# हँसी की तलाश में..

हँसी का जीएसटी नहीं लगता!
– मुस्कुराइए, क्योंकि यह सबसे सस्ता और सबसे असरदार निवेश है

नमस्कार प्रिय मित्रों,

आशा करता हूँ कि आप सभी स्वस्थ, प्रसन्न और मुस्कुराते हुए होंगे। यदि अभी तक मुस्कुराए नहीं हैं, तो कोई बात नहीं। इस ब्लॉग के अंत तक कोशिश कीजिएगा कि कम-से-कम होंठों के कोने ही सही, थोड़ा ऊपर उठ जाएँ।

आजकल दुनिया में हर चीज़ महँगी होती जा रही है। पेट्रोल महँगा, सब्ज़ियाँ महँगी, बिजली महँगी, यहाँ तक कि नाराज़ होना भी महँगा पड़ने लगा है। क्योंकि एक बार रूठ गए तो मनाने के लिए चाय, कॉफी, मिठाई और कभी-कभी तो पूरा डिनर भी कराना पड़ जाता है!

लेकिन एक चीज़ आज भी बिल्कुल मुफ़्त है—मुस्कान।
न उस पर कोई टैक्स लगता है, न कोई लाइसेंस चाहिए और न ही उसे इस्तेमाल करने की कोई सीमा है।

❤️चिंता का राष्ट्रीय खेल

हम भारतीयों की एक अद्भुत आदत है। चिंता करने का कोई कारण न मिले तो हम भविष्य की चिंता कर लेते हैं।

बच्चा छोटा है तो चिंता कि बड़ा कब होगा। बड़ा हो गया तो नौकरी की चिंता। नौकरी मिल गई तो शादी की चिंता। शादी हो गई तो बच्चों की चिंता। बच्चे बड़े हो गए तो उनकी शादी की चिंता। और जब सारी चिंताएँ समाप्त होने लगती हैं तो डॉक्टर कहते हैं—”अब चिंता मत कीजिए।”

लगता है जैसे चिंता हमारे जीवन का स्थायी सदस्य बन चुकी है।

❤️हँसी की एक्सरसाइज़

कई लोग सुबह पार्क में जाकर ज़ोर-ज़ोर से हँसते हैं। पहली बार देखने वाला व्यक्ति सोचता है कि शायद इन्हें कोई बड़ी खुशखबरी मिली होगी।

लेकिन सच्चाई यह है कि वे बिना वजह हँस रहे होते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यदि कारण ढूँढ़ने बैठ गए तो शायद हँसी ही न आए!

वैज्ञानिक कहते हैं कि हँसने से शरीर में सकारात्मक हार्मोन बढ़ते हैं। हमारे गाँव के बुज़ुर्ग कहते थे—

“बेटा, हँस लिया करो। इससे दवा की दुकान के चक्कर कम लगेंगे।”

मुझे तो दोनों की बात सही लगती है।

❤️मोबाइल ने मुस्कान बदल दी

पहले लोग एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते थे। अब मोबाइल की स्क्रीन देखकर मुस्कुराते हैं।

कभी-कभी सामने बैठा व्यक्ति सोचता है कि शायद मेरी बात पर हँस रहे हैं, जबकि असलियत में किसी ने व्हाट्सऐप पर लिखा होता है—

“यह संदेश पाँच लोगों को भेजो, नहीं तो कल सुबह चाय में चीनी कम मिलेगी!”

और बेचारा तुरंत आगे भेज देता है।

❤️रिश्तों की असली मिठास

जीवन में ऐसे लोगों का साथ बहुत कीमती होता है जिनके सामने हम बिना किसी दिखावे के खुलकर हँस सकें।

कुछ मित्र ऐसे होते हैं जिनसे पाँच मिनट बात कर लो तो आधी परेशानी अपने आप छुट्टी पर चली जाती है। वे डॉक्टर नहीं होते, लेकिन उनकी हँसी किसी दवा से कम भी नहीं होती।

कहा भी गया है—

“जिस घर में हँसी की आवाज़ गूँजती है, वहाँ छोटी-छोटी परेशानियाँ दरवाज़े से ही लौट जाती हैं।”

❤️मुस्कान की सबसे बड़ी ताकत

मुस्कुराना समस्याओं से भागना नहीं है, बल्कि उनका सामना करने का साहस है।

जब हम मुस्कुराते हैं तो केवल अपना ही मन हल्का नहीं करते, बल्कि सामने वाले को भी यह विश्वास दिलाते हैं कि अँधेरी रात के बाद सुबह ज़रूर आती है।

कई बार आपकी एक सच्ची मुस्कान किसी उदास व्यक्ति के लिए पूरे दिन की सबसे सुंदर घटना बन जाती है।

❤️चलते-चलते…

जीवन एक लंबी यात्रा है। इसमें कभी धूप मिलेगी, कभी छाँव। कभी सफलता मिलेगी, कभी असफलता। लेकिन यदि चेहरे पर मुस्कान बनी रहे, तो रास्ते भी छोटे लगने लगते हैं।

याद रखिए—

हँसी वह इत्र है जिसे जितना दूसरों पर छिड़केंगे, उसकी महक उतनी ही आपके भीतर भी बसती जाएगी।

इसलिए आज एक छोटा-सा संकल्प लें—

कम शिकायत करेंगे,
थोड़ा ज़्यादा मुस्कुराएँगे,
खुद भी हँसेंगे और दूसरों को भी हँसाएँगे।

क्योंकि…

ज़िंदगी ने अगर हमें रोने के सौ बहाने दिए हैं, तो ईश्वर ने मुस्कुराने के हज़ार कारण भी दिए हैं। बस नज़र तलाशने की है।

हँसते रहिए, मुस्कुराते रहिए,
क्योंकि आपकी मुस्कान किसी थके हुए दिल की सबसे सुंदर उम्मीद बन सकती है।

सप्रेम,
विजय वर्मा

::BE HAPPY… BE ACTIVE… BE FOCUSED… BE ALIVE

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2 replies

  1. very nice

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