# खेद नहीं है मुझे #

हम इंसान अपने ज़िंदगी में किसी किसी बात पर पछतावा करते रहते है |  जब  हमें अनुकूल मुकाम हासिल नहीं होता तो हमे  पछतावा होने लगता है |

हमें एक अच्छी नौकरी मिल रही थी लेकिन  हमें अपने माता पिता से इतना लगाव था कि  हम उनको अकेला छोड़कर दूसरे शहर नहीं जा सकते थे |  बाद में माता – पिता भी नहीं रहे और नौकरी भी खो दी , तब पछतावा होना स्वाभाविक है |

 हम माता – पिता का मन देखकर उनकी पसंद की लड़की से शादी तक कर लेते है | और  हमें जीवन भर  पछतावा होता है  कि हमने अपनी पसंद की  लड़की से शादी क्यों नहीं की ?

लेकिन पछतावा करने से अब  क्या हासिल ?  जब भी विपरीत परिस्थिति का सामना हो तो उसे ऊपर वाले की नियति समझ कर ग्रहण करना ही श्रेष्ठ होगा | अपनी तुलना किसी और से न करें और न ही ज़िंदगी में कभी खेद प्रकट करे — सुखी जीवन का यही मूल मंत्र है |

खेद नहीं है मुझे

मैं आपके जैसा नहीं हूँ

मैं वैसा ही दिखता हूँ

जैसा भगवान ने बनाया है।

खेद नहीं है  मुझे

मेरी आंखें भूरी नहीं है ,

मेरे बाल काले नहीं है,

मैं वैसा ही दिखता हूँ

जैसा भगवान ने बनाया है|

खेद नहीं है मुझे

मैं हिन्दू नहीं, मुस्लिम नहीं

सीख नहीं, न ही ईसाई हूँ

मेरे लिए सब एक जैसे है

वैसे ये भगवान ने नहीं बनाया है |

खेद नहीं है  मुझे

मेरे पास बंगला नहीं, मोटर नहीं, 

ना  ही हीरे – जवाहरात है

     दो वक़्त की रोटी खाता हूँ

और चैन की नींद पाता हूँ |

खेद नहीं है मुझे

मैं बाहुबली और बेईमान नहीं हूँ  

मैं नेता की तरह बिकने का सामान नहीं हूँ.

और इन पापों का भागीदार भी नहीं  हूँ |

खेद नहीं है मुझे

मैं कमजोर नहीं, लाचार नहीं हूँ

न ही किसी का गुनाहगार हूँ

न पुलिस को पीछे पाता हूँ ,

न डॉक्टर के पास जाता हूँ

मुझे खेद नहीं अभिमान है

मेरी ज़िंदगी की यही पहचान है |

               (विजय वर्मा)

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2 replies

  1. christinenovalarue's avatar

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