
यह कविता एक व्यक्ति की जीवन यात्रा का चित्रण करती है, जिसमें वो तमाम कठिनाइयों के बावजूद मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लेता है।
यह कविता न केवल संघर्ष की प्रेरणा देती है, बल्कि जीवन को उम्मीद और साहस के साथ जीने का संदेश भी देती है।
जिंदगी की राहें
रास्तों पर चलते-चलते थक सा गया हूँ,
ख़्वाबों की चाह में बिखर सा गया हूँ।
राहें हैं कांटों भरी, फिर भी मैं मुस्कुराता हूँ,
हर दर्द को सीने से लगा, ज़िंदगी जीता हूँ।
खामोशी में कहीं सिसकती हैं यादें,
आँखों में छुपी हैं हज़ारों फ़रियादें।
दिल की गहराइयों में तूफ़ान हैं छुपे,
फिर भी , ऊपर से शांत रहता हूँ ।
कभी अपनों का सहारा, कभी खुद की तन्हाई,
ज़िन्दगी का ये सफर, जैसे कोई परछाई।
अंधेरे में भी एक उम्मीद जलती रहे,
हर ग़म की तपिश में ख़ुशियाँ पलती रहें।
गिर कर उठना, और फिर से चलना,
यही है ज़िन्दगी का असली मतलब समझना।
हर आँसू में हिम्मत की बूंदें मिलाकर,
मैं हर दर्द को अपने होंठों पे सजाता हूँ।
कभी हार न मानूँगा, ये वादा है मेरा,
अंधेरों में चमकना, ये इरादा है मेरा।
ज़िन्दगी चाहे कितनी भी हो कठिन,
हर हाल मे बिना शिकन जीता रहूँगा |
(विजय वर्मा)
Categories: kavita
very nice
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Thank you so much.
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So cute:)
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Thank you so much for you visit.
Stay happy and blessed.
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