
यह कविता जीवन के मेरे एहसास को संजोने और अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालने की कोशिश है । यह कलम की शक्ति, प्रेम, दर्द, और खुशियों को उकेरने की कला को समर्पित एक प्रेरणादायक रचना बनाने प्रयास है।
मेरी कलम में वो ताकत देना
मेरी कलम में वो ताकत देना,
अपने जज़्बात को आवाज़ दे सकूँ,
हर दर्द को मोती बना सकूँ,
तेरी हर ख़ुशी को परवाज़ दे सकूँ।
मेरी कविता में वो शब्द पिरोना,
जो दिल की गहराइयों को छू जाएं,
जो अश्कों को मुस्कान बना दें,
बिखरे अरमान फिर से संवर जाएं।
मैं खुद को हर लफ्ज़ में पाना चाहता हूँ,
हर एहसास को कागज़ पर लाना चाहता हूँ,
हर छूटी ख़्वाहिश को जीना चाहता हूँ,
सच कहूँ—मैं हर लम्हा पीना चाहता हूँ।
जो बीत गया, उसे फिर से लिख सकूँ,
प्रेम और खुशी का अहसास जगा सकूँ,
बस मेरी कलम को इतनी शक्ति देना,
कि मैं ज़िन्दगी को हर रंग में जी सकूँ।
(विजय वर्मा )

Categories: kavita
very nice
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Thank you so much.
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Pen is mighter than sword.The poem is pleasing one.
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Thank you very much for your kind words. I’m truly glad the poem pleased you, and I appreciate you taking the time to share your thoughts.
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