# तुम अच्छे लगते हो #

यह कविता किसी के बाहरी आकर्षण से आगे बढ़कर उसकी सादगी, आत्मविश्वास और भीतर छिपे दर्द को महसूस करने की कहानी है। यह उस निश्छल अपनत्व को व्यक्त करती है, जिसमें किसी को बदलने की नहीं, बल्कि उसकी खूबियों और कमियों सहित स्वीकार करने की चाह होती है।

सच्चा लगाव शायद यही है—किसी को वैसा ही पसंद करना, जैसा वह वास्तव में है।

तुम अच्छे लगते हो

जैसे हो तुम, वैसे ही रहो,
तुम मुझे अच्छे लगते हो।
झील-सी गहरी आँखें तुम्हारी,
और उन्मुक्त हँसी प्यारी—
तुम मुझे सच्चे लगते हो।

तुम्हारी सादगी में जाने क्या है,
एक अनकहा-सा जादू है,
बिना कुछ कहे दिल छू जाते हो,
इसलिए थोड़े जादूगर लगते हो।

गज़ब का आत्मविश्वास है तुममें,
मुश्किलों में भी मुस्कुराते हो,
आँधियाँ आएँ या राहें डगमगाएँ,
तुम शांत खड़े नज़र आते हो—
इसलिए तुम मज़बूत लगते हो।

सीने में लाखों ग़म छुपाकर,
होंठों पर मुस्कान सजाते हो,
दुनिया को हँसाते-हँसाते,
खुद को कितना रुलाते हो—
सच, तुम अच्छे अभिनेता लगते हो।

मगर मैं जानता हूँ,
उस मुस्कान के पीछे
एक बेहद कोमल दिल रहता है,
जो खुद टूटकर भी
दूसरों को टूटने नहीं देता है।

बस इतनी-सी बात है—
न कोई शिकायत, न कोई सवाल,
मेरा दिल अब तुम्हारे पास है।
शायद इसलिए नहीं कि तुम ख़ास हो,
बल्कि इसलिए कि
तुम्हारी सच्चाई दिल को छू जाती है।

तुम जैसे हो, वैसे ही रहो,
न खुद को बदलना, न कुछ छुपाना,
तुम्हारी यही सादगी, यही सच्चाई
मुझे हर बार अच्छी लगती है।

तुम सच्चे लगते हो…
तुम अच्छे लगते हो…

— विजय वर्मा
www.retiredkalam.com



Categories: kavita

Tags: , , , ,

8 replies

  1. very nice .

    Liked by 1 person

  2. वर्मा जी, बहुत गहरी और आत्मीय रचना। 🌹
    किसी को उसके चेहरे की मुस्कान से नहीं, उस मुस्कान के पीछे छिपी खामोशी से पहचान लेना ही सच्चे लगाव की पहचान है। आपने सादगी, आत्मविश्वास और भीतर के दर्द को जिस संवेदनशीलता से एक साथ पिरोया है, वह मन को देर तक छूता रहता है।

    किसी को बदलने की इच्छा नहीं, उसे उसकी सम्पूर्णता में स्वीकार करने का भाव यही इस कविता की सबसे सुंदर आत्मा है।
    “तुम जैसे हो, वैसे ही रहो…” केवल प्रेम की पंक्ति नहीं, बल्कि निष्कपट स्वीकार का दर्शन है। 🙏🌹

    Liked by 1 person

    • आपकी इतनी सुंदर और संवेदनशील प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार। 🙏🌹 मेरा मानना है कि सच्चा अपनापन किसी को बदलने में नहीं, बल्कि उसकी खूबियों, कमियों, खुशियों और दर्द सहित उसे स्वीकार करने में है। किसी की मुस्कान के पीछे छिपी ख़ामोशी को महसूस कर पाना ही रिश्तों की गहराई है।

      Liked by 1 person

  3. आप की अंतर्भावना से सुगन्धित मन भावन रचना है सर जी अनुभव आभास से सराबोर शब्दो में पिरोई हुई कविता ❤️🌅 सुप्रभात जी 🙏🏻

    Liked by 1 person

    • आपके स्नेहिल और हृदयस्पर्शी शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद 🙏🏻❤️ आपकी ऐसी आत्मीय प्रतिक्रिया रचना को और भी सार्थक बना देती है।

      और हाँ, अब तो सुप्रभात की जगह शुभ संध्या स्वीकार कीजिए। 😊

      Like

  4. Thanks
    For liking my post ‘Walk’ 🌹 🙏

    Liked by 1 person

Leave a Reply