
यह कविता “सड़क” के प्रतीक के माध्यम से आज की तेज़, बेचैन और लक्ष्य-केंद्रित ज़िंदगी पर एक शांत लेकिन गहरी टिप्पणी है। सड़क सबको सहारा देती है, सबको देखती है, पर खुद कभी कहीं नहीं जाती। वह ठहराव, सहनशीलता और संतोष का प्रतीक बन जाती है—जहाँ इंसान सब कुछ पाने की दौड़ में जीना भूल चुका है। यह कविता पूछती नहीं, बस आईना दिखाती है।
सड़क की आत्मकथा
मैं सड़क हूँ—
किसी मंज़िल की नहीं,
सिर्फ़ सफ़र की पहचान।
धूप मुझे जलाती है,
बारिश मुझे भिगो देती है,
मगर मैं शिकायत नहीं करती।
मैं यहीं रहती हूँ—
स्थिर,
और दुनिया को चलते हुए देखती हूँ।
हर दिन
हज़ारों कदम मुझ पर से गुज़रते हैं।
कुछ हँसते हुए,
कुछ टूटे हुए,
कुछ ऐसे भी
जिन्हें खुद नहीं पता
कि वे कहाँ जा रहे हैं।
सबको जल्दी है—
जीतने की,
पाने की,
कहीं और पहुँच जाने की।
समय कम है,
साँसें तेज़ हैं,
और ज़िंदगी…
किसी और दिन के लिए टाल दी गई है।
मैं देखती हूँ—
सब कुछ होते हुए भी
चेहरों पर खालीपन।
इतनी आवाज़ों के बीच
एक अजीब सा सन्नाटा।
मैं जानती हूँ—
सपनों के पीछे भागना आसान है,
पर अपने भीतर ठहर जाना
बहुत हिम्मत माँगता है।
अगर यही जीना है,
तो मैं ठीक हूँ।
न लालच की दौड़,
न उम्मीदों का बोझ,
न कल का डर।
मैं सड़क हूँ—
मेरे पैर नहीं,
फिर भी मैं बहती हूँ।
मेरे शब्द नहीं,
फिर भी मैं कहानियाँ सँजोती हूँ।
और कभी-कभी,
जब रात की चाँदनी
मुझे चुपचाप छू जाती है,
मैं समझ जाती हूँ—
हर मुसाफ़िर एक जीवन है,
हर जीवन एक सवाल।
उसे जीना है…
मगर कैसे,
यह जवाब
अक्सर मेरी ही खामोशी में
गुम हो जाता है।
(विजय वर्मा)
www.retiredkalam.com

Categories: kavita
बहुत सुंदर और गहराई से लिखी गई कविता वर्मा जी । “सड़क” को जिस तरह ठहराव और जीवन के आईने की तरह इस्तेमाल किया है, वह बेहद प्रभावशाली लगा। 🤍
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आपके इतने सुंदर और संवेदनशील शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद। 🤍
यह जानकर बहुत संतोष मिला कि कविता में “सड़क” का प्रतीक आपको जीवन और ठहराव के आईने की तरह महसूस हुआ।
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very nice .
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Thank you so much.
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अमूल्य भावार्थ से शोभित कविता,,,🙏🏻 सुप्रभात सर जी
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बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सर जी। 🙏🏻
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों ने मन को आनंदित कर दिया।
यदि भावार्थ पाठकों के हृदय को स्पर्श कर सके, तो लेखनी सार्थक हो जाती है।
आपको सादर सुप्रभात एवं मंगलमय दिवस की शुभकामनाएँ। 🌸
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A deeply reflective piece—the road becomes a powerful symbol of silent endurance, witnessing the restless pace of modern life while asking for nothing in return. 🌿✨
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Thank you for such a profound and thoughtful reflection. 🙏🌿
I’m truly touched by the way you interpreted the symbolism of the road. Yes, in many ways, the road silently mirrors life itself—carrying burdens, witnessing countless journeys, and continuing forward without complaint or expectation.
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