# रास्ता अभी बाकी है #

यह कविता जीवन की यात्रा में आने वाली थकान, असमंजस और अकेलेपन को स्वीकार करते हुए भी उम्मीद का दीप जलाए रखने की प्रेरणा देती है। यह बताती है कि गिरना, ठहरना और सवालों से घिर जाना भी जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है।

हर अँधेरे के पीछे एक नई सुबह छिपी होती है, और जब तक हिम्मत साथ है, तब तक रास्ता कभी समाप्त नहीं होता।

# रास्ता अभी बाकी है #

जब थक जाएँ कदम सफ़र में,
और मंज़िल कहीं नज़र न आए,
जब अपने ही सवालों से मन
ख़ुद को समझा न पाए।

जब भीड़ बहुत हो चारों ओर,
पर भीतर सन्नाटा गहरा हो,
जब हँसते चेहरों के पीछे
कोई दर्द चुपचाप ठहरा हो।

तब याद रखना ऐ मेरे दिल ,
रात कभी स्थायी नहीं होती है ,
हर अँधेरे की चुप गलियों में
सुबह कहीं सोई होती है |

गिरना भी सफ़र का हिस्सा है,
ठोकर भी एक इशारा है,
हर टूटी हुई उम्मीद के पीछे
कोई नया सितारा है।

जो बीत गया, उसे जाने दो,
वक़्त का यही पैमाना है,
हर कल की नई सुबह में
जीवन का नया तराना है।

चलते रहना, रुकना मत तुम,
हिम्मत ही असली साथी है,
मंज़िल मिल भी जाएगी एक दिन—
बस याद रहे, रास्ता अभी बाकी है।

(Vijay Verma)
 www.retiredkalam.com



Categories: kavita

Tags: , , ,

6 replies

  1. Yes every morning has a new start. Beautiful poem 👍👍

    Liked by 1 person

  2. जानदार,,शब्दावली से सुशोभित सर जी आपकी प्रस्तुति ❤️👌👌🙏🏻

    Like

    • आपकी इस स्नेहपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए दिल से धन्यवाद 🙂🙏
      आपके शब्दों में जो अपनापन और उत्साह है, वह सच में बहुत अच्छा लगता है। जब विचार और भाव दोनों जुड़ते हैं, तो संवाद और भी सुंदर बन जाता है।

      Like

Leave a comment