# रूह की आवाज़ #

कभी-कभी जीवन की भीड़ और शोर में हम यह भूल जाते हैं कि हम वास्तव में कौन हैं। हम नाम, पहचान, सफलता और असफलता के जाल में उलझते रहते हैं—और धीरे-धीरे अपनी ही रूह की आवाज़ से दूर हो जाते हैं।

यह कविता उसी खोई हुई आवाज़ को फिर से सुनने का एक प्रयास है। यह हमें याद दिलाती है कि इस बदलती दुनिया में, जहाँ हर चीज़ क्षणभंगुर है, वहीं हमारी करुणा, सच्चाई और प्रेम ही वह सुगंध हैं जो समय के पार भी बनी रहती हैं।

# रूह की आवाज़ #

इस भीड़ भरे जहाँ में
जहाँ हर चेहरा एक कहानी है,
और हर कहानी अधूरी—
वहाँ एक खामोश सी आवाज़
अंदर ही अंदर पुकारती है।

वक़्त के इस रेले में
लोग आते हैं, लोग जाते हैं,
कुछ नाम बन जाते हैं धूल,
कुछ रिश्ते बस यादों में सिमट जाते हैं।

पर कहीं भीतर—
एक दीपक अब भी जलता है,
बिना हवा के, बिना कारण के,
बस अपनी ही लौ में स्थिर।

कभी बीते लम्हों की खुशबू
मन को छू जाती है,
कभी अधूरे ख़्वाबों की परछाईं
आँखों में उतर आती है।

तब रूह धीरे से कहती है—
“मत उलझ इन बदलती तस्वीरों में,
ये सब तो लहरें हैं,
आती हैं, और खो जाती हैं।”

तू उस सागर को पहचान
जो तेरे भीतर बहता है—
जहाँ न हार है, न जीत,
न कोई अंत, न कोई शुरुआत।

यहाँ बस एहसास है—
तेरी सच्चाई का,
तेरी करुणा का,
तेरे उस प्रेम का
जो किसी शर्त में बंधा नहीं।

जब सब कुछ छूट जाएगा—
नाम, पहचान, और ये जहाँ भी,
तब भी एक निशान रहेगा
तेरी रूह की महक का।

वही तेरी सच्ची विरासत है,
वही तेरा असली वजूद।

तो चल—
न डर, न ठहर,
बस अपने भीतर की रोशनी को थामे,
हर अंधेरे से गुज़र।

क्योंकि अंत में—
न यह मेला रहेगा,
न ये चेहरे, न ये शोर…

रहेगी तो बस
तेरी रूह की वह शांत लौ—
जो कभी बुझती नहीं।

बाक़ी सब…
वाक़ई फ़ना है।

(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com



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12 replies

    • बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏
      आपको कविता पसंद आई, यह मेरे लिए सच में खुशी की बात है। आपके ऐसे शब्द आगे लिखने की प्रेरणा देते हैं। 🌿

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  1. Sometimes, in the hustle and bustle of life, we forget who we truly are. We get caught in the traps of names, identities, successes, and failures—and slowly, we lose touch with our own inner voice. True peace and self-discovery aren’t found in external achievements, but in the silence within that we so often ignore. It is only when we pause that we can truly encounter our authentic selves. 🌿🕊️🙏

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    • That’s so true… 🌿🕊️
      It’s easy to get swept up in roles and expectations, and before we know it, we’re living outwardly more than inwardly. That quiet pause you mention—it’s where things begin to realign. Not in a dramatic way, but gently, almost like remembering something we always knew.

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  2. मनभावन कृति 👌

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  3. बहुत सुंदर

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    • आपका दिल से धन्यवाद 🙏🏻

      आपके “बहुत सुंदर” कहने से ही कविता की मेहनत सफल लगती है। ऐसे ही स्नेह और साथ मिलता रहे, यही कामना है।

      आपका दिन शुभ और आनंदमय हो 🌸✨

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  4. very nice .

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