# अधूरी किताब #

यह एक भावनात्मक और चिंतनशील कविता है, जो जीवन को एक ऐसी कहानी के रूप में प्रस्तुत करती है जो कभी पूरी नहीं होती। यह कविता बताती है कि जीवन की असली सुंदरता उसकी अधूरापन, अनुभवों, असफलताओं और खामोशियों में छिपी होती है।

हर दिन एक नया पन्ना है, और हर अनुभव हमें थोड़ा और गहराई से समझने और जीने की सीख देता है।

# अधूरी किताब #

मेरी ज़िंदगी एक किताब-सी है,
ना पूरी लिखी, ना पूरी समझी गई—
कुछ पन्ने मैंने खुद लिखे,
कुछ वक़्त ने लिख दिए।

कभी खुशी की स्याही गहरी थी,
कभी ग़म हल्का-सा धुंध बन गया,
कभी सपने सफ़ेद पन्नों पर चमके,
कभी सच उन पर बोझ बन गया।

बचपन के पन्ने—
जैसे सुबह की पहली रोशनी,
मासूम, बिना सवालों के,
सिर्फ़ एहसासों से भरे हुए।

फिर आई ज़िंदगी—
सवाल लेकर, इम्तिहान लेकर,
जीत का एक पल दिया,
और हार का लंबा सफ़र।

पर अजीब बात यह है—
हार ने ज़्यादा सिखाया,
और ख़ामोशी ने वह कह दिया
जो अल्फ़ाज़ कभी कह न पाए।

अब जब पलटकर देखता हूँ,
तो समझ आता है—
यह किताब ख़ूबसूरत इसलिए है
क्योंकि यह अधूरी है।

हर नया दिन
एक नया पन्ना है,
और मैं—
अब लिखने से डरता नहीं।

(विजय वर्मा)
 www.retiredkalam.com



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  1. very nice .

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