# अधूरी नहीं है उम्र की कहानी…”

यह कविता हमारे वरिष्ठ नागरिकों की जीवनशक्ति और अटूट आत्मबल को समर्पित है। उम्र चाहे जितनी हो, सपने देखना और उन्हें जीना कभी बंद नहीं होता।
अधूरी नहीं है उम्र की कहानी…” हमें सिखाती है कि हर मोड़ पर जीवन में कुछ नया करने की क्षमता होती है — बस ज़रूरत है थोड़ी सी आशा, थोड़ी सी मुस्कान, और बहुत सारा विश्वास।

अधूरी नहीं है उम्र की कहानी…”

झुकी कमर है, पर हौसला अभी बाकी हैं,
सफेद बालों में भी कुछ ख्वाब बाकी हैं।
हर शिकन में छुपा है अनुभवों का खज़ाना,
हर मुस्कान में छुपा है जीवन का अफसाना।

उम्र ने तो सिर्फ़ गिनती बढ़ाई है सालों की,
पर रफ्तार अब भी है जीने के ख़यालों की।
नयी सुबह की तरह अब भी उम्मीदें जागती हैं,
हर शाम को रोशन करने की आरज़ू बाकी है।

चलते रहे हैं, थके नहीं हैं इस रास्ते में,
हर मोड़ पर कुछ नया पाया मिलने में।
रिटायर हुआ हूँ, पर थमा नहीं हूँ,
हर पल को जिया, और खुलकर जिया हूँ।

अब भी दिल धड़कता है किसी नयी रचना पर,
अब भी आंखें चमकती हैं, सपनों के सफ़र पर।
कला, कविता, या कोई नई सीख की बात,
इस उम्र में भी है जीवन से मीठी सौगात।

तो कह दो दुनिया से — हम थके नहीं, बदले हैं,
हर दिन को नए जोश से अब सजाने चले हैं।
हाँ, हम  बुज़ुर्ग हैं, पर कमजोर नहीं,
हम चल रहे हैं — क्योंकि रहे “सपने अधूरे नहीं!”
(विजय वर्मा )

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4 replies

  1. vety nice

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  2. beautiful poem 🙋🏼‍♀️💚💚

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