
यह कविता आँसुओं के साथ एक आत्मीय संवाद प्रस्तुत करती है। इसमें आँसू को न केवल भावनाओं का प्रतीक माना गया है, बल्कि एक साथी और हमदर्द के रूप में चित्रित किया गया है।
आँसू हर दर्द, तन्हाई और छिपे हुए जज़्बातों को समझने और साझा करने का माध्यम बनते हैं। कविता जीवन के संघर्षों में आँसुओं की राहत और संगति की भूमिका को उजागर करती है
आंसुओं से संवाद
आंसुओं को बहुत समझाया, तनहाई में आया करो,
महफ़िल में आकर मेरा मज़ाक न बनाया करो।
आंसू बोली, लोगों के बीच आपको तनहा पाती हूँ,
बस, इसलिए आपका साथ निभाने चली आती हूँ।
आपकी तड़प का हर दर्द मुझसे छुपा नहीं है,
भले ही आपकी बेचैनी किसी ने सुना नहीं है।
तेरी खामोशियों की जुबां मैं समझ जाती हूँ,
तेरे हर आहट पर मैं तेरे साथ आ जाती हूँ।
आंसू नहीं, मैं तो तेरे जज़्बातों का आईना हूँ,
तेरी मुस्कान के पीछे छिपा ग़म का नगीना हूँ।
तेरे दर्द की लकीरों को पढ़कर बह जाती हूँ,
तेरी रूह की आवाज़ बनकर रह जाती हूँ।
तू मुझसे दूर रहकर भी मुझको बुलाता है,
तेरी हर याद मुझे हर पल तड़पाती है।
मैं तो तेरा ही साया हूँ, तेरा एहसास हूँ,
तेरे टूटे सपनों पर विश्वास कर जाती हूँ।
मुझे मत रोको, मैं तेरी राहत बन जाऊँगी,
तेरे दिल का सुकून, तेरी हसरत बन जाऊँगी।
महफ़िल में हो या तनहाई में, रहूँगी तेरे साथ ही,
तेरा साया, तेरा हमराज़, मैं बनकर दिखाऊँगी।
(विजय वर्मा )

Categories: kavita
very nice
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Thank you so much.
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