
यह कविता उस भीतर की चुप्पी के बारे में है, जिसे हम अक्सर ज़िम्मेदारियों, डर और समझौतों के नाम पर ओढ़ लेते हैं। यह उन अनकहे भावों, टाले गए सपनों और दबाई गई आवाज़ों का आईना है, जो समय के साथ टीस बन जाते हैं।
यह रचना याद दिलाती है कि ख़ुद से बात करना, ख़ुद की सुनना—भी जीने का एक ज़रूरी हिस्सा है।
जब मन ने चुप्पी ओढ़ ली
हमने शब्दों को सलीके से रखा,
ताकि कोई सवाल न उठे।
हँसी को आदत बना लिया,
ताकि भीतर की दरारें न दिखें।
हर सुबह उठे किसी और के लिए,
हर शाम किसी और की थकान थी।
जो अपना था, उसे टालते रहे,
क्योंकि ज़रूरतें हमेशा मेहमान थीं।
मन ने कई बार दस्तक दी,
पर हमने दरवाज़ा नहीं खोला।
कहा—अभी वक़्त ठीक नहीं है,
और वक़्त ने ही सब कुछ तोला।
हमने सीखा चुप रहना बेहतर है,
हर सच कहना महँगा पड़ता है।
जो ज़्यादा महसूस करता है यहाँ,
वही सबसे पहले टूटता है।
पर चुप्पी भी कब तक निभेगी,
एक दिन आवाज़ बन ही जाती है।
जो दबा रहता है बरसों तक,
वो टीस बनकर लौट आता है।
अगर आज मन फिर से बोले,
तो उसे यूँ ही मत टाल देना।
शायद यही पल है ज़िंदगी का,
ख़ुद से फिर से मिल जाने का बहाना।
(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com

Categories: kavita
very nice .
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Thank you so much.
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बहुत सुंदर
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बहुत-बहुत धन्यवाद! 🙏
आपका यह स्नेह और सराहना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक है। आपका उत्साहवर्धन मुझे बेहतर लिखने और सार्थक विचार साझा करने की प्रेरणा देता है।😊🌸
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heartfelt and beautiful
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हृदय की गहराइयों से आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 🌹🙏
यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि आपको कविता हृदयस्पर्शी और सुंदर लगी। यदि मेरी लेखनी भावनाओं को छू सके और पाठकों के मन में एक छोटी-सी मुस्कान या सकारात्मक विचार जगा सके, तो यही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
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कभी-कभी कोई कविता हमारे लिए नहीं लिखी जाती, फिर भी लगता है जैसे वह हमारे ही मन की बात कह रही हो। आपकी यह रचना वैसी ही लगी। हर पंक्ति में एक शांत सच्चाई है, जो धीरे-धीरे दिल में उतरती चली जाती है। पढ़कर बस इतना लगा… अपने मन की आवाज़ को अनसुना नहीं करना चाहिए। बहुत सुंदर और बेहद स्पर्श करने वाली रचना वर्मा जी। ❤️🌿
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आपके स्नेहिल और हृदयस्पर्शी शब्दों ने मन को गहराई से छू लिया। 🙏❤️
मेरी रचना में आपने अपने मन की अनुभूति को महसूस किया, इससे बड़ा लेखक के लिए कोई पुरस्कार नहीं हो सकता। सच ही कहा आपने—मन की शांत आवाज़ को सुनना और उसे अनसुना न करना ही शायद जीवन की सबसे बड़ी साधना है।
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प्रेरक विचार से सजी हुई आपकी लेखनी 🙏🏻 शुभ रात्रि सर जी
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आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और शुभकामनाओं के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏🌹
यदि मेरी लेखनी का कोई विचार प्रेरणा बन सके, तो यही मेरे लेखन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। आपका निरंतर स्नेह और प्रोत्साहन मेरी ऊर्जा है।
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