# मेरी पहचान # 

मैं अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ | मेरी पह्चान क्या है — जब हम माँ की कोख में थे तो पूरी दुनिया हमें हमारी माँ के मध्यम से जान पाती थी |

जब हम धरती पर पहला कदम रखते है तो उस क्षण हमें एक नाम दिया गया , जिसके बाद पिता का नाम जुड़ जाता है |

हालाँकि बचपन से ही मेरा एक सपना था , अपनी एक अलग पह्चान बनाने की | अपने को समृद्ध  एवं प्रसिद्धि प्राप्त करते हुए देखना चाहता था |

मेरी कोशिश कि हर कोई हमारे माँ-बाप के नाम से नहीं बल्कि माँ –बाप को लोग हमारे नाम से जाने |

इसी भावनाओ को समेटे मैं कुछ लिखने का प्रयास किया है…आप जरूर पढ़े और अपने विचारों से अवगत कराएँ …

मेरी पहचान

विशाल आकाश का सूरज नहीं तो क्या

जलता दीपक बन , अपना घर रोशन तो किया |

किसी सागर सा विशाल अस्तित्व नहीं तो क्या

कुआँ हूँ ,मीठा जल बन अपनों के प्यास तो बुझाया |

किसी पर्वत सा ऊँचा मेरा कद नहीं तो क्या

जमीन से जुड़ा इंसान बन लोगों के काम तो आया |

अम्बर को छूने  की मेरी ताकत नहीं तो क्या

साधारण व्यक्तित्व  मेरा, लोगों के दिलों को तो भाया |

बाज सा ऊँचे नभ में उड़ने की हिम्मत नहीं तो क्या

गोरैया सा हौसला रख लोगों के दिलों में तो समाया |

मुझे दुनिया में कोई पहचान नहीं तो क्या

साधारण इंसान बन अपने परिवार के काम तो आया |

( विजय वर्मा )

मेरी एक कविता संग्रह:

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4 replies

  1. अच्छी कविता

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  2. Acchi kavita.Dil khush.

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