# धुंध में खड़ी रचना #

यह कविता आत्मनिरीक्षण और सच्चाई की निर्भीक यात्रा है। यह न केवल दर्द और नफ़रत को महसूस करती है, बल्कि उसे प्रमाण के रूप में सामने लाती है। स्त्री, बच्चा, मज़दूर और वैभव को प्रतीक न मानते हुए, यह रचना उनकी जीवित वास्तविकता के साथ संवाद करती है।

यह भागती नहीं, बल्कि बार-बार लौटती है—खुद के और सच के सामने खड़ा होकर पाठक को भी सच्चाई की आँखों में देखने का अवसर देती है।

# धुंध में खड़ी रचना #

एक धुंध के भीतर खड़ी
मेरी यह रचना
आईने से भी गहरी है—
जहाँ अतीत, भविष्य और अपराध
एक ही देह में,
एक ही साँस से
जीते हैं।

यह कविता
सिर्फ़ स्वीकार नहीं करती,
यह सवाल करती है,
कुरेदती है,
और मुझे
मेरे ही दिल के
उस कमरे तक ले जाती है,
जिस पर वर्षों से
कुंडी लगी थी।

यहाँ नफ़रत
शोर नहीं मचाती—
उसे बूढ़ा कर दिया गया है,
थकी हुई,
कमज़ोर,
और फिर भी
ज़िद में अटी हुई।
ऐसी दृष्टि
बहुत कम मिलती है।

स्त्री,
बच्चा,
मज़दूर,
वैभव—
यहाँ प्रतीक नहीं हैं,
ये धड़कते हैं,
चलते हैं,
घावों के साथ जीते हैं।
इसीलिए
दर्द कल्पना नहीं लगता,
वह साक्ष्य बन जाता है—
निर्विवाद,
असहज,
सच्चा।

इस कविता की सबसे बड़ी ताक़त
उसका भाग जाना नहीं है,
बल्कि
लौट आने की
ईमानदार संभावना है—
खुद के पास,
सच के पास।

यह रचना
मुझे केवल राहत नहीं देती,
यह मुझे
आईने के सामने खड़ा करती है,
जहाँ सच
बिना सजावट
देखा जा सकता है।

और इस पल में—
शायद
इससे बड़ा उपहार
कुछ भी नहीं।
जहाँ मेरी भावनाएं ज़िंदा हैं।

(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com



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8 replies

  1. वर्मा जी, आपकी रचना पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे कोई धीरे-धीरे मन की उन परतों को खोल रहा हो, जिन्हें हम अक्सर खुद से भी छिपाकर रखते हैं। हर पंक्ति ठहरकर पढ़ने लायक है। सबसे अच्छी बात यह लगी कि आपने सच को सुंदर बनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि जैसा है वैसा ही हमारे सामने रख दिया। “दर्द कल्पना नहीं लगता, वह साक्ष्य बन जाता है” और “लौट आने की ईमानदार संभावना” जैसे भाव बहुत देर तक मन में बने रहते हैं। यह रचना केवल पढ़ी नहीं जाती, महसूस की जाती है। अंत तक आते-आते ऐसा लगता है जैसे हम भी अपने भीतर के आईने के सामने खड़े हों। सचमुच, बहुत गहरी, संवेदनशील और याद रह जाने वाली रचना। 🙏✨

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    • आपके इतने सुंदर, गहन और भावपूर्ण शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏

      यह जानकर अत्यंत संतोष हुआ कि मेरी रचना केवल पढ़ी ही नहीं गई, बल्कि आपने उसे महसूस भी किया। एक लेखक के लिए इससे बड़ा पुरस्कार शायद कोई नहीं कि उसके शब्द किसी पाठक के मन की परतों को छू सकें।

      आपने जिन पंक्तियों का विशेष उल्लेख किया, वह मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक है। मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि जीवन के अनुभवों को बिना किसी कृत्रिम सजावट के, ईमानदारी से शब्दों में ढाल सकूँ। यदि वे शब्द आपके भीतर आत्ममंथन का एक छोटा-सा क्षण भी जगा पाए, तो मेरा लेखन सार्थक हो गया।

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  2. Great poem and painting 🖼 👌 sir!

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    • Thank you so much for your kind appreciation! 😊🙏

      I’m truly delighted that you enjoyed both the poem and the painting. For me, words and colors are two beautiful ways of expressing the same emotions—one speaks to the heart through language, the other through imagination.

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  3. न्यारी अतिसुंदर कविता 🙏🏻🌅 शुभ प्रभात सर जी

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    • बहुत-बहुत धन्यवाद सर जी! 🙏😊

      आपकी स्नेहपूर्ण सराहना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक है। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि कविता आपको पसंद आई। आपका उत्साहवर्धन ऐसे ही लिखते रहने की ऊर्जा देता है। आपको भी सप्रेम शुभ प्रभात। आपका दिन सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण हो।

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  4. very nice .

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