानी लिखूँ?
खुशियों से सजा कोई पल लिखूँ,
या आँसुओं में भीगा कल लिखूँ?

तेरी मुस्कान को शब्दों में ढालूँ,
या तेरी नम आँखों को सँभालूँ?
पहली मुलाक़ात का जादू लिखूँ,
या अंतिम विदाई का दर्द लिखूँ?

आख़िर मैं क्या लिखूँ?

विरह की कोई ग़ज़ल लिखूँ,
या मिलन का मधुर गीत लिखूँ?
उन सपनों का हिसाब लिखूँ,
या अधूरे ख़्वाबों की किताब लिखूँ?

तभी भीतर से आवाज़ आई—
क्यों उलझा है शब्दों की परछाइयों में?
जीवन जैसा है, वैसा ही लिख दे,
जो दिल में है, काग़ज़ पर रख दे।

सुख मिले तो मुस्कान लिखना,
दुःख मिले तो भी अरमान लिखना।
गिर जाएँ आँसू, उन्हें बहने देना,
खुशी मिले तो खुलकर हँसने देना।

जब तक साँसों में रवानी है,
जब तक आँखों में कुछ पानी है,
जब तक दिल में एहसास पलते हैं,
तब तक शब्द भी राहें चलते हैं।

प्रभु चाहे जैसे दिन दिखाए,
धूप बिछाए या बादल लाए,
हर मौसम का सम्मान लिखूँ,
जीवन के नाम एक पैग़ाम लिखूँ।

अब समझा, कलम क्यों चलती है,
क्यों ख़ामोशी कविता बनती है।
लिखना केवल शब्द सजाना नहीं,
अपने होने का एहसास जगाना है।

आज कोई वादा लिखूँ, कोई पैग़ाम लिखूँ,
या अपने दिल के नाम एक सलाम लिखूँ।
जीवन मिला है, तो जीवन के गीत लिखूँ,
कल की चिंता छोड़कर, आज कुछ तो लिखूँ!

— विजय वर्मा
www.retiredkalam.com



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3 replies

  1. Dear Verma ji,

    This is a beautiful and deeply heartfelt poem. You have captured the restless journey of a writer’s mind so honestly—the way memories, love, joys, pain, and unfinished dreams all rise up with the morning and ask to be written. The repeated question, “आज क्या लिखूँ?” feels so natural and relatable, and the closing realization that writing is not just arranging words but expressing one’s very existence is truly touching.

    The lines “जब तक दिल में एहसास पलते हैं, तब तक शब्द भी राहें चलते हैं” will stay with the reader. Thank you for sharing such a thoughtful and inspiring poem. Please keep writing and keep giving words to life. 🙏✨

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  2. आपका लेखक मन रचनात्मक है सर जी,,अनमोल शब्दो और कविताएँ इसकी प्रतीक है 🙏🏻 शुभ रात्रि

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  3. वर्मा जी, लेखन की इस पूरी यात्रा में आपने एक लेखक के मन की जितनी सहज, सुंदर और सजीव तस्वीर प्रस्तुत की है, वह सचमुच हृदय को छू जाती है।
    कभी स्मृतियाँ शब्द बनती हैं, कभी प्रेम कविता में उतरता है, तो कभी जीवन के अनकहे अनुभव स्वयं कलम थाम लेते हैं। वस्तुतः लेखक विषय खोजकर नहीं लिखता, उसके भीतर के एहसास ही किसी दिन शब्दों का रूप लेने के लिए बेचैन हो उठते हैं।
    आपकी कविता का सबसे सुंदर पक्ष यही है कि अंततः आप लेखन को शब्दों की कला से आगे ले जाकर अपने अस्तित्व और जीवन से संवाद का माध्यम बना देते हैं। सच तो यह है कि जब हृदय संवेदनाओं से भरा हो, तब हर सुबह एक नई कविता जन्म लेने की प्रतीक्षा करती है। बहुत सुंदर एवं आत्मीय अभिव्यक्ति।

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