#पुरानी सोच का क्या करूँ ? 

यादों की दुनिया मे मन हमेशा  उलझा रहता है | कई बार तो पुरानी यादें मन में  शूल बन कर  इस कदर चुभ जाते हैं कि जिंदगी खत्म सी लगने लगती है।  समय मानो थम सा गया हो , और आगे के सारे रास्ते बंद नज़र आते है |

इंसान की ज़िंदगी में  ऐसी कुछ खास घटना घट जाती है, जिसकी यादों में जिंदगी फंस कर रह जाती है |  हम हमेशा के लिए  यादों के भंवर में उलझ कर रह जाते हैं ।

उस वेदना से निकलने के लिए अपनी सोच को बदलने का प्रयास करना होगा , यह काम क्या इतना आसान है ?

कुछ सूखे फूल अब भी

गुलदस्ते में पड़े है,

चाहता हूँ मैं उन्हें फेंकना

लेकिन कुछ यादें जुड़ी है उनसे |

कुछ बासी शब्द अब भी

पुरानी डायरी के पन्नों में पड़े है

चाहता हूँ उन्हें मिटाना

लेकिन कुछ वादे किए हैं उनसे |

अपनी पुरानी सोच का क्या करूँ

चाहता हूँ उन्हें हटाना 

लेकिन मेरी साँसें जुड़ी है उनसे |

सच है कि  फूल सूखे है

और शब्द बासी हो गए है

पर मेरी सोच ..

अब भी  बनावटी नहीं, असली है |

                   (विजय वर्मा)

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9 replies

  1. 💚

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  2. बेहद सुंदर कविता

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