
यह कविता अधूरे स्पर्श, छूटे हुए लम्हों और उन दूरियों की कहानी है जो समय के साथ मिटती नहीं, बल्कि यादों में अपना स्थायी घर बना लेती हैं। एक क्षण की झिझक कैसे पूरी ज़िन्दगी का नसीब तय कर देती है—इसी भावनात्मक सच्चाई को शब्दों में पिरोया गया है।
# अधूरी गर्माहट #
एक हाथ की गर्माहट,
एक लम्हे की दूरी,
और एक उम्र भर का नसीब—
कभी-कभी यही तीन बातें
पूरी ज़िन्दगी का हिसाब लिख देती हैं।
जो उँगलियाँ छू भी न सकीं,
वही सबसे गहरी याद बन जाती हैं;
जिस लम्हे को पकड़ा न जा सका,
वही दिल की धड़कनों में घर कर लेता है।
तेरा हाथ थोड़ी देर और थाम लेता
तो शायद मौसम बदल जाते,
क़िस्मत की रेखाएँ
कुछ और लिखी जातीं।
मगर वह एक साँस,
एक झिझक,
एक ठहरा हुआ पल—
हमारे बीच दीवार बनकर खड़ा रहा।
आज भी जब रात चुप होती है,
तेरी वही अधूरी गर्माहट
मेरे हाथों में लौट आती है,
जैसे समय कह रहा हो—
कुछ दूरियाँ ख़त्म नहीं होतीं,
बस यादों में अपना दूसरा घर बना लेती हैं।
और मैं…
हर बार उसी घर की दहलीज़ पर
ठहर जाता हूँ—
जहाँ तू नहीं,
पर तेरा नसीब लिखा हुआ है। 🌙
(Vijay Verma)
www.retiredkalam.com

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Categories: kavita
So quietly heartbreaking… it lingers like a touch that never really left. 🌙
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That’s beautifully said… 🌙
Some feelings don’t make noise, they just stay—soft, persistent, like an echo you don’t want to lose.
I’m glad it lingered with you in that way.
Thank you for feeling it so deeply.
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very nice .
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Thank you so much.
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