#क्यों लिखता हूँ रोज़ ?

लिखना मेरे लिए सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। यह मेरा तरीका है अपने एहसासों को जीने और उन अनकही भावनाओं को शब्द देने का, जो अक्सर दिल में रह जाती हैं।

हाँ, लिखना मुझे खुद से जोड़ता है, बीते हुए लम्हों को सहेजता है, और आने वाले कल को नई प्रेरणा देता है। जब तक साँसें हैं, तब तक शब्दों की धार बहती रहेगी, क्योंकि लिखना ही मेरा जीना है।

क्यों लिखता हूँ रोज़ ?

लिखता हूँ रोज़, क्योंकि शब्द मेरे अपने हैं,
कुछ अनकही बातें, कुछ अनजाने सपने हैं।
कलम की स्याही से मेरी साँसें चलती हैं,
और, मेरे एहसास कागज़ पे पलती हैं।

लिखता हूँ, ताकि मन हल्का हो जाए,
हर दर्द, हर खुशी लफ़्ज़ों में बह जाए।
जो कह न सका, वो कविता में ढल जाए,
जो सह न सका, वो कहानी बन जाए।

लिखता हूँ, क्योंकि हर दिन नया है,
हर अनुभव में एक गहरा साया है।
कभी खुद से मिलाता है, तो कभी भटकाता है,
पर हर शब्द मेरी रूह को सुकून दिलाता है।

लिखता हूँ, ताकि कल को देख सकूँ,
अपने जिए पलों को फिर से जी सकूँ।
शब्दों में तस्वीरें बनती चली जाती हैं,
सच कहूँ, मेरी यादें अमर हो जाती हैं।

लिखता हूँ, क्योंकि लिखना मेरा जीना है,
मेरी हर एहसास को मोती बन पिरोना है।
जब तक धड़कन चलेगी, कलम भी चलेगी,
मेरे शब्द ज्वाला बन, सदियों तक जलेंगी ।
(विजय वर्मा )

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Categories: kavita

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8 replies

  1. Great, thanks for sharing. I wish you happiness and success, dear vermavky. 💞🙋🏼‍♀️🙏🏽

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  2. very nice

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  3. Congratulations 👏🎉 on publishing your book. Beautiful verse.

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    • Thank you so much for your warm wishes and kind words! 😊
      Your support truly means the world to me.
      Every verse in this book holds a piece of my journey,
      and I feel grateful to be able to share it with you.
      Stay connected — many more heartfelt creations are on the way! 🙏📖💫

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  4. You’re welcome. May you continue to share these verses with the world. Have a nice day.

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