# ज़िंदादिली का सफ़र #

यह कविता जीवन जीने का साहसी और निडर संदेश देती है। इसमें बताया गया है कि उम्र केवल एक संख्या है, जबकि असली जीवन हँसी, शरारत, साहस और सुनहरी यादों में है।

यह कविता हमें प्रेरित करती है कि हम संकोच छोड़कर पंछी-सा उड़ें, अपनी छाप छोड़ें और ऐसा जीवन जिएँ कि दुनिया हमारे किस्से याद रखे।

ज़िंदगी का सफ़र यहाँ छोटा है मित्र,
कब थमेगी साँसें, न जान सका चित्र।
तो क्यों रहे मन बंधा, जिये संकोच में,
पंछी सा उड़ें इस खुले आकाश में।

उम्र तो अपनी बस संख्या है मात्र,
आओ हँसी से भर दें जीवन का पात्र,
तारों का पीछा करें, रात सँवारें यार,
छाँव में नाचें, रौशनी से करें प्यार।

झुर्रियाँ कहें अपनी जीवन कथा,
कुछ मीठी यादें, कुछ सपनों की व्यथा,
शरारतें हों, हँसी हो, सब संग निभाना,
निर्भीक फैसले लेकर इतिहास बनाना।

शरारत में ही मन पाता है उड़ान,
साहस से मिलता जीवन को मान,
ऐसा जियो कि जग तेरा किस्सा कहे,
ज़िंदगी ज़िंदादिल, और मिसाल बने।

(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com



Categories: kavita

Tags: , , , ,

2 replies

  1. very nice .

    Like

Leave a comment