
यह कविता प्रेम और विरह की भावनाओं से ओत-प्रोत है। यह उन अनकहे जज़्बातों को बयां करती है, जब दो आत्माएं हकीकत साथ न होते हुए भी ख्वाबों में मिलती हैं। नींद, तन्हाई और यादें यहाँ माध्यम बनती हैं मिलने का। यह रचना बताती है कि जब प्रेम सच्चा होता है, तो दूरी भी उसे नहीं रोक सकती।
# ख्वाबों में मुलाक़ात #
मिलने की राहें अब बाकी नहीं,
पर ख्यालों से तुम कभी जाते नहीं।
हर लम्हा तुमसे कोई बात होती है,
सांसों में तेरी ही सौगात होती है।
मिलने तो आएंगे हम तुझसे ज़रूर,
ख्वाबों के रस्तों से होकर जरूर।
नींद की चादर बस ओढ़ लेना,
दिल के दरवाज़े खुले छोड़ देना।
ज़रा इन रौशनी के दीप बुझा दीजिए,
चाँदनी को भी आज विदा कीजिए।
अब इंतज़ार की हदें टूट चुकी हैं,
बस तुम्हारी इक कोशिश बाकी है।
अब आ भी जाओ तनहाई की रातो में,
धड़कनों की तन्हा बरसातों में।
मुझे खुद से मिलवाने दो तुझमें,
अपनी तरह महसूस होने दो मुझमें।
अब आ भी जाओ तनहाई की रात है ,
दिल की धड़कन, आंखो मे बरसात है
जाम है, पैमाना भी है, पर साकी नहीं ,
क्या मिलने की राहें, अब बाकी नहीं,
(विजय वर्मा )

Categories: kavita
Beautiful post 🎸🎸
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Thank you so much dear..😊
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very nice
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Thank you so much.
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Awesome
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Thank you so much for your kind words!
I’m truly glad you liked the poem. It’s a heartfelt attempt to express the emotions of love, longing, and silent connection through dreams.
Your appreciation means a lot and inspires me to keep writing. 💫
Stay connected — more soulful verses are on the way!
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Very nice👌
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Thank you so much.
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