
एक भावपूर्ण ग़ज़ल है, जो तन्हाई, अनकहे दर्द और पुरानी यादों के बीच किसी अपने के साथ की तलाश को बयाँ करती है। कभी-कभी कुछ शब्द, कोई पुराना गीत या किसी प्रिय का मौन साथ भी उदास मन को सुकून दे जाता है। यह रचना उम्मीद का संदेश देती है कि अँधेरी रात कितनी भी लंबी हो, सुबह की रोशनी अवश्य आती है।
ग़ज़ल: ये रात उदास है
ख़ामोशियों में डूबा हुआ एहसास है,
कुछ तो कहो, ये रात बहुत उदास है।
चेहरे पे मुस्कुराहट, आँखों में नमी,
लगता है दिल में दबी कोई प्यास है।
चलो आज दर्द को लफ़्ज़ों में ढाल दें,
सीने में दबा हुआ कोई इतिहास है।
छेड़ो पुराना गीत, कोई भूली हुई धुन,
शायद इसी में छिपी जीने की आस है।
चाँदनी भी आज कुछ बुझी-बुझी-सी है,
तारों के दिल में भी कोई बनवास है।
तुम बैठो पास मेरे, कुछ न भी कहो,
तन्हाइयों को बस तुम्हारा आभास है।
कल की सुबह नई कोई उम्मीद लाएगी,
हर रात के बाद उजाले का निवास है।
आज दिल खोलकर रो लो, ऐ मेरे दोस्त,
आँसुओं के बाद ही मन पाता मिठास है |
(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com

Categories: kavita
Who helped you when you had absolutely nothing, when nobody believed in you and you had nowhere to go? Are you still close to that person today, or has life separated you people?
LikeLiked by 1 person