मेरी यह कविता एक रचनात्मक और संवेदनशील यात्रा का वर्णन करती है। दिल की गहराइयों से उठने वाले ख्यालों को शब्दों में पिरोने की कोशिश है |
हर दिन कुछ नया, कुछ अद्वितीय लिखने की इच्छा, और उन शब्दों में जीवन के विभिन्न पहलुओं को उकेरने की कोशिश है यह कविता |
अजूबे की कलम से
मेरे दिल में एक ख्याल आता है,
रोज़ रोज़ कुछ अजूबा लिखूँ,
शब्दों में सितारे पिरोऊँ।
चेहरे की झुर्रियों में छुपे किस्से ढूँढूँ,
पुरानी यादों का हार बनाऊँ।
हर मोड़ पर सच झलके,
दिल की धड़कनें कलम से बोलें।
कोई दास्ताँ अधूरी न रहे,
सपनों का संसार रचूँ।
हाँ, कुछ अजूबा लिखूँ ।
हर लफ़्ज़ में चमत्कार भरूँ,
दिल से दिल तक इश्क़ का सफर,
कलम की स्याही से उतारूँ।
बचपन के पलों को सहेजूँ,
सपनों की दुनिया सँजोऊँ।
खुद को ढूँढूँ इन लफ़्ज़ों में,
एक खुशहाल दुनिया देखूँ।
हाँ, कुछ अजूबा लिखूँ।
जिंदगी की राहों का नक्शा बनाऊँ,
हर खुशबू और हर रंग समेटूँ।
एक सुंदर खुशहाल संसार देखूँ,
हाँ, कुछ अजूबा लिखूँ ।
हर लफ़्ज़ में जादू भरूँ,
दिल से दिल तक इश्क़ का सफर,
कलम की स्याही से उतारूँ।
जीवन के हर पहलू को बुनूँ,
खुशियों की छाँव में झूलूँ।
हाँ, कुछ अजूबा लिखूँ।
इस यात्रा में खो जाऊँ,
हर दर्द और हर खुशी समेटूँ।
चमत्कारों की दुनिया में जाऊँ,
आज कुछ अजूबा लिखूँ ।
हाँ, कुछ अजूबा लिखूँ ।
(विजय वर्मा)

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Categories: kavita
Lovely poem
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Thank you so much.
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Lovely poem .
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Thank you so much, dear.
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