
यह कविता रिटायरमेंट के बाद के जीवन की उस गहराई को दर्शाती है, जहाँ इंसान काम से भले ही दूर हो जाए, लेकिन जीवन से नहीं। यादों, अनुभवों और आत्ममंथन के माध्यम से यह रचना बताती है कि “खाली होना” और “शांत होना” दो अलग बातें हैं। यह कविता ठहराव में छुपी सुंदरता, अकेलेपन में मिले अपनेपन और उम्र के साथ आने वाली समझ को बेहद भावुक और सहज तरीके से व्यक्त करती है।
खाली नहीं हूँ मैं
तुम कहते हो—
“आजकल बहुत लिखते हो,
खाली हो क्या?”
मानता हूँ,
मैं retired हूँ,
पर खाली नहीं हूँ…
क्योंकि अब
घड़ी से नहीं,
यादों से काम चलता है।
सुबह अब भी जल्दी होती है,
बस भागना बंद हुआ है।
चाय की भाप में
कुछ पुराने चेहरे उतर आते हैं,
और अख़बार से पहले
मैं अपने बीते दिनों को पढ़ लेता हूँ।
हाँ,
ऑफिस नहीं जाता अब,
पर रोज़
ज़िंदगी से मिलने निकलता हूँ।
कभी बालकनी में बैठकर
ढलती धूप से बातें करता हूँ,
कभी पुराने गीतों में
अपनी अधूरी उम्र खोजता हूँ।
तुम्हें लगता है
मैं अकेला हूँ…
पर सच यह है—
अब मैं पहली बार
अपने साथ हूँ।
पहले वक्त कम था,
अब समझ ज़्यादा है।
पहले लोग बहुत थे,
अब रिश्तों की असली आवाज़ सुनाई देती है।
मैं खाली नहीं हूँ—
मेरे पास
बच्चों की बचपन वाली हँसी रखी है,
माँ की डाँट अब भी संभाल कर रखी है,
कुछ अधूरे सपने हैं,
कुछ पूरे हुए दुख भी।
और हाँ,
कुछ दर्द ऐसे भी हैं
जिन्हें अब मैं
कविताओं में रहने देता हूँ।
Retirement सिर्फ नौकरी से होता है,
ज़िंदगी से नहीं।
अब मैं कमाता नहीं,
पर महसूस बहुत करता हूँ।
अब दौड़ता नहीं,
पर ठहरकर दुनिया देखता हूँ।
और यक़ीन मानो—
ठहरना भी
एक कला है।
तो अगली बार
जब पूछो—
“खाली हो क्या?”
तो सुनना…
मैं खाली नहीं हूँ,
मैं बस
अब अपने हिस्से की ज़िंदगी
धीरे-धीरे जी रहा हूँ।
(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com

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Categories: kavita
आप कभी खाली नही होंगे सर,,ईश्वर जी ने आप में रचनात्मकता उपहार में दिए हैं,,लेखन की अतभूत शक्ति से शोभित है आप,,🙏🏻 शुभ रात्रि
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आपके इतने सुंदर और स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏🏻
ईश्वर की कृपा और आप जैसे शुभचिंतकों के प्रेम व प्रोत्साहन से ही लेखनी को ऊर्जा मिलती है। यदि मेरे शब्द किसी के मन को थोड़ी शांति, प्रेरणा या अपनापन दे पाते हैं, तो यही मेरे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।
आपका स्नेह यूँ ही बना रहे।
ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ, प्रसन्न और आनंदित रखें।
🙏🏻 शुभ रात्रि 🌙✨
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🙏🏻🙏🏻
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Stay happy and keep sharing.
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निसंदेह आपके साथ चलूँगा सर जी 🙏🏻 धन्यवाद आपका
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सुप्रभात 🙏🏻
आपका स्नेह और साथ यूँ ही बना रहे, यही सबसे बड़ा आशीर्वाद है। हृदय से धन्यवाद आपका। 🌸
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जय माता दी 🙏🏻🌺 शुभ प्रभात सर जी
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जय माता दी 🙏🏻🌺
आपका दिन शांति, शक्ति और सकारात्मकता से भरा रहे। 🌸
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यह कविता सिर्फ रिटायरमेंट पर नहीं, बल्कि जीवन को नए अर्थों में जीने की कला पर लिखी गई एक बेहद संवेदनशील अभिव्यक्ति है। हर पंक्ति में ठहराव है, अपनापन है, और वो सच्चाई है जिसे उम्र धीरे-धीरे सिखाती है। “मैं खाली नहीं हूँ, मैं बस अब अपने हिस्से की ज़िंदगी धीरे-धीरे जी रहा हूँ” यह पंक्ति दिल में बहुत देर तक रहती है। ✨
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आपके इतने गहरे और संवेदनशील शब्दों के लिए हृदय से आभार। 🙏🏻
सच कहूँ तो यही भावना इस कविता की आत्मा थी—रिटायरमेंट को अंत नहीं, बल्कि जीवन को नए अर्थों, नए ठहराव और नई समझ के साथ जीने की शुरुआत के रूप में देखना।
यह जानकर बहुत संतोष मिला कि कविता की पंक्तियाँ आपके मन तक पहुँचीं और आपने उनमें अपने अनुभवों की सच्चाई महसूस की। “धीरे-धीरे जी रहा हूँ” शायद उम्र का सबसे सुंदर पाठ है—जहाँ भागना कम हो जाता है और महसूस करना बढ़ जाता है। ✨
आपका स्नेह और ऐसा आत्मीय पाठकीय जुड़ाव ही लेखनी को सार्थक बनाता है।
सादर धन्यवाद। 🌸
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बहुत बढ़िया कविता।
Retirement के बाद ज़िन्दगी को कुछ ज़्यादा समझने का मौक़ा मिलता है और ये बात बख़ूबी आपकी कविता द्वारा व्यक्त की गई है ।
कुछ समय अपने और कुछ अपनों के लिए— ख़ाली रहने का अवसर कहाँ होता है।
धन्यवाद ।
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आपके सुंदर और विचारपूर्ण शब्दों के लिए हार्दिक धन्यवाद। 🙏🏻
सचमुच, रिटायरमेंट शायद जीवन का वह पड़ाव है जहाँ इंसान पहली बार ठहरकर खुद को, अपने रिश्तों को और समय के असली मूल्य को समझ पाता है।
आपने बिल्कुल सही कहा—“कुछ समय अपने और कुछ अपनों के लिए” — यही तो वह संपत्ति है, जो व्यस्त जीवन में अक्सर सबसे पीछे छूट जाती है।
खाली रहना नहीं, बल्कि अपने भीतर और अपने लोगों के साथ जुड़ पाना ही इस अवस्था की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया ने कविता के भावों को और भी सार्थक बना दिया।
सादर आभार। 🌸
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A thoughtful reflection—beautifully capturing how retirement becomes a time not of ending, but of deeper introspection, memory, and continued engagement with life’s meaning. ✨📖
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Thank you so much 🤍📖
That’s a really beautiful way to frame it. Retirement does feel less like an ending and more like a quieter opening — a space where memory, reflection, and meaning begin to take center stage in new ways. I truly appreciate your thoughtful reading of it.
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very nice .
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Thank you so much.
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Nice poem.
Congratulations on publishing your book!
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Sorry for the delayed reply, and thank you so much for your kind words and congratulations. I’m truly happy you liked the poem. Your support means a lot to me. 🌸
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A family movie. You should take your granddaughter. I am sure she will love it.
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Thank you for the lovely recommendation — it truly sounds like the kind of movie that creates sweet memories
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