#अनजान हो तुम #

कवि को एहसास है कि उसका प्रेमिका उसके लिए एक अनजान है, लेकिन वह उसकी ज़िंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। वह उसके दिल और ख़्वाबों में है और उसके लिए एक अनमोल ख़ज़ाना है। वह उसे खोजने के लिए बेताब है और उसके साथ अपना जीवन बिताना चाहता है।


अनजान हो तुम

अनजान हो तुम, पर मुझसे अनजान नहीं,

मेरी ज़िंदगी की, एक अनसुनी कहानी हो।

तुम मेरे दिल में हो, मेरे ख़्वाबों में हो,

तुम मेरे लिए, मौजों की रवानी हो ।

तुम मेरी आशा हो, तुम मेरा सहारा हो,

तुम मेरे लिए, एक अनमोल उपहार हो।

खोया-खोया सा, मैं तुम्हें ढूंढता रहता हूँ,

और सोचता रहता हूँ, कब मिलोगी तुम ?

तुम्हारी यादें, मेरे दिल में हैं,

तुम्हारी तस्वीरें, मेरी आँखों में हैं।

तुम मेरे ख़्वाबों में आती हो,

आ कर मुझे बहुत रुलाती हो।

तुम मेरे दिल की धड़कन हो

हसीन ज़िंदगी की समर्पण हो |

अगर ज़िंदगी मे आ जाओ तुम,

तो मेरी सारी तमन्नाएँ पूरी हो।

(विजय वर्मा )

BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…

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