
यह कविता एक ऐसे सपनों के शहर की कल्पना करती है जहाँ उम्मीद, खुशी, और प्यार की रौशनी हर जगह फैली हो।
इसमे एक आदर्श संसार का चित्रण किया है, जहाँ दिलों के बीच कोई फासले नहीं और हर कोई एकता और स्नेह की डोर में बंधा हुआ है।
मुझे आशा है कि यह कविता आपके मन में शांति और प्रेम का एहसास कराएगी ।
मेरे सपनों का शहर हो
मेरे सपनों का शहर हो
चमके जहाँ उम्मीद के तारे,
हर गली में मुस्कान हो ,
हो हर गली में हसीन नज़ारे
ना हो हमारे बीच कोई फासले,
हर कोई जिये, हर कोई सास ले |
मेरे सपनों का शहर हो,
मेरे अपनों का शहर हो।
हर सुबह हो सुनहरी किरण,
जो छू ले मन का आँगन,
ना हो अंधेरा, ना हो दरार,
हर दिल में हो प्यार ही प्यार
खुशियों भरा वो सफ़र हो,
जहाँ गम का न कोई असर हो |
मेरे सपनों का शहर हो,
मेरे अपनों का शहर हो।
थके पलकों को मिले ठिकाना,
जहाँ इंसान कहे अपना फसाना,
आँखों के आँसू भी मुस्कुराएँ,
न हो रोने का कोई बहाना ।
जुड़ जाए हम एक डोर से ,
बहे प्यार हर ओर से ।
मेरे सपनों का शहर हो,
मेरे अपनों का शहर हो।
जहाँ चाँदनी रात भी गाएँ गीत,
धरती पर हो सब में प्रीत ,
रंग-बिरंगे सपनों का घर बने,
दिल की कहानी अमर बने।
कब आएगी वो सुबह,
जो खिलेगी हर जगह।
मेरे सपनों का शहर हो,
मेरे अपनों का शहर हो।
(विजय वर्मा )

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हर शहर का अपना ख़ास मिजाज़ होता जो किसी को पसंद आता है तो कोई नापसंद करता है।
अपनी – अपनी पसंद ही श्रीमान।
वैसे मेरा मानना है जिस शहर में आप सुकून से रह सकें और अपने सपने पूरे कर सकें वही सही मायनों में सपनों का शहर है। 🙌
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बिलकुल सही कहा आपने! हर शहर की अपनी खासियत होती है और हर इंसान की अपनी पसंद।
सपनों का शहर वही होता है जहाँ दिल को सुकून मिले, सपनों को उड़ान मिले, और जिंदगी खूबसूरत लगे।
आपके विचार प्रेरणादायक हैं। ऐसे शहर की तलाश हर किसी की होती है, जहाँ खुशियाँ और संतोष साथ-साथ हों। 😊✨
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nice poem.
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Thank you so much.
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सही बात
हर किसी का सपनों का शहर
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बहुत बहुत धन्यवाद।
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