
यह कविता जीवन की भावनाओं, यादों और संबंधों को बड़े ही सुंदर और संवेदनशील तरीके से दर्शाती है। यह हमें समय के प्रवाह, बीते हुए लम्हों की मिठास और आने वाले बदलावों को अपनाने की सीख देती है।
इस कविता में बारिश की यादें, साथ बिताए हुए अनमोल पल, और जीवन के अंत में विदाई का एक गहरा संदेश छिपा है। आइए, इस सुंदर कविता का आनंद लें और इसके भावों में खो जाएँ।
यादों की बारिश
चलो, हम सब लहरों की बाँहों में बहते हैं,
पुरानी बारिश की यादों को ताज़ा करते हैं।
हाथों में हाथ हो और दिल में हो उमंग,
जीवन के इस सफ़र में नया रंग भरते हैं।
रेत पे अपने क़दमों के निशान बनाते हैं,
समय के साथ उन्हें धीरे-धीरे मिटाते हैं।
उनकी वो हँसी और प्यार भरी बातें,
दिल के किसी कोने में फिर से सजाते हैं।
ढलती शाम में सूरज भी मुसकुराता है,
बुढ़ापे को देख जवानी भी शरमाता है।
उनका साथ भला अब कितने दिनों का है,
चलो, आज बिछड़ने का जश्न मनाते हैं।
अब कभी किसी बात का बुरा मत मानना,
जो तुम्हारा मन कहे, अब उसे ही सच जानना।
दुनिया तो ज़ालिम है, क्यों करें भरोसा उस पर,
देखना हो अक्स, तो ख़ुद बनो अपना आईना।
( विजय वर्मा )

Categories: kavita
very nice
LikeLiked by 3 people
Thank you so much.
LikeLiked by 1 person
Very wise and beautiful poem of life, my friend. Nice drawing and video, as well. 🙏
LikeLiked by 2 people
Thank you so much for your heartfelt appreciation! >💕
I’m delighted that the poem resonated with you and that you enjoyed the accompanying drawing and video.
Your support and encouragement truly inspire me to continue creating. 🙏
LikeLiked by 2 people